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Meri Kheti https://www.merikheti.com/ Kisan ka saathi Fri, 23 Feb 2024 12:30:00 GMT hi hourly 1 https://merikheti.com/favicon.jpg Meri Kheti https://www.merikheti.com/ 140 140 पीएम किसान सम्मान निधि की 16 वीं किस्त इस तारीख को किसानों के खाते में पहुंचेगी https://www.merikheti.com/blog/pm-kisan-samman-nidhi-16-installment-will-reach-the-accounts-of-farmers-on-28-february Fri, 23 Feb 2024 12:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/pm-kisan-samman-nidhi-16-installment-will-reach-the-accounts-of-farmers-on-28-february

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से संबंधित लाखों कृषकों के लिए खुशी का समाचार है। पीएम किसान योजना की 16 वीं किस्त की तारीख जारी हो गई है। 

किसानों को इसी माह योजना की 16वीं किस्त जारी कर दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस माह के आखिर में लाखों कृषकों के खाते में पीएम किसान योजना के 2000 रुपये हस्तांतरित करेंगे। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर आगामी किस्त की तारीख जारी हो गई है। 

आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 28 फरवरी, 2024 को किसानों के खाते में पीएम किसान योजना का पैसा जारी कर दिया जाएगा।

जानिए किन किसानों को नहीं मिलेगी योजना की धनराशि 

ऐसा नहीं है, कि समस्त किसानों के खाते में योजना की किस्त की धनराशि आएगी। धनराशि केवल उन्हीं कृषकों के खाते में आएगी, जिन्होंने ई-केवाईसी (PM Kisan e-KYC) करवाई होगी। 

दरअसल, पीएम किसान योजना के लिए ई-केवाईसी करवाना बेहद अनिवार्य है। यदि कोई किसान ई-केवाईसी नहीं करवाता है, तो उसे योजना का फायदा नहीं मिलेगा। ऐसे में इस बार जिन किसानों ने ई-केवाईसी नहीं करवाई होगी, उन्हें 16 वीं किस्त की धनराशि हस्तांतरित नहीं की जाएगी। 

बतादें, कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया काफी आसान होती है। सरकार ने प्रोसेस की प्रक्रिया कृषकों को ध्यान में रखते हुए बनाई है, ताकि किसान सुगमता से अपनी ई-केवाईसी कर सकें।

योजना का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी कैसे करें ?

किसान बड़ी सुगमता से पीएम किसान पोर्टल पर जाकर ओटीपी आधारित ई-केवाईसी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कृषकों को बायोमेट्रिक आधारित ई-केवाईसी का विकल्प भी दिया गया है। 

इसके लिए किसान नजदीकी सीएससी केंद्र पर जाकर अपनी ई-केवाईसी करवा सकते हैं। अगर आप भी सरकार की इस योजना का फायदा प्राप्त करना चाहते हैं, तो आज ही पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट जाकर पंजीकरण कराऐं।

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केंद्र सरकार 6 हजार रुपये की आर्थ‍िक सहायता प्रदान करती है 

बतादें, कि केंद्र सरकार ने क‍िसानों को आर्थ‍िक सहायता देने के ल‍िए पीएम क‍िसान सम्‍मान न‍िध‍ि योजना जारी की थी। इस योजना के अंतर्गत क‍िसानों को साल भर में 6 हजार रुपये द‍िए जाते हैं। 

यह धनराशि 2-2 हजार रुपये की क‍िस्त में प्रदान की जाती है, जो हर चार महीने पर सीधे क‍िसानों के खाते में भेजी जाती है। 

समस्या होने पर पीएम किसान हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें 

पीएम क‍िसान सम्‍मान न‍िध‍ि योजना से संबंधित किसी भी तरह की समस्या होने पर किसान हेल्पलाइन नंबर- 155261 या 1800115526 (टोल फ्री) या फिर 011-23381092 के जरिए संपर्क कर सकते हैं। 

इसके अतिरिक्त ईमेल कर pmkisan-ict@gov.in पर संपर्क कर सकते हैं।

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मंडियों में इस बार गेहूं का MSP से ज्यादा भाव मिलने की संभावना https://www.merikheti.com/blog/gehun-ka-mandi bhav-wheat-is-likely-to-get-more-than-msp Fri, 23 Feb 2024 06:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/gehun-ka-mandi bhav-wheat-is-likely-to-get-more-than-msp

गेहूं की कीमतों में वृद्धि निरंतर होती जा रही है। गेहूं की खेती करने वाले कृषकों के लिए 2023 की अपेक्षा 2024 शानदार मुनाफा दिलाने वाला वर्ष सिद्ध हो सकता है। 

हम यह बात इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि मंडियों में गेहूं की नई फसल की आवक जल्द शुरू होने वाली है और इसी बीच गेहूं की कीमतों में निरंतर उछाल देखने को मिल रहा है। 

भारत की अधिकांश मंडियों में गेहूं का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य मतलब कि MSP से भी अधिक चल रहा है। कीमतों में आए उछाल को देख किसान भी काफी खुश दिखाई दे रहे हैं। 

किसानों को आशा है, कि कीमतों में ये वृद्धि निरंतर जारी रहेगी। गेंहू किसानों को मार्च-अप्रैल में आने वाली नई फसल का काफी अच्छा भाव मिलेगा।

कीमतों में किसी तरह की कोई गिरावट की आशंका नहीं है 

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि कृषि विशेषज्ञों के अनुसार भी गेहूं की कीमतों में तेजी का ये आलम आगे भी ज्यों का त्यों बने रहने की संभावना है। जानकारों ने कहा कि मार्च-अप्रैल में गेहूं की नई फसल आते ही पहले तो भाव तेजी से चढ़ेगा। 

परंतु, उसके बाद हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जहां गेहूं की घरेलू मांग काफी अच्छी है, तो वहीं निर्यात बाजार में भी भारत के गेहूं की बड़े पैमाने पर मांग है। 

इस वजह से गेंहू की कीमतों में गिरावट आने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।

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भारत की विभिन्न मंडियों में गेंहू का रेट 

अगर गेहूं के भाव की बात करें तो फिलहाल भिन्न-भिन्न राज्यों में गेहूं के भाव अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं। हालांकि, देश की अधिकांश मंडियों में गेहूं का भाव MSP से भी ऊपर चल रहा है। 

