पत्थर ही नहीं, किसानों की दुर्दशा भी चाट जाएगी इसकी खेती

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आज हम आपको एक ऐसी औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी खेती अगर किसान करें तो उनके जीवन की भी बहुत सारी समस्याओं, ख़ास कर उनकी बिगड़ी हुई आर्थिक स्थिति को चाट चाट कर ख़त्म कर देगा। जी हां, हम बात कर रहे हैं पत्थरचट्टा की। पत्थरचट्टा (पथरचटा या पथरचट्टा (वानस्पतिक नाम – Kalanchoe pinnata या Bryophyllum calycinum या Bryophyllum pinnatum; Pattharchatta)) एक ऐसी औषधि है, जो न सिर्फ मानव स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है, यह इतना मुनाफ़ा दे कर जाती है जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है। इस औषधि की खेती से किसान साल का लाखों रूपये कमा सकते हैं।

पत्थरचट्टा को हम किसी भी मौसम में इस्तेमाल कर सकते हैं, कोरोना काल में जैसे-जैसे आयुर्वेद के महत्व से लोग परिचित हुए, वैसे वैसे पत्थरचट्टा की मांग भी बढ़ने लगी है। ऐसे में किसान इसकी खेती कर के बेहतर मुनाफ़ा कमा सकते हैं।

पत्थरचट्टा की सबसे ख़ास बात यह है, कि इसकी खेती के लिए किसानों को बीज खरीदने की भी आवश्यकता नहीं है। इसकी खेती के लिए बस इसके पत्ते का इस्तेमाल कर के उगाया जा सकता है। यही कारण है कि इसकी खेती बहुत महँगा सौदा भी नहीं रह जाती, इस औषधि पौधे में उगने वाले फूल औषधीय गुण से भरपूर होते हैं।

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पत्थरचट्टा की खेती के लिए नम मिट्टी चाहिए, किसान 60 प्रतिशत दोमट मिट्टी, 20 प्रतिशत कोको पीट और 20 प्रतिशत रेत के साथ मिट्टी तैयार कर लें। फिर इस मिट्टी में पत्थरचट्टा लगा सकते हैं। इसकी एक ख़ास बात यह है कि एक पूरी तरह से विकसित पत्थरचट्टा के पत्ते खुद ही खेत में गिरा दिये जाते हैं, जिससे कि आगे वही पत्ते फिर से एक नया पौधा बन जाते हैं, यानी आम के आम, गुठलियों के दाम।

पत्थरचट्टा को रोज सूर्य प्रकाश की जरूरत होती है। हालांकि, 5 घंटे की धुप भी इसके लिए काफी है। हां, इन्हें अत्याधिक ठण्ड से बचाने की जरूरत होती है, एक्सपर्ट्स बताते हैं कि पत्थरचट्टा को अगर फिल्टर पानी मिले तो इसका और अधिक फ़ायदा पौधे के विकास में मिलता है। एक्सपर्ट्स पत्थरचट्टा के लिए हर दो महीने के बाद आधा चम्मच बोन मील देने की भी बात कहते हैं। पत्थरचट्टा में अगर फफूंद लग जाए तो पोटेशियम बाइकार्बोनेट का छिड़काव करना चाहिए।

रामबाण पत्थरचट्टा

पत्थरचट्टा के पत्तों का स्वाद खाने में खट्टा होता है। यह इंसान के मूत्र विकार, सर दर्द, उच्च रक्तचाप आदि जैसी बीमारियों में कारगर माना जाता है। माना जाता है कि पत्थरचट्टा के इस्तेमाल से (डॉक्टर की देखरेख में) किडनी स्टोन को भी बाहर निकालने में सहायता मिलती है।

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