भूसा के बढ़ते भाव ने पशुपालकों को लिया जकड़, तो तूरी ने ईंट भट्ठा स्वामियों को दिखाई अकड़

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भूसा के भाव बढ़ने से पशुपालक परेशान, तो तूरी ने ईंट भट्ठा स्वामियों को दिखाई अकड़

लखनऊ।
महंगाई की मार से जहां आम आदमी के घरों का चूल्हा चलना मुश्किल हो रहा है। वहीं पशुओं के चारे पर लगातार बढ़ रहीं कीमतों ने पशुपालकों को परेशान कर दिया है। दूसरी तरफ सरसों की तूरी ने भी मंहगाई को तड़का लगाते हुए ईंट भट्ठा स्वामियों को अकड़ दिखाना शूरू कर दिया है।

इस सीजन में पशुओं का पेट भरने वाला भूसा का भाव 1000 से 1200 रु. प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। जिससे पशुपालकों को परेशानी हो रही है। भूसा के दामों में बेहताशा वृद्धि के चलते पशुओं तक भरपेट भोजन नहीं पहुंच पा रहा है।

गेहूं की कम पैदावार की वजह से बढ़े हैं भूसा के दाम

– भूसा के दामों में लगातार हो रही वृद्धि गेहूं की कम पैदावार का मुख्य कारण है। गेहूं की बहुतायत में पैदावार करने वाले यूपी, हरियाणा व पंजाब में भी भूसा के दामों में बढ़ोतरी हुई है।

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अभी और बढ सकते हैं भूसा के दाम

– इन दिनों पशुपालक हरे चारे के सहारे पशुओं का पेट भर रहे हैं। भूसा की कम खपत हो रही है। हरा चारा कम होते ही भूसा की खपत बढ़ जाएगी। इससे भूसा के दामों में और भी उछाल देखने को मिल सकता है।

सरसों की तूरी से पकाई जाती हैं ईंटे

– सरसों की तूरी को ईंट भट्ठों पर आग जलाने में प्रयोग किया जाता है। सरसों की तूरी से ईंट भट्ठा में आग तेजी से जलती है। जिससे कच्ची ईंटों को पकाया जाता है।

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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सरसों में हुआ था भारी नुकसान

– सरसों की फसल का उत्पादन राजस्थान में ज्यादा होता है। बीते सीजन में बेमौसम बरसात व ओलावृष्टि से सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ था। जिससे सरसों की फसल अच्छी नहीं रही। तूरी के भाव भी इसी कारण बढ़े हैं।

क्या भाव है भूसा और तूरी

– भूसा के भाव 1000 से 1200 रु. प्रति क्विंटल हैं।
– सरसों की तूरी के भाव 500 से 650 रु. प्रति क्विंटल हैं।

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लोकेन्द्र नरवार

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