बासमती बाजार में गिरावट पर ब्रेक, अब किसानों को मिलेगा बेहतर भाव? ग्लोबल ट्रेडिंग से मिले संकेत

Published on: 19-May-2026
Updated on: 19-May-2026

बासमती बाजार में थमी गिरावट, बाजार में दिखी स्थिरता

देश के बासमती बाजार में पिछले कुछ समय से जारी नरमी पर अब ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडियों से मिले ताजा भाव बताते हैं कि दाम अब स्थिर होने लगे हैं। व्यापारियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गिरावट के बाद बाजार ने निचले स्तर पर मजबूत सपोर्ट बना लिया है। पिछले कुछ दिनों में कीमतों में भारी गिरावट देखने को नहीं मिली, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि बाजार धीरे-धीरे संतुलन की ओर बढ़ रहा है। 

घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिलने वाले संकेत भी अब कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि निर्यात गतिविधियां मजबूत बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में बासमती के भाव में हल्की तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल बाजार में सतर्कता जरूर बनी हुई है, लेकिन बड़े व्यापारी और मिलर्स अब दोबारा खरीदारी में रुचि दिखाने लगे हैं।

पंजाब-हरियाणा लाइन में प्रमुख किस्मों के भाव स्थिर

सोमवार को जारी बाजार रिपोर्ट के अनुसार पंजाब और हरियाणा की मंडियों में बासमती की प्रमुख किस्मों के भाव अपेक्षाकृत स्थिर रहे। 1121 स्टीम ग्रेड A+ का भाव लगभग 9650 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि 1121 स्टीम ग्रेड A करीब 9600 रुपये तक बोला गया। इसके अलावा 1121 गोल्डन सेला का भाव 9300 रुपये तक पहुंचा। 

दूसरी ओर 1718 स्टीम ग्रेड A+ करीब 9250 रुपये और 1509 स्टीम ग्रेड A+ लगभग 9000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकता नजर आया। कुछ किस्मों में हल्की मंदी जरूर देखने को मिली, लेकिन बाजार में घबराहट जैसी स्थिति नहीं बनी। व्यापारियों का कहना है कि इन स्तरों पर खरीदार सक्रिय हो रहे हैं और स्टॉक बनाने की प्रक्रिया फिर से शुरू हो रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार फिलहाल नीचे के स्तरों पर मजबूत समर्थन ले रहा है।

राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में भी स्थिर रहा कारोबार

राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में भी बासमती के दामों में स्थिरता देखने को मिली। राजस्थान लाइन में 1718 क्रीमी सेला का भाव करीब 8300 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया, जबकि 1509 क्रीमी सेला लगभग 8150 रुपये तक बोला गया। मध्य प्रदेश की मंडियों में PB1 गोल्डन सेला 8350 रुपये और PB1 रॉ का भाव करीब 8850 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। 

उत्तर प्रदेश लाइन में भी बाजार ने मजबूती के संकेत दिए, जहां 1718 स्टीम में 50 रुपये की तेजी के साथ 9000 रुपये का स्तर देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी छोटी जरूर है, लेकिन इससे बाजार का मनोबल मजबूत हुआ है। यदि आने वाले दिनों में खरीदारी बनी रहती है तो अन्य किस्मों में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

ग्लोबल ट्रेडिंग से मिल रहे सकारात्मक संकेत

भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती निर्यातक देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का घरेलू कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। हालिया निर्यात ऑफर के अनुसार 1121 रॉ बासमती का FOB भाव करीब 1150 डॉलर प्रति टन बताया गया है, जबकि 1121 स्टीम करीब 1130 डॉलर और 1718 रॉ लगभग 1110 डॉलर प्रति टन के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि वैश्विक बाजार में भारतीय बासमती की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। 

