पेशेंस है तो करें इलायची की खेती, फिर पैसा ही पैसा है

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इलायची की खेती पेशेंस मांगती है. पैसा मांगती है. वक्त मांगती है. साफ-सफाई मांगती है. बढ़िया सिंचाई मांगती है. अगर इतना सब कुछ आपके पास है तभी इस खेती को अपनाएं….

इलायची में भारत नंबर 1

दुनिया में सबसे ज्यादा मसाले भारत में बनते हैं, इन्हीं मसालों में एक है छोटी इलायची या इलायची। इसके उत्पादन में भी भारत दुनिया का नंबर 1 देश है, इलायजी का इस्तेमाल हमारे जीवन के हर मोड़ पर होता है। भोजन करने से लेकर आदमी जितने भी कर्मकांड करता है, सभी में इलायची की जरूरत पड़ती ही है। माना जाता है, कि यह देवताओं को भी प्रिय है, अपने स्वाद के कारण इलायची भारत में ही नहीं, दुनिया भर में मशहूर है। इसकी कीमत भी लगभग 2000 रुपये प्रति किलो से कहीं ज्यादा है। आज हम जानेंगे कि इलायची की खेती कहां, कैसे करनी चाहिए और इससे लाभ कैसे कमाया जा सकता है।

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इलायची के प्रकार

मोटे तौर पर भारत में दो किस्म की इलायची पाई जाती हैं। एक होती है, बड़ी इलायची और दूसरी होती है छोटी इलायची बड़ी इलायची का कवर काले रंग का होता है। छोटी इलायची का कवर हरे रंग का होता है, बड़ी इलायची के दाने काले और धूसर होते हैं, जबकि छोटी इलायची के दाने सिर्फ धूसर ही होते हैं।

कैसी जमीन चाहिए

इलायची की खेती के लिए लाल दोमट मिट्टी की जरूरत पड़ती है, इसके पौधों पर धूप नहीं पड़ना चाहिए। इसके साथ ही इसे नमी भी चाहिए होती है, इस लिहाज से ही साउथ के कई स्टेट हैं, जहां पर इसकी खेती की जाती है। खास कर तमिलनाडु और केरल में, इन दोनों राज्यों में समुद्र हैं और समुद्र होने के नाते माहौल में नमी रहती है। माना जाता है, कि इलायची की खेती के लिए जमीन का स्टैंड्र्ड मान पीएच 5 से 7 के बीच में ही होना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक मानते हैं, कि इसकी खेती समुद्र तल से 600 से 1500 मीटर की ऊंचाई वाली जमीन पर की जानी चाहिए। इसकी खेती के लिए 1500 एमएम बारिश की जरूरत होती है। इलायची आप जिस खेत में लगा रहे हैं, उसका तापमान सामान्य ही होना चाहिए। न ज्यादा गर्मी, न ज्यादा ठंड और न ही ज्यादा बारिश। माना जाता है, कि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के बीच में इलायची की बेहतरीन खेती की जा सकती है।

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खेती कैसे करें

यह जरूरी है, कि आप जिस जमीन पर खेती करना चाहते हैं, उसे अच्छी तरह से जोतें। पिछली फसलों के अवशेष पूरी तरह हटा दें, फिर खेतों में मेड़ बनाएं, उसे पानी से लबालब भर दें। फिर खेत में रोटावेटर चलवाएं और गहरी खुदाई करवाएं, इससे मिट्टी 100 प्रतिशत समतल हो जाएगी। अब आप दो-दो फीट की दूरी पर इलायची के पौधे लगाएं, अगर आप मेड़ पर लगाना चाहें तो मेड़ पर लगाएं या फिर समतल भूमि पर ही लगा दें।

नर्सरी तैयार करें

आपको नर्सरी तैयार करनी होगी, नर्सरी में पौधे के बीज को 10 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं। नर्सरी में बीज लगाने से पहले ट्राइकोडर्मा की उचित मात्रा से उपचारित कर लें। अगर आप एक हेक्टेयर भूमि पर इलायची लगाना चाहते हैं, तो आपको सवा किलो इलायची के बीज लगाने होंगे। उसके पहले आपको क्यारियों में 20 से 25 किलो उत्तम गुणवत्ता वाला खाद देना पड़ेगा। दो दिन खाद डालने के बाद तीसरे दिन क्यारियों में बीज लगा दें, जब तक बीज अंकुरित नहीं हो जाते हैं, तब तक आप उन्हें पुलाव या सूखी घास से ढंक दें। फिर जब पौधे तैयार हो जाएं तो उसे खेत में रोप दें।

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सिंचाई का तरीका

आप जैसे ही इलायची के पौधों को खेत में रोपते हैं, उन्हें तुरंत पानी की जरूरत होती है। यदि बारिश के मौसम में आप पौधे रोप रहे हैं, तो सिंचाई की जरूरत नहीं। बरसता हुआ पानी उनके लिए सबसे बढ़िया साबित होता है। यदि बारिश का महीना नहीं है, तो समय-समय पर पानी देने की जरूरत पड़ती है, ठंड के मौसम में 10 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए।

खर-पतवार हटाएं

इलायची को साफ-सुथरी जगह चाहिए इसलिए, रोज खेत में जाएं और देखें कि कहीं खरपतवार ने तो पौधे को कवर नहीं कर लिया है। जहां भी आपको खर-पतवार दिखें, उसे तुरंत हटा दें। जब तक आपकी इलायची के दाने न निकल आएं, तब तक आपको साफ-सफाई का ध्यान रखना ही होगा।

किस महीने में लगाएं पौधे

इलायची के पौधे आप बारिश के मौसम में लगाएंगे तो बेहतर रहेगा, इसमें सिंचाई की जरूरत खत्म हो जाती है।

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दो से तीन साल का इंतजार

इलायची की खेती आपके धैर्य की भी परीक्षा लेती है। यह महीने-दो महीने की फसल नहीं है, इसमें आपको लगातार दो से तीन साल तक सेवा करनी होती है। अमूमन ढाई साल में ही इलायची तैयार हो पाती है।

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