वर्तमान में केंद्र सरकार गेहूं पर 2275 रुपये की एमएसपी प्रदान कर रही है। वहीं, गेहूं का औसतन भाव 2,275 रुपये प्रति क्विंटल के तकरीबन बना हुआ है। केंद्रीय कृष‍ि व क‍िसान कल्याण मंत्रालय के एगमार्कनेट पोर्टल के अनुसार, बुधवार (21 फरवरी) को कर्नाटक की मंडियों में गेहूं को सबसे शानदार भाव मिला।

कर्नाटक की बीदर और शिमोगा मंडी में गेहू 4500 रुपये/क्विंटल के भाव में बिका है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश की जोबट मंडी में गेहूं को 4400 रुपये/क्विंटल का भाव मिला है। 

जबकि, आष्टा मंडी दाम 3881 रुपए/क्विंटल रहा है। इसके अतिरिक्त गुजरात की जेतपुर मंडी में गेहूं 3150 रुपये/क्विंटल और कर्नाटक की मैसूर मंडी में 3450 रुपये/क्विंटल के भाव पर बिका।

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गेंहू की बंपर आवक होने की संभावना 

भारत में इस बार गेहूं की बंपर पैदावार होने की भी संभावना है। केंद्र सरकार भी पैदावार में बढ़ोतरी होने की बात कह चुकी है। साथ ही, बाजार जानकारों का कहना है, कि गेहूं की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है।

हालांकि, इसमें कुछ कमी अथवा वृद्धि भी संभावित है। परंतु, यह ज्यादा होने की संभावना नहीं है। गेहूं के दाम तेजी से बढ़ते रहेंगे, जब तक मंडियों में नई फसल न आ जाए। 

नई फसल के आते ही दामों में कमी की संभावना है। हालांकि, गेंहू की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा ही रहेंगी। 

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इस राज्य में पॉलीहाउस और शेड नेट पर 50% प्रतिशत सब्सिड़ी दी जा रही है https://www.merikheti.com/blog/bihar-government-provide-50-percent-subsidy-on-polyhouse-and-shednet Fri, 23 Feb 2024 00:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/bihar-government-provide-50-percent-subsidy-on-polyhouse-and-shednet

केंद्र और राज्य सरकार अपने अपने स्तर से कृषकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विभिन्न प्रयास करती रहती हैं। खेती किसानी के विकास और किसानों की आमदनी को दोगुना करने के उद्देश्य से सरकार आए दिन नई-नई योजनाओं को जारी करती रहती है। 

अब इसी कड़ी में बिहार सरकार किसानों के लिए एक और नई योजना लेकर आई है। दरअसल, सरकार ने संरक्षित खेती द्वारा बागवानी विकास योजना के अंतर्गत पॉलीहाउस और शेड नेट की व्यवस्था  उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

सरकार पॉलीहाउस और शेड नेट के माध्यम से खेती करने पर किसानों को अच्छा खासा अनुदान मुहैय्या करा रही है। सरकार के इस निर्णय से किसानों की आमदनी के साथ-साथ उत्पादन में भी इजाफा होगा। 

योजना के अंतर्गत कितना अनुदान दिया जाएगा ?

योजना की जानकारी बिहार कृषि विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है। कृषि विभाग की पोस्ट के अनुसार, सरकार संरक्षित खेती द्वारा वार्षिक बागवानी विकास योजना के अंतर्गत पॉलीहाउस और शेड नेट की मदद से खेती करने पर कृषकों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान कर रही है।

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इसमें किसानों को प्रति वर्ग मीटर की इकाई लगाने के लिए 935 रुपये के खर्च में से 50 फीसद मतलब 467 रुपये दिए जाएंगे तथा शेड नेट के लिए प्रति वर्ग मीटर की इकाई 710 रुपये में से 50% फीसद यानी 355 रुपये दिए जाएंगे। 

पॉलीहाउस और शेड नेट किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है ? 

यदि आप भी एक किसान हैं और पॉलीहाउस और शेड नेट तकनीक को अपनाकर खेती करने की सोच रहे हैं, तो इससे आपको बेहद लाभ होने वाला है। दरअसल, खेती की ये तकनीक फसलों को कीटों के हमलों से बचाती है। 

इस तकनीक का इस्तेमाल करने से कीट आक्रमण में 90% प्रतिशत तक की कमी आती है। पॉलीहाउस और शेड नेट तकनीक के जरिए आप वर्षों-वर्ष सुरक्षित तरीके से खेती कर सकते हैं। 

योजना का फायदा लेने के लिए कैसे करें आवेदन ?

योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होम पेज पर उद्यान निदेशालय अंतर्गत संचालित योजनाओं का लाभ लेने के लिए Online Portal के ऑप्शन पर क्लिक करें।

वहां संरक्षित खेती द्वारा बागवानी विकास योजना के लिए आवेदन पर क्लिक करें। इसके बाद आपके सामने नए पेज पर कुछ नियम और शर्तें आएंगी। 

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अब इन नियम और शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़कर जानकारी से सहमत वाले ऑप्शन पर क्लिक करें। ऐसा करते ही आपके सामने आवेदन फॉर्म खुल जाएगा। अब मांगी गई सभी आवश्यक जानकारी को ध्यानपूर्वक भरें। 

इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करें। दस्तावेज अपलोड करते ही सबमिट के ऑप्शन पर क्लिक करें। इस प्रकार आप सफलतापूर्वक इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन हो जाएगा। 

किसान अधिक जानकारी के लिए यहां करें संपर्क

योजना से संबंधित ज्यादा जानकारी के लिए किसान भाई बिहार कृषि विभाग, बागवानी निदेशालय की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। 

इसके अलावा, स्थानीय जनपद के उद्यान विभाग के सहायक निदेशक से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 

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मौसम विभाग ने मार्च माह में गेहूं और सरसों की फसल के लिए सलाह जारी की है https://www.merikheti.com/blog/wheat and mustard crops imd advisory in the month of March Thu, 22 Feb 2024 12:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/wheat and mustard crops imd advisory in the month of March

