अनार की खेती (Pomegranate Farming Info in Hindi)

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दोस्तों आज हम बात करेंगे, अनार फल की जिसमें विभिन्न प्रकार के औषधि गुण मौजूद होते हैं। अनार एक बहुत ही फायदेमंद फल है यह दिखने में लाल रंग का होता है, इसमें बहुत सारे छोटे छोटे लाल रंग के रस भरे दाने होते हैं। अनार (Pomegranate) को विभिन्न प्रकार के नाम से जाना जाता है, अनार को बहुत से लोग बेदाना भी कहते हैं।

अनार के पेड़ में फल आने से पहले अनार के बड़े लाल लाल फूल आते हैं जो बेहद ही खूबसूरत लगते हैं।

अनार के फल की खेती

अनार की खेती बहुत से क्षेत्रों में होती है, लेकिन अनार की मुख्य पैदावार भारत के महाराष्ट्र में होती है। अनार की पैदावार के लिए मुख्य राज्य जैसे: हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात आदि क्षेत्रों में अनार की पैदावार छोटे स्तर पर की जाती है बगीचे द्वारा, अनार के रस बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं, स्वादिष्ट होने के साथ इसमें कई तरह के औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं।

अनार के उत्पादन की बात करें, तो भारत में अनार का क्षेत्रफल लगभग 113.2 हजार हेक्टेयर उत्पादन तथा इनमें करीब 745 हजार मैट्रिक टन और उत्पादकता 6.60 मैट्रिक टन प्रति हेक्टेयर की खेती होती हैं।

अनार के लिए जलवायु

किसान अनार की पैदावार के लिए उपोष्ण जलवायु सबसे अच्छी बताते हैं। क्योंकि अनार उपोष्ण जलवायु का पौधा होता है। अनार को उगाने के लिए सबसे अच्छी जलवायु अर्द्ध शुष्क जलवायु होती हैं, इस जलवायु में अनार की पैदावार काफी अच्छी उगाई जा सकती है।

अनार के फलों का अच्छी तरह से विकास और पूर्ण रूप से पकने के लिए गर्म वातावरण तथा शुष्क जलवायु की बहुत ही जरूरत होती है।

अनार के फलों की मिठास को बनाए रखने के लिए अच्छे तथा लंबे समय तक तापमान का उच्च रहना आवश्यक होता है। आर्द्र जलवायु के कारण फलों की गुणवत्ता को काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है। अनार की खेती किसान समुंद्र तल से लगभग 500 मीटर से ज्यादा ऊंचे स्थानों पर करते हैं। अतः या जलवायु अनार की पैदावार को काफी अच्छा बढ़ावा देती है।

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अनार के लिए मिट्टी का चयन

किसानों के अनुसार आप अनार को किसी भी मिट्टी में उगा सकते हैं, परंतु इसके अच्छे विकास और अच्छी फसल, तथा जल निकास के लिए जो सबसे अच्छी मिट्टी है। वह रेतीली दोमट मिट्टी है, या मिट्टी अनार की फसल के लिए सबसे सर्वोत्तम मानी जाती है।

अनार के पौधों की सिंचाई

anaar ke paudhe ki sinchai

अनार के पौधों के लिए सिंचाई बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होती है, परंतु अनार के पौधे बहुत ही सूखे और सहनशील पौधा होता है। अनार के पौधों की सिंचाई के लिए मई का महीना सबसे अच्छा होता है, आप को मई से लेकर मानसून आने तक पूर्ण रूप से पौधों की सिंचाई करनी होती है। 10 से 15 दिनों के बीच पौधों की सिंचाई करनी चाहिए, क्योंकि वर्षा ऋतु होने के बाद फलों का काफी अच्छी मात्रा में विकास होता है। कई प्रकार की तकनीकों द्वारा किसान सिंचाई करते हैं जैसे ड्रिप, यदि जब आप ड्रिप से सिंचाई करें, तो इसकी आवश्यकता अनुसार ही करें। ड्रिप सिंचाई अनार की फसल के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी साबित होती है। इसमें लगभग 40% पानी की बचत होती है तथा 30 से 35% उपज में वृद्धि भी होती है।

अनार के पौधों की सधाई

अनार के पौधों के लिए सधाई बहुत ही जरूरी होती है, इनके अच्छे विकास के लिए सधाई आप दो तरह से कर सकते हैं यह दो प्रकार निम्नलिखित है :

