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कृषि कानूनों के विरोध को थामने की तैयारी

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कृषि कानूनों के विरोध की आग अभी थमी नहीं है कि किसान महंगे डीजल की कसक से कराह उठे हैं। थोक मंडियों में सब्जियों की कीमत ज्यादा अच्छी नहीं लेकिन सब्जी उगाने में लगने वाले पानी और उस पर खर्च होने वाले डीजल की कीमत ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। इस दर्द को कम करने के लिए राज्यों ने आगामी फसली सीजन में किसानों को कुछ राहत है देने की तैयारी की है। कोशिश यह है कि किसान राज्य सरकारों के खिलाफ लामबंद ना हो जाएं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक आगामी रबी सीजन के लिए गेहूं खरीद के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का विज्ञापन जारी कर दिया है देखना यह है कि किसानों का कितना गेहूं एमएसपी पर यहां खरीदा जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में यहां कभी बैगों का संकट, कभी माल ढुलाई वाले वाहनों का संकट तो कभी गेहूं को कॉल करने वाले श्रमिकों का संकट गेहूं खरीद में आड़े आते रहा।

इधर पंजाब सरकार में कामयाब किसान खुशहाल पंजाब योजना के तहत 3780 करोड़ रुपए की व्यवस्था की है। इसके माध्यम से किसानों की आमदनी मैं सुधार लाने के प्रयास किए जाएंगे।

इसके अलावा पंजाब सरकार 2021-22 में फसल ऋण माफी योजना के तहत अगले चरण में 1,13,000 किसानों का 1,186 करोड़ रुपये का ऋण और भूमिहीन किसानों का 526 करोड़ रुपये का ऋण माफ करेगी।

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मध्य प्रदेश राज्य में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार के प्रभाव के चलते किसान आंदोलन भले ही बहुत ज्यादा गति नहीं पकड़ पाया लेकिन सरकार ने किसानों की मदद में अपने हाथ और बढ़ाएं हैं। सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों को सालाना ₹4000 अतिरिक्त देने के लिए 32 100 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

इधर राजस्थान सरकार अगले बजट से अलग से कृषि बजट लाने वाली है। साथ ही किसान ऋण माफी योजना के लिए 16,000 करोड़ रुपये का भारी भरकम आवंटन किया है। इस योजना की शुरुआत सरकार बनने के बाद हुई थी और आगामी वर्ष में अतिरिक्त 3,00,000 किसानों को इसके दायरे में लाने की योजना है।

छत्तीसगढ़ में किसान आंदोलन बिल्कुल गति नहीं पकड़ पाया। यहां गोधन न्याय योजना के माध्यम से किसानों का गोबर खरीद कर सरकार ने उनकी माली हालत में काफी सुधार किया।यह योजना अन्य राज्यों में भी पॉपुलर हो रही है। इसके चलते सरकार ने इसक बजट को और बढ़ाया है और किसानों में और ख्याति अर्जित की है।

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