चुकंदर की खेती – Chukandar (Beet Root Farming information in Hindi)

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दोस्तों आज हम बात करेंगे चुकंदर की, इसको इंग्लिश में Beet Root भी कहते हैं। चुकंदर के एक नहीं बहुत सारे फायदे हैं, चुकंदर की खेती की पूरी जानकारी और उनसे होने वाले बेनिफिट्स के बारे में जानने के लिए हमारी इस पोस्ट के अंत तक जरूर बने रहें है।

चुकंदर

चुकंदर एक ऐसा फल है जिसको लोग खाना बहुत पसंद करते हैं। लोग चुकंदर को सब्जियों के तौर पर पकाकर ,बिना पकाए ,कच्चा,आदि के रूप में खाना पसंद करते हैं। क्योंकि चुकंदर में विभिन्न विभिन्न प्रकार के औषधि गुण है जो शरीर को बहुत फायदा पहुंचाते हैं। चुकंदर का स्वाद थोड़ा मीठा होता है चुकंदर जमीन के अंदर पाए जाते हैं। लोग चुकंदर के फल के साथ ही साथ इनके पत्तों का भी इस्तेमाल करते हैं। सब्जी सलाद आदि के तौर पर, चुकंदर हमारे लिए इतना उपयोगी होता है कि कभी-कभी डॉक्टर विभिन्न प्रकार के रोग हो जाने पर चुकंदर खाने की सलाह देते हैं। जैसे: खून की कमी ,एनीमिया, कैंसर ,हृदय रोग, पित्ताशय विकारों, बवासीर, गुर्दे के विकारों जैसी समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर चुकंदर खाने की सलाह मरीजों को देते हैं। इन कारणों से चुकंदर की मांग बहुत बढ़ जाती है और किसान इस फसल से काफी अच्छा धन निर्यात कर लेते हैं।

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चुकंदर की फसल की खेती

चुकंदर जैसी लाभदायक फसल की खेती करने के लिए किसान ज्यादातर बलुई दोमट मिट्टी का इस्तेमाल करते हैं। चुकंदर की खेती करते समय किसान जलभराव वाली समस्या से बचने का भी पूर्ण ध्यान रखते हैं। क्योंकि जलभराव वाली भूमि चुकंदर के फल को पूरी तरह से सड़ा सकती हैं और विभिन्न  प्रकार की समस्याओं को भी पैदा कर सकती है। खेती के लिए कम से कम भूमि का पीएच मान 6 से 7 के बीच का होना आवश्यक होता है।

चुकंदर की खेती के लिए जलवायु तथा तापमान :

चुकंदर की फसल के लिए सबसे अच्छा मौसम ठंड का बताते हैं, क्योंकि ठंडी के मौसम में चुकंदर की फसल काफी अच्छी तरह से उत्पादन के साथ ही साथ, विकास भी भरपूर होता है। जो प्रदेश ठंडे होते हैं वहां चुकंदर की फसल को काफी उपयुक्त माना जाता है। चुकंदर एक ऐसी फसल है जिसके लिए बहुत ज्यादा बारिश की कोई आवश्यकता नहीं होती है।बारिश किसी भी प्रकार से चुकंदर की फसल को प्रभावित नहीं करती है। चुकंदर की फसल के लिए 20 डिग्री का तापमान इसकी फसल के लिए काफी होता है। सामान तापमान भी चुकंदर की फसल के लिए उपयुक्त समझा जाता है।

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चुकंदर की फसल के लिए खेत को तैयार करना

चुकंदर की फसल के लिए खेत को तैयार करना

सर्वप्रथम चुकंदर की फसल के लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार करना आवश्यक होता है।

चुकंदर की फसल को उगाने के लिए भूमि की अच्छी गहरी जुताई करनी चाहिए। जुताई के बाद खेतों को कुछ देर के लिए ऐसी ही खुला छोड़ना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से खेतों में भली प्रकार से धूप लग जाती है। चुकंदर की जड़े काफी गहराई में रहती है जिसके फलस्वरूप यह खनिज पदार्थों को ग्रहण करने की क्षमता नहीं रखते। उवर्रक की मात्रा अच्छे से देना जरूरी होता है खेत तैयार करते समय या खेतों के लिए उपयोगी माना जाता है। खेतों में किसान लगभग 14 से 15 गाड़ी पुरानी गोबर की खाद और कल्टीवेटर के जरिए, कम से कम दो से तीन बार तिरछी जुताई करते हैं जिससे मिट्टी में खाद अच्छे से भिन्न जाए। खेतों में पानी देने के बाद तीन से चार दिनों के लिए खेतों को ऐसे ही छोड़ देना आवश्यक होता है। जब मिट्टी पानी को अपने अंदर अवशोषित कर ले और ऊपरी सता सूखी नजर आने लगे तो रोटावेटर के जरिए जुताई कर लेनी चाहिए। खेतों को समतल करने के लिए पाटा लगाकर अच्छी तरह जुताई करें। इस प्रक्रिया से जमीन पूरी तरह से समतल हो जाती है और कोई भी जलभराव की समस्या नहीं पैदा होती।चुकंदर की फसलों के छिड़काव के लिए कुछ रसायनिक उर्वरकों का भी इस्तेमाल किया जाता है। जैसे : नाइट्रोजन 40 किलो पोटाश 60 किलो तथा 80 किलो पोटाश की मात्रा प्रति हेक्टेयर का इस्तेमाल जुताई के लिए किया जाता है, यह आखरी जुताई होती है।

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चुकंदर की बीजो की रोपाई, समय तथा तरीका

चुकंदर के लिए रोपाई का समय सबसे अच्छा ठंडी का होता है। बीज रोपण किसान अक्टूबर और नवंबर के महीने में करना शुरू कर देते हैं।

बीज रोपण करने से पहले बीजो को अच्छी तरह से उपचारित कर लेना आवश्यक होता है। उपचारित करने से खेतों में किसी भी प्रकार का रोग नहीं लगता। अनुमान के हिसाब से एक हेक्टेयर खेत में लगभग 8 किलो बीजों की जरूरत पड़ती है। इन क्रियाओं के बाद बीज रोपण किया जाता है।

चुकंदर के पौधों की सिंचाई के तरीके

चुकंदर के पौधों की सिंचाई के लिए भूमि में नमी बरकरार रहना आवश्यक होता है। क्योंकि इससे पौधे बहुत अच्छी तरह से अंकुरित होते हैं। बीज रोपण के बाद सर्वप्रथम सिंचाई देनी चाहिए।

जब बीज अंकुरित हो जाए ,तो आप खेतों में पानी की मात्रा को कम कर सकते हैं। चुकंदर के पौधों की सिंचाई लगभग 8 से10 दिनों के अंदर करते रहना चाहिए।

दोस्तों हम उम्मीद करते हैं कि हमारा Chukandar (Beet Root) वाला आर्टिकल आपको काफी पसंद आया होगा। इस आर्टिकल में चुकंदर की पूर्ण जानकारी दी गई है। जो आपके भविष्य में काम आ सकती है यदि आप हमारी दी हुई जानकारी से संतुष्ट हुए हैं। तो हमारी इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया और अन्य स्थानों और दोस्तों के साथ शेयर करें।

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