मई के अंतिम दिनों में उत्तर भारत में गर्मी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा दिखाई देने लगा है और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। कई शहरों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि कुछ इलाकों में यह 47 डिग्री तक जाने की आशंका जताई गई है। लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव की स्थिति के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को बेहद संवेदनशील बताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिक नरेश कुमार ने जानकारी दी है कि उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के बड़े हिस्से इस समय लगातार हीटवेव की चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में गर्म हवाओं का असर लगातार बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, थार रेगिस्तान से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं तापमान को और अधिक बढ़ा रही हैं। मानसून अभी देश के उत्तरी हिस्सों से काफी दूर है, इसलिए वातावरण में नमी नहीं बढ़ पा रही है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। आमतौर पर रात में कुछ राहत मिलती है, लेकिन इस बार कई इलाकों में रात के समय भी गर्मी बनी हुई है, जिससे लोगों की परेशानी दोगुनी हो गई है।
दिल्ली-एनसीआर में भीषण गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। दोपहर के समय लू जैसी स्थिति बने रहने की संभावना है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे इलाकों में लोग उमस और गर्म हवाओं दोनों से परेशान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी का असर बिजली और पानी की मांग पर भी देखने को मिल सकता है। एयर कंडीशनर और कूलर के अधिक उपयोग से बिजली खपत तेजी से बढ़ रही है।
मौसम विभाग ने दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले तीन दिनों का रेड अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। रेड अलर्ट का मतलब है कि गर्मी लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, झांसी और वाराणसी जैसे शहरों में तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। वहीं मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भोपाल, सागर और छतरपुर जैसे क्षेत्रों में भी गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इस बार गर्मी का असर केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है। Naresh Kumar के अनुसार जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। आमतौर पर इन इलाकों में मई के महीने में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है, लेकिन इस बार वहां भी हीटवेव जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान का असर पर्यटन और स्थानीय जीवन पर भी पड़ रहा है। कई स्थानों पर लोगों को दिन के समय गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो सामान्य परिस्थितियों से अलग माना जा रहा है।
पंजाब और हरियाणा में भी गर्म हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने दोनों राज्यों के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चंडीगढ़, हिसार, करनाल, अमृतसर और लुधियाना जैसे शहरों में दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज धूप के कारण फसलों पर भी असर पड़ सकता है। अधिक तापमान से मिट्टी की नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय उत्तर-पश्चिम भारत में शुष्क और गर्म हवाओं का दबाव बना हुआ है। राजस्थान के थार रेगिस्तान से आने वाली हवाएं तापमान को तेजी से बढ़ा रही हैं। इसके अलावा मानसून की देरी और वातावरण में नमी की कमी भी हीटवेव को और अधिक गंभीर बना रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां मई-जून में सामान्य गर्मी पड़ती थी, वहीं अब हीटवेव की घटनाएं अधिक तीव्र और लंबी होती जा रही हैं। लगातार बढ़ते तापमान का असर मानव स्वास्थ्य, कृषि और जल संसाधनों पर भी पड़ रहा है।
भारतीय मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर ढककर निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। हल्के रंग और ढीले कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने को कहा है, क्योंकि उन्हें हीटवेव से ज्यादा खतरा होता है। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, उल्टी, तेज सिरदर्द या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले सात दिनों तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में गर्मी का असर बना रह सकता है। फिलहाल किसी बड़े पश्चिमी विक्षोभ या बारिश की संभावना नहीं दिखाई दे रही है, जिससे तापमान में तत्काल गिरावट की उम्मीद कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अगले कुछ दिनों तक अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। गर्मी से बचाव के उपाय अपनाकर ही इस भीषण मौसम का सामना किया जा सकता है।
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