गेहूँ की फसल के लिए एडवाइजरी

  1. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे आगे बारिश के पूर्वानुमान के कारण खेतों में सिंचाई न करें/उर्वरक न डालें।
  2. उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत पर नियमित निगरानी रखें क्योंकि यह मौसम गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग
  3. विकास के लिए अनुकूल है।
  4. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में सिंचाई न करें/उर्वरक न डालें। आगे बारिश के पूर्वानुमान के कारण अन्य कृषि संबंधी अभ्यास करें।
  5. पीली रतुआ की उपस्थिति के लिए गेहूं की फसल का नियमित सर्वेक्षण करें।
  6. नए लगाए गए और छोटे पौधों के ऊपर बाजरा या ईख की झोपड़ी बनाएं और इसे पूर्व-दक्षिण दिशा में खुला रखें ताकि पौधों को सूरज की रोशनी मिल सके।
  7. किसानों को गेहूं की बुआई की तकनीक जीरो टिलेज, हैप्पी सीडर या अन्य फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने की भी सलाह दी जाती है।
  8. नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फास्फोरस की पूरी मात्रा, पोटाश तथा जिंक सल्फेट को बुआई के समय छिड़कें।
  9. किसानों को यह भी सलाह दी जाती है, कि वे तीसरी और चौथी पत्ती पर 0.5% जिंक सल्फेट के साथ 2.5% यूरिया का छिड़काव करें। पौधों का रंग पीला हो जाता है जो जिंक की कमी के लक्षण दर्शाता है।    
  10. गेहूं की बुआई के 30-35 दिन बाद "जंगली पालक" सहित गेहूं में सभी चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए मेटसल्फ्यूरॉन (एल्ग्रिप जी.पा या जी. ग्रैन) का 8.0 ग्राम (उत्पाद + सहायक) प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। हवा बंद होने पर फ्लैट फैन नोजल का उपयोग करके 200-250 लीटर पानी में मिलकर स्प्रे करें।

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सरसों की फसल के लिए एडवाइजरी    

  1. सिंचाई के दौरान पतला पानी ही डालें और खेत में पौधों में पानी जमा न होने दें।
  2. किसानों को यह भी सलाह दी जाती है, कि वे अपने खेत की नियमित निगरानी करते रहें। क्योंकि यह मौसम इसके लिए अनुकूल है। सफेद रतुआ रोग का विकास और सरसों में एफिड का प्रकोप। पौधे का संक्रमित भाग घटना की प्रारंभिक अवस्था में नष्ट कर दें। 
  3. देश के जिन हिस्सों में तना सड़न रोग प्रति वर्ष होता है, वहां 0.1% की दर से कार्बेन्डाजिम का पहला छिड़काव करना चाहिए। स्प्रे बिजाई के 45-50 दिन पश्चात करें। कार्बेन्डाजिम का दूसरा छिड़काव 0.1 फीसद की दर से 65-70 दिन के बाद करें।  
  4. किसान भाई अपने खेतों की लगातार निगरानी करते रहें। जब यह पुष्टि हो जाए कि सफेद रतुआ रोग ने खेतों में दस्तक दे दी है, तो 250-300 लीटर पानी में 600-800 ग्राम मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) मिलाएं और 15 दिनों के समयांतराल पर प्रति एकड़ 2-3 बार छिड़काव करें।

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ग्लैमर की चकाचौंध को छोड़ 5 साल से खेती कर रहे मशहूर एक्टर की दिलचस्प कहानी https://www.merikheti.com/blog/famous-actor-rajesh-kumar-has-been-doing-farming-for-5-years Thu, 22 Feb 2024 06:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/famous-actor-rajesh-kumar-has-been-doing-farming-for-5-years

आपने ये तो बहुत बार सुना और पढ़ा होगा कि किसी ने अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर खेती किसानी शुरू की। लेकिन, क्या आपने सुना है, कि कोई टीवी एक्टर अपने ग्लेमर के पीक पर पहुंचकर खेती किसानी का रुख करे। जी हाँ, आज हम आपको एक ऐसे ही मशहूर एक्टर की कहानी सुनाऐंगें, जिसने कि अपने कामयाब एक्टिंग करियर को छोड़कर किसान बनने का फैसला लिया। उन्होंने खुद इसके पीछे की वजह का चौंकाने वाला खुलासा किया है। 

एक्टिंग को ग्लैमर की दुनिया भी कहा जाता है और अगर कोई इस दुनिया में रच-बस जाए तो उसका इससे बाहर निकलना काफी कठिन हो जाता है। लेकिन एक एक्टर ऐसा भी है, जिसने एक्टिंग में एक कामयाब करियर होने के बावजूद इस दुनिया को अलविदा कह दिया और किसान बनकर खेती करने लगा। इस एक्टर ने पांच सालों तक गांव में रहकर खेती की और फसल उगाई।

ग्लैमर की दुनिया से खेती का रुख 

ग्लैमर की दुनिया छोड़ किसान बनने वाले इस एक्टर का नाम राजेश कुमार है। राजेश ने 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में रोसेश बनकर खूब नाम कमाया। इसके अलावा वे 'यम किसी से कम नहीं', 'नीली छतरी वाले', 'ये मेरी फैमिली' जैसे शो में दिखाई दिए और अब हाल ही में रिलीज हुई फिल्म तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया में दिखाई दिए हैं। लेकिन इससे पहले राजेश 5 सालों तक बिहार में खेती करते रहे।

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मैं अगली पीढ़ी के लिए क्या कर रहा हूं?

मीडिया एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में राजेश ने कहा- '2017 में, टीवी पर मैं अपने एक्टिंग करियर की ऊंचाईयों पर था, जब मैंने खेती करने का फैसला किया। जब मैं टीवी करने का पूरा लुत्फ उठा रहा था, तो मेरा दिल मुझसे लगातार पूछ रहा था कि एंटरटेनमेंट के कुछ टेप छोड़ने के अलावा, मैं अगली पीढ़ी के लिए क्या कर रहा हूं?'

राजेश ने किस वजह से एक्टिंग से ब्रेक लिया ?

ग्लैमर की दुनिया छोड़ किसान का पेशा अपनाने के बारे में पूछने पर राजेश ने कहा, 'मैं समाज में योगदान देने के लिए कुछ खास या एक्स्ट्रा नहीं कर रहा था। मेरे बच्चे मुझे कैसे याद रखेंगे? एक्टिंग आपने अपने लिए की, अपनी सेफ्टी के लिए की, अपनी कमाई के लिए की। मैंने मन में सोचा कि मैं अपने पीछे कोई कदमों के निशान कैसे छोड़ूंगा? तभी मैं अपने होम टाउन वापस गया और फसलें उगाईं।'

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खेती करने के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया 

राजेश कुमार ने आगे कहा कि जब पांच साल तक वे खेती करते रहे तो कई आउटलेट्स ने कहा कि उन्होंने किसान बनने के लिए एक्टिंग छोड़ दी या फिर उनके पास पैसे नहीं थे। हालांकि, उन्होंने इस दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और अपनी एजुकेशन के बलबूते सभी मुश्किलों से बाहर आ पाए। 

