खेती के लिए बीजों का संकट

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सरकार ने कृषि और कृषि से जुड़ी दुकानों को लॉकडाउन में भी पाबंदी से मुक्त रखा लेकिन माल की आवाजाही प्रभावित होने से सब्जियों के बीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।लौकी तोरई टिंडा खीरा काशीफल जैसी सब्जियों के बीच बाजार से गायब है इन हालात में हाइब्रिड बीजों की कीमत 1:30 से दोगुनी हो गई है। किसान परेशान है कि ऐसे में करें तो क्या करें।

मथुरा जनपद के गांव निवासी किसान संजय मित्तल की माने तो उन्हें बीएनआर कंपनी की तोरई का हाइब्रिड बीज चाहिए जो बाजार में ₹5000 किलो मैं भी नहीं मिल रहा है।लॉकडाउन से पूर्व यह बीज ₹3000 से ₹3200 किलो तक मिल रहा था। एग्रो कंपनी की लौकी के बीज भी बाजार से गायब है। यही नहीं अन्य बीज उत्पादक स्तरीय कंपनियों के बीच भी बाजार से गायब हो चुके हैं।माल की आवाजाही प्रभावित होने के चलते सब्जियों के बीज नहीं मिल पा रहे हैं।इसका प्रभाव दो महाभारत सब्जियों की मंडियों में आवक कम होने के रूप में दिख सकती है।वर्तमान में भले ही सब्जियां मारी मारी फिर रही हों लेकिन बीज न मिलने से हर राज्य में सब्जियों की बिजाई प्रभावित होनी तय है। वर्तमान में सब्जियों की बेकद्री की वजह रेड जोन में बेहद कम सब्जियां पहुंचना,मंडियों का बेहद कम खुलना,फल और सब्जियों से कोरौना फैलने का भय के चलते सब्जियों का कम बिकना माना जा रहा है।छोटे शहरों में बेहद ताजी और हेल्थी सब्जी ₹10 से ₹20 किलो चल रही हैं वही महानगरों में इनकी पहुंच ना होने के कारण ₹50 से ₹100 किलो तक सब्जियों के दाम चल रहे हैं।मथुरा के बीज विक्रेता प्रांतीय बीज भंडार के प्रोपराइटर की माने तो लॉकडाउन के दौरान बीज ही नहीं पा रहे हैं।पुराना स्टॉक सभी दुकानदारों के पास निल हो चुका है। वह कहते हैं कि जब तक लॉक डाउन की स्थिति सामान्य नहीं होगी कंपनियों में 20 की पैकिंग और मार्केटिंग का कार्य भी प्रभावित ही रहेगा। केवल सरकार की यह कह देने से कृषि और कृषि से जुड़े हुए कारोबार प्रभावित नहीं होंगे कार्यों को प्रभावित होने से नहीं रोका जा सकता।

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