लोबिया की खेती से किसानों को होगा दोहरा लाभ

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Lobia ki kheti  – Cowpea Farming information in Hindi

लोबिया की खेती से किसान काफी लाभ कमा सकते हैं। दलहन फसल की श्रेणी के लोबिया की खेती (Lobia Farming) से दो तरीके से लाभ होता है। लोबिया की फलियों की सब्जी होती है। इसका प्रयोग पशुचारा और हरी खाद के रूप में किया जाता हैं। इसे बोड़ा, चौला या चौरा, करामणि, काऊपीस – (cowpea) भी कहा जाता है। यह सफेद रंग का और बड़ा पौधा होता है। इसकी फलियां पतली, लंबी होती हैं और इसके फल एक हाथ लंबे और तीन अंगुल तक चौड़े और कोमल होते है।

लोबिया की खेती के लिए जलवायु:

गर्म व आर्द्र जलवायु में 24-27 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान में लोबिया की खेती होती है।

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लोबिया की खेती कैसी जमीन में करनी चाहिये ?

  • लोबिया की खेती वैसे जमीन में करनी चाहिये, जिसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो।
  • क्षारीय भूमि इसकी खेती के लिये के उपयुक्त नहीं होता है।
  • इसके मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए।

लोबिया की खेती कब करनी चाहिये ?

लोबिया की बुआई बरसात के मौसम में जून के अंत से लेकर जुलाई माह तक और गर्मी के मौसम में फरवरी-मार्च में की जाती है।

लोबिया की उन्नत किस्में :

लोबिया की कई उन्नत किस्में हैं। आवश्यकता के अनुसार किस्म का चयन करना चाहिये।

  • दाने के लिए लोबिया की उन्नत किस्मों में सी- 152, पूसा फाल्गुनी, अम्बा (वी- 16), स्वर्णा (वी- 38), जी सी- 3, पूसा सम्पदा (वी- 585) और श्रेष्ठा (वी- 37) आदि प्रमुख है।
  • चारे के लिए लोबिया की उन्नत किस्मों में जी एफ सी- 1, जी एफ सी- 2 और जी एफ सी- 3 आदि अच्छी किस्में हैं।
  • खरीफ और जायद दोनों मौसम में उगाये जाने वाले किस्मों में बंडल लोबिया- 1, यू पी सी- 287, यू पी सी- 5286 रशियन ग्रेन्ट, के- 395, आई जी एफ आर आई (कोहीनूर), सी- 8, यू पीसी- 5287, यू पी सी- 4200, यू पी सी- 628, यू पी सी- 628, यू पी सी- 621, यू पी सी- 622 और यू पी सी- 625 आदि हैं।
  • लोबिया की बुवाई के लिए 12-20 कि.ग्रा. बीज/हेक्टेयर उपयुक्त होता है। जबकि बेलदार लोबिया की बीज कम मात्रा में ली जा सकती है।

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लोबिया बुवाई के समय ध्यान रखना चाहिए कि इनके बीच की दूरी सही हो:

  • लोबिया की झाड़ीदार किस्मों के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45-60 सेमी. तथा बीज से बीज की दूरी 10 सेमी. रखनी चाहिए।
  • बेलदार लोबिया के पंक्ति से पंक्ति की दूरी 80-90 सेमी. रखना सही होता है।

लोबिया की खेती में खाद, खर पतवार नियंत्रण व सिंचाई:

  • बुवाई के पूर्व लोबिया के बीज का राजजोबियम नामक जीवाणु से उपचार जरूरी होता है।
  • खेत में गोबर या कम्पोस्ट की 20 टन मात्रा बुवाई से एक माह पहले डालनी चाहिए। नत्रजन 20 किग्रा, फास्फोरस 60 कि.ग्रा. तथा पोटाश 50 कि.ग्रा. की मात्र प्रति हेक्टेयर की दर से जुलाई के अंत में मिट्टी में मिलानी चाहिए।
  • फसल में फूल आने के समय नत्रजन की 20 कि.ग्रा. की मात्रा फसल में देनी चाहिए।
  • लोबिया के पौधों की दो-तीन निराई व गुड़ाई करनी चाहिए ताकि खर पतवार पर नियंत्रण रह सके।
  • गर्मी में इसकी फसल को पर 5 से 6 सिंचाई की जरूरत होती है। इसकी सिंचाई 10 से 15 दिनों के अंतर पर करनी चाहिए।

लोबिया की तुड़ाई/कटाई कब करें ?

  • लोबिया के हरी फलियों की तुडाई बुवाई के 45 से 90 दिन बाद किस्म के आधार पर करनी चाहिये।
  • चारे के लिये फसल की कटाई बुवाई के 40 से 45 दिन बाद की जाती है।
  • दाने की फसल के लिए कटाई, बुवाई फलियों के पुरे पक जाने पर 90 से 125 दिन बाद करनी चाहिए।
  • लोबिया की नर्म व कच्ची फलियों की तुड़ाई 4-5 दिन के अंतराल पर की जा सकती है।
  • झाड़ीदार प्रजातियों में 3-4 तुड़ाई तथा बेलदार प्रजातियों में 8-10 तुड़ाई की जा सकती है।

लोबिया की फसल से दाना व चारा की प्राप्ति :

  • लोबिया की एक हेक्टेयर की फसल से करीब 12 से 17 क्विंटल दाना व 50 से 60 क्विंटल भूसा प्राप्त किया जा सकता है।
  • जबकि 250 से 400 क्विंटल तक हरा चारा प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त किया जा सकता है।

लोबिया – Cowpea (Lobia/Karamani) Mandi Bhav मंडी भाव :

30 जून 2022 को मुंबई मंडी में लोबिया मूल्य 7128 रुपए प्रति क्विंटल था।

 

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