जानें आने वाले सप्ताह में बुलंदशहर का मौसम कैसा रहने वाला है - Meri Kheti

जानें आने वाले सप्ताह में बुलंदशहर का मौसम कैसा रहने वाला है

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार तीसरे और चौथे दिन ही बादल छाये रहेंगे और शेष दिनों में आसमान साफ रहेगा। लेकिन बारिश की कोई संभावना नहीं है। अधिकतम और न्यूनतम 25.0-26.0 और 8.0-10.0 डिग्री सेल्सियस के बीच है। सापेक्ष आद्रता अधिकतम और न्यूनतम सीमा 35-41 और 19-23% के बीच है। हवाओं की दिशा उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व और हवाओं की गति 3.9- 14.4 किमी प्रति घंटा रहने की संभावना है।

किसानों को सलाह दी जाती है कि विलंब से बोई जाने वाली गेंहू एवं चना की बुवाई तथा फसलों और सब्जियों की सिंचाई आवश्यकतानुसार करें। रबी के मौसम में बोई जाने वाली फसलें जैसे – गेंहू चना की बुवाई बीजोपचार करने के बाद ही करें। लंपी वायरस बचाव के उपाय :- लंपी रोग संभावित पशुओं को अलग रखें । मक्खी, मच्छर, जूं को मार दें। पशु की मृत्यु होने के बाद शव को खुला छोड़ दें। इस रोग से प्रभावित पशुओं में बकरी पॉक्स वैक्सीन का उपयोग चिकित्सक के निर्देश पर कर सकते हैं। प्रभावित पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टी विटामिन दवाई दी जा सकती हैं। साथ ही, संक्रमण की रोकथाम हेतु टीकाकरण अवश्य करायें।

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फसल संबंधित जानकारी

गेंहू

समय से बोई गई गेंहू की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद तथा ऊसर भूमि में बुवाई के 28-30 दिन बाद (ताजमहल अवस्था) पर ही सिंचाई अवश्य करें। गेंहू की फसल में यदि सकरी व चौड़ी पत्ती वाले, दोनों प्रकार के खरपतवार दिखाई दे तो इसके नियंत्रण हेतु सल्फोसल्फोरुन ७५% डब्लूपी ३३ ग्राम/हैक्टेयर या मेट्रीब्यूजिन 70%डब्लूपी 250 ग्राम/ हैक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। मौसम के दृष्टिगत सिंचित दशा में विलंभ से बोई जाने वाली गेंहू की संतुति प्रजाति मालवीय-234, यू.पी.-2338, के.-7903, के.-1902, के.-9533, एन.डी.-2643, एच.पी.-1744, एन.डू.-1014, यू.पी.-2425 , डी.बी.डू.-14, पी.बी.डू.-524, एन.डू.-510, एन.डू.-1076 आदि में से किसी एक प्रजाति की बुवाई का कार्य उचित नमी पर करें।

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सरसों

सरसों की फसल की बुवाई के 15-20 के अंदर निराई-गुड़ाई करने के साथ ही पौध से पौध की आपसी दूरी 10-15 सेंटीमीटर कर लें। आगामी सप्ताह में वर्षा की कोई संभावना नहीं है। अतः इस दशा में समय से बोई गई सरसों की फसल नत्रजन की शेष बची हुई मात्रा की टॉपड्रेसिंग पहली सिचाई (बुवाई के 30-35 दिन के बाद) उपयुक्त नमी पर करें। सरसों की फसल में आरा मक्खी और बालदार सुंडी कीट का प्रकोप दिखाई देने की संभावना है। अतः इसके रोकथाम हेतु इमामेन बजोएट 5 % एस जी 200 ग्राम / हैक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

चना

समय से बोई गई चने की फसल यदि 15-20 सेंटीमीटर की हो गई हो तो फसल की खुटाई करें। चने की फसल में कटुआ (कटवम) कीट का प्रकोप दिखाई देने की संभावना है। इसके रोकथाम हेतु क्लोरपाइरीफोस 50% ईसी + साइपरमेथ्रिन 5% ईसी 2.0 लीटर/ हैक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। चना की फसल में निराई – गुड़ाई का कार्य बुवाई से 30-35 दिन के बाद करें।

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