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करेले बोने की इस शानदार विधि से किसान कर रहा लाखों का मुनाफा https://www.merikheti.com/blog/sowing-bitter-gourd-is-making-farmers-rich-and-profits-worth-lakhs-through-this-wonderful-method Thu, 22 Feb 2024 00:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/sowing-bitter-gourd-is-making-farmers-rich-and-profits-worth-lakhs-through-this-wonderful-method

आजकल हर क्षेत्र में काफी आधुनिकीकरण देखने को मिला है। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए करेला की खेती बेहद शानदार सिद्ध हो सकती है। दरअसल, जो करेला की खेती से प्रतिवर्ष 20 से 25 लाख रुपये की शानदार आमदनी कर रहे हैं। हम जिस सफल किसान की हम बात कर रहे हैं, वह उत्तर प्रदेश के कानुपर जनपद के सरसौल ब्लॉक के महुआ गांव के युवा किसान जितेंद्र सिंह है। यह पिछले 4 वर्षों से अपने खेत में करेले की उन्नत किस्मों की खेती (Cultivation of Varieties of bitter gourd) करते चले आ रहे हैं।

किसान जितेंद्र सिंह के अनुसार, पहले इनके इलाके के कृषक आवारा और जंगली जानवरों की वजह से अपनी फसलों की सुरक्षा व बचाव नहीं कर पाते हैं। क्योंकि, किसान अपने खेत में जिस भी फसलों की खेती करते थे, जानवर उन्हें चट कर जाते थे। ऐसे में युवा किसान जिंतेद्र सिंह ने अपने खेत में करेले की खेती करने के विषय में सोचा। क्योंकि, करेला खाने में काफी कड़वा होता है, जिसके कारण जानवर इसे नहीं खाते हैं।

करेला की खेती से संबंधित कुछ विशेष बातें इस प्रकार हैं ?  

किसानों के लिए करेला की खेती (Bitter Gourd Cultivation) से अच्छा मुनाफा पाने के लिए इसकी खेती जायद और खरीफ सीजन में करें। साथ ही, इसकी खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।

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किसान करेले की बुवाई (Sowing of Bitter Gourd) को दो सुगम तरीकों से कर सकते हैं। एक तो सीधे बीज के माध्यम से और दूसरा नर्सरी विधि के माध्यम से किसान करेले की बिजाई कर सकते हैं। अगर आप करेले की खेती (Karele ki kheti) नदियों के किनारे वाले जमीन के हिस्से पर करते हैं, तो आप करेल की अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

करेले की उन्नत किस्में इस प्रकार हैं ?

करेले की खेती से शानदार उपज हांसिल करने के लिए कृषकों को करेले की उन्नत किस्मों (Varieties of Bitter Gourd) को खेत में रोपना चाहिए। वैसे तो बाजार में करेले की विभिन्न किस्में उपलब्ध हैं। परंतु, आज हम कुछ विशेष किस्मों के बारे में बताऐंगे, जैसे कि- हिसार सलेक्शन, कोयम्बटूर लौंग, अर्का हरित, पूसा हाइब्रिड-2, पूसा औषधि, पूसा दो मौसमी, पंजाब करेला-1, पंजाब-14, सोलन हरा और सोलन सफ़ेद, प्रिया को-1, एस डी यू- 1, कल्याणपुर सोना, पूसा शंकर-1, कल्याणपुर बारहमासी, काशी सुफल, काशी उर्वशी पूसा विशेष आदि करेला की उन्नत किस्में हैं। 

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किसान किस विधि से करेले की खेती कर रहा है ?

युवा किसान जितेंद्र सिंह अपने खेत में करेले की खेती ‘मचान विधि’ (Scaffolding Method) से करते हैं। इससे उन्हें काफी अधिक उत्पादन मिलती है। करेले के पौधे को मचान बनाकर उस पर चढ़ा देते हैं, जिससे बेल निरंतर विकास करती जाती है और मचान के तारों पर फैल जाती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने खेत में मचान बनाने के लिए तार और लकड़ी अथवा बांस का इस्तेमाल किया जाता है। यह मचान काफी ऊंचा होता है। तुड़ाई के दौरान इसमें से बड़ी ही सुगमता से गुजरा जा सकता है। करेले की बेलें जितनी अधिक फैलती हैं उससे उतनी ही अधिक उपज हांसिल होती है। वे बीघा भर जमीन से से ही 50 क्विंटल तक उत्पादन उठा लेते हैं। उनका कहना है, कि मचान बनाने से न तो करेले के पौधे में गलन लगती है और ना ही बेलों को क्षति पहुँचती है।

करेले की खेती से कितनी आय की जा सकती है ?

करेले की खेती से काफी शानदार उत्पादन करने के लिए किसान को इसकी उन्नत किस्मों की खेती करनी चाहिए। जैसे कि उपरोक्त में बताया गया है, कि युवा किसान जितेंद्र सिंह पहले अपने खेत में कद्दू, लौकी और मिर्ची की खेती किया करते थे, जिसे निराश्रित पशु ज्यादा क्षति पहुंचाते थे। इसलिए उन्होंने करेले की खेती करने का निर्णय लिया है। वहीं, आज के समय में किसान जितेंद्र 15 एकड़ में करेले की खेती कर रहे हैं और शानदार मुनाफा उठा रहे हैं। जितेंद्र के मुताबिक, उनका करेला सामान्य तौर पर 20 से 25 रुपये किलो के भाव पर आसानी से बिक जाता है। साथ ही, बहुत बार करेला 30 रुपये किलो के हिसाब से भी बिक जाता है। अधिकांश व्यापारी खेत से ही करेला खरीदकर ले जाते हैं। 

उन्होंने यह भी बताया कि एक एकड़ खेत में बीज, उर्वरक, मचान तैयार करने के साथ-साथ अन्य कार्यों में 40 हजार रुपये की लागत आती है। वहीं, इससे उन्हें 1.5 लाख रूपये की आमदनी सरलता से हो जाती है। जितेंद्र सिंह तकरीबन 15 एकड़ में खेती करते हैं। ऐसे में यदि हिसाब-किताब लगाया जाए, तो वह एक सीजन में करेले की खेती से तकरीबन 15-20 लाख रुपये की आय कर लेते हैं। 

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किसान आंदोलन: क्या है एम.एस स्वामीनाथन का C2+50% फॉर्मूला ? https://www.merikheti.com/blog/farmers-protest-what-is-ms-swaminathan-c2-plus-50-percent-formula Wed, 21 Feb 2024 12:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/farmers-protest-what-is-ms-swaminathan-c2-plus-50-percent-formula

