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सर्पगंधा की खेती कब और कैसे करें

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सर्पगंधा उच्चरक्तचाप के लिए बेहद उपोगी दवा है। इसका पौधा सदैव हरा रहता है। इसके अलावा इसकी लंबाई तकरीबन एक मीटर तक हो जाती है। इसकी जड़ गोलाकार होती हैं। दवाओं के लिए इसके पत्ते व जड़ दोनों का उपोग होता है। बुखार, घाव अनिद्रा सहित कई रोगों में इसे औषधि के रूप मे लिया जाता है।

मृदा व जलवायु

इसकी खेती अब कारोबारी नजरिए से होने लगी है लेकिन किसी भी औषधीय पादप को उगाने के लिए पहली शर्त यह है कि इसकी खेती में किसी भी रासायनक उर्वरक का प्रयोग नहीं होता। सड़ी गोबर की खाद या जीवांश कार्बन वाली खाद का प्रयोग करना चाहिए। इसकी खेती के लिए अम्लीय मिट्टी अच्छी रहती है। जल निकासी वाले इलाके में ही इसकी खेती करनी चाहिए।

जड़ों का प्रत्यारोपण

गर्मी के समय में जड़ों के टकड़ों को गोबर, मिट्टी एवं बुरादे का मिश्रण बनाकर थैलियों में भरकर उनमें गाढ़ देते हैं। बरसात के दिनों में इन टुकड़ों से कल्लों का विकास तेज हो जाता है। तैयार पौधों को 30 सेंटीमीटर की दूरी पर एवं लाइन 45 सेंटीमीटर दूर रखनी चाहिए।

इसके पौधे तैयार करने का दूसरा तरीका तने की शाखाओं के 15 से 20 सेंटीमीटर लम्बे टुकड़ों को नमीवाली जमीन में गाढ़ देते हैं। पौधे तैयार होने के बाद उन्हें रोपा जाता है।

बीजारोपण द्वारा

सर्पगंधा के पौधे बीजों द्वारा आसानी से तैयार नहीं होते। बीज का जमाव पांच से 30 प्रतिशत तक ही होता है। नए बीज का जमाव प्रतिशत 60 तक हो जाता है। बीज को बोने से पहले पानी में डालना चाहिए। पानी में हल्का बीज तैर जाता है। भारी एवं अंकुरित होने योग्य बीज पानी की तली में जम जाता है। एक हैक्टेयर क्षेत्र के लिए 6 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है।

नर्सरी तैयार करना

बीजों को अप्रैल माह में जमीन पर बैड बनाकर लाइन में समान दूरी पर बोया जाता है। बैड को तैयार करने के लिए उसमें सड़ी गोबर की खाद, बालू आदि मिला लेनी चाहिए। बीजों को लाइन में बोने के बाद अंकुरण होने और उसके बाद भी हल्का पानी लगाते रहना चाहिए। अंकुरण 15 से 40 दिन तक होता रहता है। इस प्रक्रिया से जुलाई के मध्य तक पौधे रोपने के लिए तैयार हो जाते हैं। तैयार पौधे 45 सेंटीमीटर दूरी पर बनी लाइनों में 30 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपने चाहिए। सिंचाई शर्दियों के दिनों में एक माह के अंतराल पर एवं गर्मियों में 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए।

पैदावार

सर्पगंधा की 18 महीने पुरानी फसल को सबसे अच्छा माना जाता है। 15 से 25 कुंतल तक फसल प्राप्त होती है। सूखी कंद दवा के लिए उपयोग में लाई जाती हैं।

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