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आज का किसान

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आज किसान की बात करने को बहुत से प्लेटफार्म हैं जहाँ किसान और उनकी परेशानी,फायदे आदि के बारे में परिचर्चा की जाती है.आप सभी लोग यूट्यूब, मोबाइल ऐप, वेबसाइट, या फेसबुक से जो पढ़ते हैं वही हम सत्य समझते हैं जबकि ऐसा नहीं है. हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है इसके हर राज्य के लिय अलग समस्या हो सकती है. हर राज्य की अलग फसल होती है हर राज्य की भौगोलिक जरूरतें ,समस्याएं होती है.आवश्यकता इसको समझने की है की हम अपने राज्य के हिसाब से ही फसल का चुनाव करें.

आज हम सब स्मार्टफ़ोन प्रयोग करते हैं और उसका सही और गलत प्रयोग करना अपने ऊपर है. कई ऐप आपके फ़ोन में ऐसे होते हैं जो आपको फसल की सही और सटीक जानकारी दे सकते हैं और कई ऐप ऐसे भी है जो आपको परेशानी में डाल सकते हैं.तो जरूरत है इसके सही प्रयोग की जिससे की हमें ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का फायदा हो.

युवा किसान और उसकी सोच:

आज का युवा किसान लैपटॉप और स्मार्टफोन चलाता है  कल तक जो खबरें हमें अपने पड़ोस वाले गांव का पता नहीं होता था आज हम ये भी सेकंडों में पता कर लेते है की ट्रम्प और बाइडेन में कौन आगे है और बाइडेन को किस राज्य में जीत मिली है. हमें अपनी एनर्जी को सकारात्मक ज्ञान के लिए प्रयोग करना चाहिए न की नकारात्मक. इंटरनेट दोनों तरह की बातों से भरा पड़ा है और सबके अपने अपने दावे हैं.

सच में आज का युवा अपनी दिमागी ताकत का प्रयोग सकारात्मक सोच की तरफ लगाए तो वो अपने साथ अपने गांव की भी तस्वीर बदल सकता है.

किसान के लिए शहरी लोगों की सोच:

आजकल शहर में रहने वाले कुछ लोग किसान के लिए जो सोच रखते हैं वो अलग ही होती है उनके मुताबिक किसान के पास बहुत जमीन होती है वो बहुत पैसे वाले होते हैं अगर कोई किसान का बेटा किसी कंपनी में काम कर रहा होता है तो उसके साथ काम करने वाले शहरी युवाओं की सोच होती है की उसे नौकरी करने की क्या जरूरत है उसके पास इतनी जमीन है. लेकिन क्या ऐसा है की किसान के बेटे को नौकरी की जरूरत नहीं है? जिनके पास खेती की जमीन नहीं होती इनको जमीनी हकीकत पता नहीं होती. एक किसान कभी नहीं चाहेगा की उसका बेटा किसान बने हाँ लेकिन एक बिजनेसमैन जरूर चाहेगा की उसका बेटा बिजनेसमैन बने.

अगर किसी किसान के पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है तो सामान्य खेती में से वो अपनी रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं कर सकता है. किसानों को फसल के अलावा पशुपालन, फलदार पेड़ की खेती, औषधीय पेड़ों की खेती भी करनी चाहिए.

किसान और किसान नेता:

जब कोई किसान मेला या किसान गोष्ठी का आयोजन किसी शहर में होता है तो वहां किसान नहीं किसान नेता पहुंचते हैं जिनका सीधा उद्देश्य अधिकारीयों से मेलजोल बढ़ाना होता है जिससे की कोई सब्सिडी आए तो सबसे पहले उनका नंबर आ सके और इसका लाभ वो ले सकें.किसान नेता भी किसान परिवार से होते है लेकिन वो भी सिर्फ अपने लिए ही काम करते है और करें भी क्यों न क्योंकि वो अपना समय जिला और ब्लॉक के चक्कर लगाने में खर्च करते हैं.

किसान को इतनी फुरसत नहीं होती की वो किसी शहर के मेला या गोष्ठी में सम्मलित हो सके.अगर हमें किसानों के करीब पहुंचना है तो हमें ये मेले ब्लॉक पर करने चाहिए और किसानों को जिला स्तर के अधिकारीयों से संपर्क करना चाहिए. जिससे की किसान की पहुंच उन अधिकारीयों तक हो सके.आप जब पंजाब के किसानों के रहन सहन को देखते हो तो अपनी सोच बना लेते हो की सारे किसान ऐसे ही होंगें. जबकि वो इसी तरह से है जैसे कोई चंद लोगों का सर्वे किसी राज्य या पूरे देश को रिप्रेजेंट नहीं कर सकता. किसानों को समझने के लिए आपको अलग अलग राज्य और एरिया के हिसाब से आंकलन करना होगा.

हमारे देश में किसानों के लिए कोई भी कानून राजधानी के AC कमरों में बैठ के बनाये जाते है. जिनका न फसल उगाने का कोई अनुभव होता है न उनको किसानों की असल समस्याओं से कोई लेना देना होता है.अगर हमारी सरकार को किसानों की इतनी ही चिंता है तो जैसे MRP होती है ऐसे ही किसानों को MSP होती है. सरकार को कानून बनाना चाहिए की कोई भी किसान की फसल MSP से नीचे की कीमत पर नहीं ख़रीदे जायेंगें.और जो भी कृषि यन्त्र पर आप सब्सिडी दे रहे हो वो ब्लॉक स्तर पर मेला लगा के दिए जाएँ. जिससे की इसमें पारदर्शिता रहेगी और किसानों का विश्वास भी सरकर के प्रति बढ़ेगा.

किसान के बारे में आपकी क्या राय है कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं.

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