भारत सरकार ने हाल ही में महान कृषि वैज्ञानिक एम.एस स्वामीनाथन को मरणोपरांत किसानों के लिए दिए गए योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया है। आज फसलों के लिए MSP कानून की मांग कर रहे किसान एम.एस स्वामीनाथन के C2+50% फॉर्मूले के अंतर्गत एमएसपी की धनराशि का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं।

देशभर के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने सहित 12 मांगों के समर्थन में दिल्ली कूच कर रहे हैं। किसानों के लिए कई जगह सीमाओं को सील कर दिया गया है। यह पहली बार नहीं है, कि किसान सड़कों पर उतरें हैं। किसान हमेशा से अपनी मांगों को आंदोलन के माध्यम से उठाते आ रहे हैं। किसान एम एस स्वामीनाथन आयोग की एमएसपी पर की गई सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। चलिए जानते हैं, स्वामीनाथन आयोग और उसकी सिफारिशों के बारे में। 

नवंबर 2004 में 'नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स' एक आयोग बना था  

किसानों की समस्याओं के अध्ययन के लिए नवंबर 2004 में मशहूर कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था। इसे 'नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स' कहा गया था। दिसंबर 2004 से अक्टूबर 2006 तक इस कमेटी ने सरकार को छह रिपोर्ट सौंपी। इनमें कई सिफारिशें की गई थीं।

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स्वामीनाथन आयोग ने अपनी सिफारिश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें उनकी फसल लागत का 50 फीसदी ज्यादा देने की सिफारिश की थी। इसे C2+50% फॉर्मूला कहा जाता है। आंदोलनकारी किसान इसी फार्मूले के आधार पर MSP गारंटी कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं।

स्वामीनाथन का C2+50% फॉर्मूला क्या है ?

मालूम हो कि स्वामीनाथन आयोग ने इस फार्मूले की गणना करने के लिए फसल लागत को तीन हिस्सों यानी A2, A2+FL और C2 में बांटा था। A2 लागत में फसल का उत्पादन करने में सभी नकदी खर्चे को शामिल किया जाता है। इसमें खाद, बीज, पानी, रसायन से लेकर मजदूरी इत्यादि सभी लागत को जोड़ा जाता है। 

A2+FL कैटगरी में कुल फसल लागत के साथ-साथ किसान परिवार की मेहनत की अनुमानित लागत को भी जोड़ा जाता है। जबकि C2 में नकदी और गैर नकदी लागत के अलावा जमीन का लीज रेंट और उससे जुड़ी चीजों पर लगने वाले ब्याज को भी शामिल किया जाता है। स्वामीनाथन आयोग ने C2 की लागत को डेढ़ गुना यानी C2 लागत के साथ उसका 50 फीसदी खर्च जोड़कर एमएसपी देने की सिफारिश की थी। अब किसान इसी फॉर्मूले के अंतर्गत उन्हें एमएसपी देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सरकार और किसानों के बीच फिलहाल इस मुद्दे का कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है। 

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अप्रैल माह के कृषि सम्बन्धी आवश्यक कार्य https://www.merikheti.com/blog/important-agricultural-related-work-in-the-month-of-april Wed, 21 Feb 2024 06:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/important-agricultural-related-work-in-the-month-of-april

अप्रैल माह में ज्यादातर कार्य फसल की कटाई से सम्बंधित होते है। इस माह में किसान रबी फसलों की कटाई कर दूसरी फसलों की बुवाई करते है। इस माह में कृषि से सम्बंधित किये जाने वाले आवश्यक कार्य कुछ इस प्रकार है। 

रबी फसलों की कटाई 

गेहूँ, मटर, चना, जौ और मसूर आदि की फसल की कटाई का कार्य इस माह में ही किया जाता है। इन फसलों की कटाई सही समय पर होना बेहद जरूरी है। यदि फसल की कटाई सही समय पर नहीं होती है, तो फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता पर काफी बुरा प्रभाव पड़ेगा। देर से कटाई करने पर फलियाँ और बालियाँ टूटकर गिरने लगती है। इसके अलावा चिड़ियों और चूहों के द्वारा भी इस फसल को नुक्सान पहुँचाया जा  सकता है। 

फसल की कटाई का कार्य किसान स्वयं भी कर सकता है, या फिर मशीनों द्वारा भी इसकी कटाई करवा सकते है। कुछ किसान हँसिया द्वारा फसल की कटाई करवाते है, क्योंकि इसमें भूसे और दाने का बहुत कम नुक्सान होता है। कंबाइन द्वारा फसल की कटाई आसान होती है, और इसमें हँसिया के मुकाबले बहुत ही कम समय लगता है, और धन की भी बचत होती है। 

कंबाइन से कटाई करने के लिए फसल में 20 % नमी होना जरूरी है। यदि फसल की कटाई दरांती आदि से की जा रही है तो फसल को अच्छे से सुखा ले, उसके बाद कटाई प्रारम्भ करें। फसल को लम्बे समय तक खेत में एकट्ठा करके न रखें। फसल को शीघ्र ही थ्रेसर आदि से निकलवा लें। 

हरी खाद के लिए फसलों की बुवाई 

अप्रैल माह में किसानों द्वारा भूमि की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने के लिए हरी खाद वाली फसलों की बुवाई की जाती है। हरी खाद की फसलों में ढेंचा को भी शामिल किया जाता है। ढेंचा की बुवाई का कार्य अप्रैल माह के अंत तक कर देना चाहिए। ढेंचा की खेती से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपस्तिथी बनी रहती है। 

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चना और सरसों की कटाई 

अप्रैल के महीने में सरसों, आलू और चना की कटाई हो जाती है। इन सभी फसलों की कटाई के बाद किसान उसमें तुरई, खीरा, टिण्डा, करेला और ककड़ी जैसी सब्जियां भी उगा सकता है। ध्यान रखें बुवाई करते वक्त पौधे से पौधे की दूरी 50 सेंटीमीटर से 100 सेंटीमीटर के बीच में रखें। यदि इन सभी सब्जियों की बुवाई कर दी गई हो, तो सिंचाई का विशेष रूप से ध्यान रखें। फसल के अधिक उत्पादन के लिए हाइड्रोजाइड और ट्राई आयोडो बेन्जोइक एसिड को पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 

