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गेहूं किसान को लूटने की तैयारी

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गेहूं किसान लुटने लगा है। मंडियों में कारोबारियों ने पंचायत कर बंदी कर दी है। माल के लदान और ढुलान को लेकर शासन प्रशासन का अमला ठोस इंतजाम नहीं कर पाया है। हर मंडी में फ्लोर मिलों के लिए गेहूं की खपत बेहद कम है। कारोबारी बाकी गेहूं को भेजें तो कहां भेजें। मंडियों के खोलने-बंद करने का भी समय निर्धारित है। निर्धारित समय में माल की बोली बुलने, बिकने, बोरीबंद होने और लदने तथा लदने के बाद गंतब्य तक पहुंचने की चेन को कई स्तरों पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आटा थोक में 27 से 30 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है वहीं गेहूं के 1800 रुपए प्रति कुंतल में भी लेबाल नहीं हैं।

मौसम का मिजाज तल्ख होने के साथ ही गहूं की कटार्ई तेजी से शुरू हुई है। इसके साथ ही गेंहूं को बेचने की दिक्कत पैदा हो गई है। ज्यादातर मंडियां बंद हैं। सरकारी खरीदकेन्द्रों का ज्यादातर राज्यों में अता पता नहीं है। किसान की जोत छोटी होने के साथ ही घरों का आकार भी सिकुड़ा है। राजस्थान जैसे राज्यों में क्षेत्रफल ज्यादा होन के कारण भले ही स्थान का संकट नहो लेकिन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों के पास गेहूूं के भण्डारण की व्यवस्था नहीं है। अब किसान अपनी फसल का करे तो क्या करे। किसान आढ़तियों से संपर्क कर जहां गहूं भेजना संभव है वहां भेजने का प्रयास कर रहा है। ऐेेसे में किसानों को अपने गेहूं का एमएसपी भी नहीं मिल पा रहा है।

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