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लॉकडाउन से परेशान किसान

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किसानों के सामने प्राकृतिक आपदाओं का दौर जितना खरतनाक नहीं रहा उससे ज्यादा लॉकडाउन से दिक्कतें हो रही हैं।सरसों की कटाई जैसे तैसे कर ली गई है। बरसात और ओलावृष्टि से काफी फसल बर्बाद हो गई।अब बारी जौ एवं गेहूं,चना जैसी मुख्य फसलों की है। कटाई-गहाई से लेकर मण्डी तक माल की पहुंच, तुलाई और बिकवाली को लेकर आशंकाएं बनी हैं। कारोबारी भी माल की खरीद और निस्तरण तंत्र को लेकर चिंतित हैं। माल की पैकिंग और लोडिंग अनलोडिंग के लिए श्रमिक नहीं हैं। सरकारी खरीद और खरीद केन्द्रों का तो कोई ताना बाना अभी कोराना के कहर के चलते नजर ही नहीं आ रहा। कटाई के लिए जरूरी कम्बाइन हार्वेस्टर भी इस बार पर्याप्त मात्रा में मिल पाएंगे या नहीं आशंका है। किसानों ने अपनी फसलों की कटाई खुद शुरू कर दी है। कई इलाकों से खबर है कि ट्रेक्टर-ट्राली में इकट्ठे मजदूरों को लेजाने पर पुलिस की पाबंदी काम कर रही है। मंडियों में कीमतें गिरने के चलते भण्डारण के लिए बोरी आदि का इंतजाम भी दिक्कतजदां हो रहा है।

सरसों की फसल की बात करें तो 4425 रुपए एमएसपी पर राजस्थान की मंडियों में सरसों 3500 रुपए प्रति कुंतल पर आ गई है। चने की बात करें तो इसका एमएसपी 4875 है लेकिन मंडियों में 3600 रुपए प्रति कुंतल तक बिक रहा है। बात यह नहीं है कि चीजें एमएपी से नीचे बिक रही हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। किसाना की जिंस मंडियों में आने के साथ ही कीमतें गिरती हैं लेकिन खुदरा बाजार और मंडियों के रेटों में अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहता लेकिन इस बार यह अंतर 30 से 40 फीसदी का है।

उत्तर प्रदेश सहित हर राज्य के कृषि उत्पादन आयुक्त मंडियों के खुलने और खरीद के काम को प्रभावित न होने के आदेश कर रहे हैं लेकिन असर साफ दिख रहा है। मंडियों में मजदूर नहीं है। बोरियां कैसे भरी जाएंगी और उनको गंतब्य तक कैसे पहुंचाया जाएगा।

जूट बैग का संकट

माल का भण्डारण जूट के बैगों में किया जाता है लेकिन जब काम काज ही ठप है तो कोलकता से आने वाले यह बैग समूचे देश में कैसे पहुंचेंगे। प्लास्टिक बैग की आपूर्ति भी हो पाएगी या नहीं कह पाना मुश्किल है।

आर्थिक मंदी का असर

मंदी की मार झेल रहे देश में किसानों पर इसका असर होना तय है। किसान भरोसे पर कारोबारियों को कच्चे पर्चे पर ही माल बेच देते हैं। धान की फसल में तो एक माह से पहले बेची गई फसल का भुगतान ज्यादातर मंडियों में मिलता ही नहीं। यह भुगतान निर्यातकों से आने पर ही किसानों को मिलता है। किसान अपने माल को बेच कर भी पैसा मिलने को लेकर  विश्वस्त नहीं हो पाते। कोविद-19 किसान और कृषि क्षेत्र पर व्यापक असर डालता दिख रहा है।

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