मूली और अदरक की बुवाई 

रबी फसलों की कटाई के बाद इस माह में मूली और अदरक की बुवाई की जाती है। मूली की आर आर डब्ल्यू और पूसा चेतकी किस्म इस माह में उगाई जा सकती है। अदरक की बुवाई करने से पहले बीज उपचार कर लें।  बीज उपचार के लिए बाविस्टीन नामक दवा का उपयोग करें। 

ये भी पढ़ें: इस प्रकार से अदरक की खेती करने पर होगा जबरदस्त मुनाफा

टमाटर की फसल में लगने वाला कीट 

टमाटर की बुवाई का कार्य अप्रैल माह से पहले ही कर दिया जाता है। अप्रैल माह में टमाटर की फसल को फल छेदक रोगों से बचाने के लिए मैलाथियान रासायनिक दवा को 1 मिली पानी में मिला कर छिड़काव कर दें। लेकिन छिड़काव करने से पहले पके फलों को तोड़ लें। छिड़काव करने के बाद फलों की 3 - 4 दिनों तक तुड़ाई न करें। 

भिन्डी की फसल 

वैसे तो भिन्डी के पौधो में ग्रीष्मकालीन से ही फल लगने शुरू हो जाते है। नरम और कच्चे फलों को उपयोग के लिए तोड़ लिया जाता है। भिन्डी में लगने वाले फलों को 3-4 दिन के अंतराल पर तोड़ लेना चाहिए। यदि फलो की देरी से तुड़ाई होती है, तो फल कड़वे और कठोर रेशेदार हो जाते है। 

कई बार भिन्डी के पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती है, और फलों का आकर भी छोटा हो जाता है। भिन्डी की फसल में यह रोग पीला मोजेक विषाणु द्वारा होता है। इस रोग से फसल को बचाने के लिए रोग ग्रस्त पौधो को उखाड़कर फेक दें या फिर रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कर इस फसल को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। 

प्याज और लहसुन की खुदाई 

अप्रैल माह में प्याज और लहसुन की खुदाई शुरू कर दी जाती है। प्याज और लहसुन की खुदाई करने से 15 -20 दिन पहले ही सिंचाई का काम बंद कर देना चाहिए। जब पौधा अच्छे से सूख जाए तभी उसकी खुदाई करें। पौधा सूखा है या नहीं इसकी पहचान किसान पौधे के सिरे को तोड़कर कर सकता है। 

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शिमला मिर्च की देख रेख 

शिमला मिर्च की फसल में 8 -10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए। फसल में खरपतवार को कम करने के लिए  निराई और गुड़ाई का काम भी करते रहना चाहिए। शिमला मिर्च की खेती को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए रोगेर 30 ई सी को पानी में मिलाकर छिड़काव करें। कीट का ज्यादा प्रकोप होने पर 10 -15 दिन के अंतराल पर फिर से छिड़काव कर सकते है। 

बैंगन की फसल 

बैंगन की फसल में निरंतर निगरानी रखे, बैंगन की फसल में तना और फल छेदक कीटों की ज्यादा संभावनाएं रहती है। इसीलिए फसल को कीटों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाइयों का उपयोग करें।

कटहल की फसल 

गलन जैसे रोगों की वजह से कटहल की खेती खराब हो सकती है। इसकी रोकथाम के लिए जिंक कार्बामेट के घोल का छिड़काव करें। 

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ककड़ी की खेती से जुड़ी विस्तृत जानकारी https://www.merikheti.com/blog/kakdi-ki-kheti-detailed-information-related-to-cucumber-cultivation Wed, 21 Feb 2024 00:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/kakdi-ki-kheti-detailed-information-related-to-cucumber-cultivation

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। आज हम आपको ककड़ी की फसल के बारे में जानकारी देंगे, तो आपको सबसे पहले बतादें, कि ककड़ी कुकरबिटेसी परिवार से संबंधित है और इसका वानस्पतिक नाम कुकुमिस मेलो है और भारत इसका मूल स्थान है। यह हल्के हरे रंग की होती है, जिसका छिल्का नर्म और गुद्दा सफेद होता है। इसका मुख्य रूप से सलाद के रूप में नमक और काली मिर्च के साथ सेवन किया जाता है। इसके फल में ठंडा प्रभाव होता है। इसलिए इसे मुख्य तौर पर गर्मियों के मौसम में खाया जाता है।

ककड़ी की खेती के लिए मृदा एवं भूमि  

ककड़ी का उत्पादन मिट्टी की विभिन्न किस्मों में बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है, जैसे रेतीली दोमट से भारी मिट्टी जो कि अच्छी जल निकासी वाली हो। इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 5.8-7.5 होना चाहिए। इसके साथ-साथ जमीन की तैयारी भी करना बहुत जरूरी है। ककड़ी की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार जमीन की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए हैरो से 2-3 बार जोताई करना काफी जरूरी है।

बिजाई का समय और विधि क्या है?

बीजों की बिजाई के लिए फरवरी-मार्च का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। बीजों के मध्य फासला खालियों के बीच 200-250 सैं.मी. और मेंड़ों के बीच 60-90 सैं.मी. रखना फायदेमंद साबित होगा। फसल के शानदार विकास के लिए दो बीजों को एक जगह पर बोयें। बीज की गहराई की बात करें तो बीजों को 2.5-4 सैं.मी गहराई में बोयें। बिजाई का तरीका बीजों को बैड या मेंड़ पर सीधे बोया जाता है। बीज की मात्रा की बात करें तो आप प्रति एकड़ में 1 किलो बीजों का इस्तेमाल करें।

बीजोपचार व खाद 

मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए बैनलेट या बविस्टिन 2.5 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें। वहीं, खाद की बात करें तो नर्सरी बैड से 15 सैं.मी. दूरी पर फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन का 1/3 भाग बिजाई के समय डालें। बाकी की बची हुई नाइट्रोजन बिजाई से एक महीना बाद में डालें।

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खरपतवार नियंत्रण व सिंचाई 

खरपतवार नियंत्रण के लिए बेलों के फैलने से पहले इनकी ऊपरी परत की कसी से हल्की गुड़ाई करें। सिंचाई की बात करें तो बिजाई के तुरंत पश्चात सिंचाई करना बेहद जरूरी है। गर्मियों में, 4-5 सिंचाइयों की काफी जरूरत होती है और बारिश के मौसम में सिंचाई जरूरत के मुताबिक करें। 