मध्य पूर्व, यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों में भारतीय चावल की अच्छी मांग देखने को मिल रही है। खासकर गर्मियों और त्योहारों के सीजन से पहले कई देश स्टॉक भरने में जुटे हैं। यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर बना रहता है तो भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त फायदा मिलेगा, जिससे घरेलू खरीद और तेज हो सकती है।

किन कारणों से आ सकती है बासमती में तेजी

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस समय कई ऐसे फैक्टर मौजूद हैं जो बासमती बाजार को तेजी की ओर ले जा सकते हैं। सबसे बड़ा कारण मंडियों में सीमित स्टॉक का होना है। किसानों के पास अब बहुत कम माल बचा है, जिससे सप्लाई घटती जा रही है। दूसरा बड़ा कारण निर्यात मांग का स्थिर बने रहना है। पुराने ऑर्डर पूरे किए जा रहे हैं और नए ऑर्डर की पूछताछ भी जारी है।

तीसरा कारण यह है कि हालिया गिरावट के बाद व्यापारी और मिलर्स अब सस्ते स्तरों पर खरीदारी कर रहे हैं। एग्री वॉच की ताजा मार्केट रिपोर्ट में भी कहा गया है कि सप्लाई टाइटनेस और निर्यात में सुधार के कारण आने वाले समय में बासमती बाजार मजबूत रह सकता है। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो प्रमुख किस्मों में सीमित लेकिन स्थिर तेजी देखने को मिल सकती है।

बाजार पर मंदी का खतरा भी बना हुआ

हालांकि बाजार में तेजी की उम्मीद दिखाई दे रही है, लेकिन कुछ जोखिम ऐसे भी हैं जो कीमतों पर दबाव बना सकते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में शिपमेंट धीमे पड़ते हैं या बड़े आयातक देश खरीदारी टालते हैं, तो निर्यात मांग कमजोर हो सकती है। इसके अलावा डॉलर में तेज उतार-चढ़ाव भी बाजार के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। 

यदि रुपया अचानक मजबूत होता है तो भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। नई फसल सीजन के करीब आने के कारण भी व्यापारी सतर्क रुख अपना सकते हैं। कई बड़े कारोबारी फिलहाल सीमित खरीदारी कर रहे हैं ताकि बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर नुकसान से बचा जा सके। इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

किसानों और व्यापारियों के लिए क्या है सही रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को इस समय पूरी फसल एक साथ बेचने के बजाय चरणबद्ध बिक्री की रणनीति अपनानी चाहिए। यदि किसी किसान के पास अच्छी गुणवत्ता का बासमती स्टॉक मौजूद है तो वह हल्की तेजी का इंतजार कर सकता है। बाजार में फिलहाल घबराकर बिक्री करने की सलाह नहीं दी जा रही है।

दूसरी ओर व्यापारियों और मिलर्स को निर्यात गतिविधियों और बंदरगाहों पर हो रही हलचल पर नजर बनाए रखनी चाहिए। अगले 10 से 15 दिन बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि विदेशी ऑर्डर लगातार बढ़ते हैं तो घरेलू खरीदारी भी मजबूत हो सकती है। इसलिए कारोबारियों को बाजार की चाल समझकर ही बड़े फैसले लेने चाहिए।

आने वाले दिनों में कैसा रह सकता है बासमती बाजार

फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि बासमती बाजार “स्थिर से मजबूत” रुख की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। यदि घरेलू मांग और निर्यात दोनों मजबूत बने रहते हैं तो 1121, 1718 और 1509 जैसी प्रमुख किस्मों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। बाजार में फिलहाल बड़ी तेजी की संभावना तो नहीं दिख रही, लेकिन लगातार गिरावट का दौर थमता जरूर नजर आ रहा है। 

व्यापारियों का मानना है, कि यदि ग्लोबल ट्रेडिंग से समर्थन मिलता रहा तो जल्द ही बाजार में नई तेजी की शुरुआत हो सकती है। कुल मिलाकर बासमती बाजार इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां घरेलू खरीद, निर्यात मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति मिलकर आगे की दिशा तय करेंगी।

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