एक तना पद्धति की सधाई

इस प्रकार की सधाई में किसान एक तने को छोड़कर जो सभी बाहरी टहनियां होती है, उन सभी टहनियों को किसी तेज औजार द्वारा काटकर अलग कर देते हैं। यह सभी पद्धति द्वारा जमीन में बहुत सारे सतह से अधिक सकर को निकालती है। इस क्रिया द्वारा पौधा झाड़े नुमा हो जाता है। कभी-कभी इस विधि को अपनाकर तना छेदक का अधिक होने का भय भी बना रहता है। यदि हम इस पद्धति को व्यावसायिक उत्पादन की दृष्टिकोण से देखें तो यह बहुत ज्यादा उपयुक्त नहीं होती।

बहु तना पद्धति की सधाई

इस विधि में अनार के पौधों को इस प्रकार से सधाई किया जाता है, कि इस क्रिया द्वारा 3/4 तने को छोड़कर सभी टहनियों को काटकर अलग कर दिया जाता है। इस स्थिति में प्रकाश की अच्छी रोशनी पौधों पर पड़ती है जिसकी वजह से पेड़ पौधों में फूल और फल की अच्छी मात्रा आना शुरू हो जाती है।

अनार की तुड़ाई

Anaar ki tudai

अनार स्वाद में मीठे तथा इस में मौजूद पोषक तत्व इसको लोकप्रिय फल बनाते हैं, इसकी तुड़ाई कम से कम 120 दिन से लेकर 130 दिन के बाद करनी चाहिए। अनार को नान-क्लामेट्रिक फल भी कहा जाता हैं।

अनार को तोड़ने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए, कि अनार पूर्ण रुप से पक गए हैं कि नही तभी इनकी तुड़ाई करें।

अनार में फल फटने का रोग 

अनार के फल फटने का रोग किस कारण होता है, ऐसी कौन सी कमी होती है जिसकी वजह से अनार के फल फट जाते हैं, यदि आप इस चिंता से जूझ रहे हैं, तो हम आपको इस की सही वजह बताते हैं जिससे आपको इन फलों के फटने का कारण पता चल जाएगा।

  • अनार के फलों के फटने का मुख्य कारण, किसी भी समय अचानक से सिंचाई देना इसका मुख्य कारण है।
  • जब तापमान में अचानक से परिवर्तन आता है तो भी फल फटने का भय बना रहता है।
  • कुछ ऐसे तत्व हैं जैसे बोरॉन और कैल्शियम जिनकी कमी के कारण फल फट जाते हैं।
  • कभी-कभी अचानक से गर्म हवाएं भी चलती है जिसकी वजह से फलों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है और फलों में फटने की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

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अनार के पौधे की देखभाल :

अनार के पौधों की देखभाल करने के लिए किसान पौधों में गोबर की खाद का इस्तेमाल करते हैं और इनमें उर्वरक भी डालते हैं। उर्वरक पौधों की गुणवत्ता को बढ़ावा देता है। किसान अनार के पौधों की देखभाल के लिए और उनकी उत्पादकता को बढ़ाने के लिए 600 से 700 ग्राम यूरिया तथा 200 ग्राम सुपर फास्फेट और 200 से 250 ग्राम पोटेशियम सल्फेट को मिलाकर करीब साल भर में डालना चाहिए।

Anar ke paudhe ki dekhbhaal

अनार के पेड़ों में पानी की मात्रा देते वक्त इन विभिन्न प्रकार की बातों का ध्यान रखें। कि पौधों के आसपास ज्यादा गड्ढे में पानी न भरे, जिसकी वजह से अनार की जड़ें कमजोर हो जाए, पानी पूर्ण रूप से निकास का मार्ग बनाए रहे। इन बातों का ख्याल जरूर रखें वरना जड़े गल कर कमजोर हो जाएंगी।

अनार में पाए जाने वाले विटामिन

अनार में एक नहीं बल्कि कई तरह के विटामिन पाए जाते हैं, अनार खाने से त्वचा और बालों को बेहद फायदा होता है, त्वचा चमकती रहती हैं, और बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। अनार में विटामिन के, सी बी के साथ – साथ आयरन, और फाइबर, जिंक, पोटेशियम, ओमेगा यह 6 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।

यह सभी आवश्यक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही साथ काम करने की क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

दोस्तों हम उम्मीद करते हैं, कि आपको हमारी यह पोस्ट अनार से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारियों से आप संतुष्ट हुए होगे, यदि आपको हमारी दी हुई यह जानकारियां अच्छी लगी हों, तो हमारी इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया और दोस्तों के साथ शेयर करें।

धन्यवाद।

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