ककड़ी के पौधे में लगने वाले हानिकारक कीट और उनकी रोकथाम

  • चेपा और थ्रिप्स: ये कीट पत्तों का रस चूसते हैं, जिससे पत्ते पीले पड़ जाते हैं और गिर जाते हैं। थ्रिप्स के कारण पत्ते मुड़ जाते हैं, जिससे पत्ते कप के आकार के और ऊपर की तरफ मुड़े हुए होते हैं। 

उपचार: इसका हमला फसल में दिखाई दे तो, थायामैथोकस्म 5 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे फसल पर करें।

  • भुण्डी:  भुंडी कीट के कारण फूल, पत्ते और तने नष्ट हो जाते हैं।

उपचार: यदि इसका हमला दिखाई दें तो, मैलाथियोन 2 मि.ली. या कार्बरिल 4 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें यह भुंडी की रोकथाम में सहायक है। 

फल की मक्खी

  • फल की मक्खी: यह ककड़ी की फसल का गंभीर कीट है। नर मक्खी फल की बाहरी परत के नीचे अंडे देती है उसके बाद ये छोटे कीट फल के गुद्दे को अपना भोजन बनाते हैं उसके बाद फल गलना शुरू हो जाता है और गिर जाता है।

उपचार: फसल को फल की मक्खी से बचाने के लिए नीम के तेल में 3.0% फोलियर स्प्रे करें।

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पत्तों पर सफेद धब्बे वाली बीमारियां और उनकी रोकथाम

  • सफेद फफूंदी: पत्तों के ऊपरी सतह पर सफेद रंग के धब्बे पड़ जाते हैं ये धब्बे प्रभावित पौधे के मुख्य तने पर भी दिखाई देते हैं। इसके कीट पौधे को अपने भोजन के रूप में प्रयोग करते हैं। इनका हमला होने पर पत्ते गिरते हैं और फल पकने से पहले ही गिर जाते हैं।

उपचार: सफेद फफूँदी का हमला खेत में दिखे तो पानी में घुलनशील सल्फर 20 ग्राम को 10 लीटर पानी में डालकर 10 दिनों के अंतराल पर 2-3 बार स्प्रे करें।

एंथ्राकनोस

  • ऐंथ्राक्नोस: यह पत्तों पर हमला करता है, जिसके कारण पत्ते झुलसे हुए दिखाई देते हैं।

उपचार: एंथ्राकनोस की रोकथाम के लिए कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें। यदि इसका हमला खेत में दिखाई दे तो, मैनकोजेब 2 ग्राम या कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।

पत्तों के निचले धब्बे

  • पत्तों के निचली ओर धब्बे: यह रोग स्यिूडोपरनोस्पोरा क्यूबेनसिस के कारण होता है। इससे पत्तों की निचली सतह पर छोटे और जामुनी रंग के धब्बे दिखाई देते हैं।

उपचार: यदि इसका प्रभाव दिखाई दे तो डाइथेन एम-45 या डाइथेन Z-78 का प्रयोग इस बीमारी से बचने के लिए करें।

ककड़ी का मुरझाना

  • मुरझाना: यह पौधे के वेस्कुलर टिशुओं पर प्रभाव डालता है, जिससे पौधा तुरंत ही मुरझा जाता है।

उपचार: फुजारियम सूखे से बचाव के लिए कप्तान या हैक्सोकैप 0.2-0.3%का छिड़काव करें।

  • कुकुरबिट फाइलोडी: इस बीमारी के कारण पोर छोटे और पौधे की वृद्धि रूक जाती है, जिसके कारण फसल फल पैदा नहीं करती।

उपचार: इस बीमारी से बचाव के लिए बिजाई के समय फुराडन 5 किलोग्राम बिजाई के समय प्रति एकड़ में डालें। यदि इसका हमला दिखे तो डाईमेक्रोन 0.05 % 10 दिनों के अंतराल पर करें।

ये भी पढ़ें: फसलों में पोषक तत्वों की कमी की जाँच करने का तरीका

ककड़ी फसल की कटाई कब करें

ककड़ी के फल 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। कटाई मुख्य तौर पर फल के पूरी तरह विकसित होने और नर्म होने पर की जाती है। कटाई मुख्य रूप से फूल निकलने के मौसम में 3-4 दिनों के अंतराल पर की जाती है।

ककड़ी का बीज उत्पादन कैसे करें ?

ककड़ी को अन्य किस्मों जैसे कि स्नैप मैलन, वाइल्ड मैलन, खरबूजा और ककड़ी आदि से 1000 मीटर की दूरी पर रखें। खेत में से प्रभावित पौधों को हटा दें। जब फल पक जायें जैसे उनका रंग बदलकर हल्का हो जाये तब उन्हें ताजे पानी में रखकर हाथों से तोड़ें और गुद्दे से बीजों को अलग कर लें। बीज जो नीचे स्तर पर बैठ जाते हैं, उन्हें बीज उद्देश्य के लिए एकत्रित किया जाता है।

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पोल्ट्री फार्म खोलने के लिए सरकार देगी 40 लाख, जानें पूरी जानकारी https://www.merikheti.com/blog/samekit-murgi-vikas-yojana-government-will-give-40-lakhs-to-open-poultry-farms-for-poultry-farming-scheme Tue, 20 Feb 2024 12:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/samekit-murgi-vikas-yojana-government-will-give-40-lakhs-to-open-poultry-farms-for-poultry-farming-scheme

मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई योजना का नाम "समेकित मुर्गी विकास योजना" है। इस योजना के जरिये सरकार अंडा उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। किसानों को अंडे का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

इस योजना के जरिये किसान लाभ भी कमा सकते है। मुर्गी पालन करने के लिए, सरकार बिहार राज्य के लोगों को 40 लाख रुपए की राशि प्रदान कर रही है। यदि कोई व्यक्ति घर बैठे ही बिज़नेस करना चाहता है, तो उसके लिए यह सुनहरा मौका है। 

इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 50 फीसदी का अनुदान प्रदान किया जायेगा। वही सामान्य जाती के लोगों को 30 फीसदी अनुदान दिया जायेगा। पोल्ट्री फार्मिंग का व्यवसाय कर किसान अन्य लोगों को भी उसमें रोजगार प्रदान कर सकते है। मुर्गी पालन के इस कार्य को रोजगार का सबसे बेहतर माध्यम माना जाता है। 

आवेदन के जरूरी दस्तावेज क्या है ?

  1. आवेदक का आधार कार्ड 
  2. आवेदक का निवास प्रमाण पत्र 
  3. पासपोर्ट साइज फोटो 
  4. जाति प्रमाण पत्र 
  5. बैंक की पास बुक की फोटो कॉपी 
  6. पैन कार्ड की फोटो कॉपी 
  7. आवेदन करते वक्त, आवेदक के पास राशि की छाया प्रति 
  8. भूमि का ब्यौरा या नजरी नक्शा 
  9. मुर्गी पालन का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र 

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समेकित मुर्गी विकास योजना में कैसे करें आवेदन ?

यदि आवेदक इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करना चाहता है, तो state.bihar.gov.in वेबसाइट पर कर सकता है। यह कृषि मंत्रालय की वेबसाइट है। यदि आवेदक ऑफलाइन आवेदन करना चाहता है तो, नजदीकी कृषि मंत्रालय में जाकर आवेदन कर सकता है। इस योजना में आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2024 है। 

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जानें महिंद्रा 1626 एचएसटी की विशेषताएं, फीचर्स और कीमत के बारे में ? https://www.merikheti.com/blog/mahindra-1626-hst-features-and-price-2024-mahindra-tractor-26-hp-ka-best-mini-tractor Tue, 20 Feb 2024 06:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/mahindra-1626-hst-features-and-price-2024-mahindra-tractor-26-hp-ka-best-mini-tractor

कृषि के साथ-साथ बहुत सारे ऐसे कार्य होते हैं, जिनमें ट्रैक्टर की अहम भूमिका है। अगर आप आधुनिक खेती के लिए एक ताकतवर लोडर ट्रैक्टर खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो आपके लिए महिंद्रा 1626 एचएसटी ट्रैक्टर एक बेहद शानदार विकल्प हो सकता है। कंपनी का यह लोडर ट्रैक्टर 26 HP पावर उत्पन्न करने वाले 1318 CC इंजन के साथ आता है। 

महिंद्रा एंड महिंद्रा ट्रैक्टर इंडस्ट्री में एक बड़ा और विश्वसनीय नाम है। कंपनी के ट्रैक्टर विभिन्न इलाकों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हैं। महिंद्रा ट्रैक्टर उच्च शक्ति और अच्छी कार्यक्षमता के अनुरूप निर्मित किए जाते हैं, जो कृषकों के कार्यों को सुगम बनाते हैं। 

महिंद्रा 1626 एचएसटी की क्या-क्या विशेषताऐं हैं ? 

Mahindra 1626 HST ट्रैक्टर में आपको 1318 सीसी क्षमता वाला 3 सिलेंडर में water cooled इंजन प्रदान किया जाता है, जो 26 HP पावर उत्पन्न करता है। कंपनी का यह ट्रैक्टर Dry type एयर फिल्टर के साथ आता है। इस महिंद्रा लोडर ट्रैक्टर की अधिकतम पीटीओ पावर 19 HP है और इसका इंजन आरपीएम 2000 है। कंपनी के इस ट्रैक्टर में 27 लीटर क्षमता वाला ईंधन टैंक प्रदान किया गया है। महिंद्रा 1626 एचएसटी ट्रैक्टर की भार उठाने की क्षमता 1560 किलोग्राम निर्धारित की गई है और इसका कुल भार 1115 किलोग्राम है। कंपनी ने अपने इस लोडर ट्रैक्टर को 3081 MM लंबाई और 1600 MM चौड़ाई के साथ 1709 MM व्हीलबेस में तैयार किया है। इस महिंद्रा ट्रैक्टर का ग्राउंड क्लीयरेंस 289 MM निर्धारित किया गया है।

ये भी पढ़ें: जानिए महिंद्रा युवो 585 मैट ट्रैक्टर की विशेषताऐं, फीचर्स और कीमत के बारे में

महिंद्रा 1626 एचएसटी के क्या-क्या फीचर्स और कीमत होती हैं ?

महिंद्रा कंपनी का यह Mahindra 1626 HST लोडर ट्रैक्टर Power स्टीयरिंग के साथ आता है। इस मिनी ट्रैक्टर में आपको 8 forward and 8 reverse गियर वाला गियरबॉक्स प्रदान किया जाता है। कंपनी के इस लोडर ट्रैक्टर में Single Dry एयर फिल्टर प्रदान किया गया है और इसमें HST – 3 Ranges ट्रांसमिशन आता है। महिंद्रा कंपनी के इस कॉम्पैक्ट लोडर ट्रैक्टर में आपको Wet Disc ब्रेक्स देखने को मिल जाते हैं, जो टायरों पर अपनी अच्छी पकड़ बनाए रखते हैं। 

महिंद्रा 1626 एचएसटी ट्रैक्टर 4WD ड्राइव में आता है, इसमें आपको 27 x 8.5 फ्रंट टायर और 15 x 19.5 रियर टायर देखने को मिल जाते हैं। कंपनी के इस मिनी लोडर ट्रैक्टर में Live टाइप पावर टेकऑफ आती है, जो 540 आरपीएम उत्पन्न करती है। महिंद्रा 1626 एचएसटी की कीमत (Mahindra 1626 HST Price 2024) की बात करें तो Mahindra & Mahindra ने अपने इस महिंद्रा 1626 एचएसटी ट्रैक्टर की एक्स शोरूम कीमत 17 लाख से 17.15 लाख रुपये तय की है। कंपनी अपने इस मिनी लोडर ट्रैक्टर के साथ 5 साल की वारंटी प्रदान करती है।

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फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर की विशेषताएँ, फीचर्स और कीमत https://www.merikheti.com/blog/force-orchard-mini-tractor-specifications-features-and-price-excellent-performance-in-agriculture-field Tue, 20 Feb 2024 00:30:00 GMT https://www.merikheti.com/blog/force-orchard-mini-tractor-specifications-features-and-price-excellent-performance-in-agriculture-field

फोर्स कंपनी भारतीय कृषि क्षेत्र में अपने शानदार प्रदर्शन वाले ट्रैक्टर निर्मित करने के लिए मशहूर है। फोर्स ट्रैक्टर एक शक्तिशाली इंजन के साथ आते हैं, जो खेती सहित समस्त व्यावसायिक कार्यों को सुगमता से पूर्ण कर सकते हैं। यदि आप भी खेती के लिए शक्तिशाली ट्रैक्टर खरीदने का विचार बना रहे हैं, तो आपके लिए फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर (Force Orchard Mini Tractor) एक बेहतरीन विकल्प सिद्ध हो सकता है। कंपनी का यह मिनी ट्रैक्टर कॉम्पैक्ट साइज का होकर भी ज्यादा भार उठा सकता है। इस फोर्स ट्रैक्टर में आपको 2200 आरपीएम के साथ 27 HP शक्ति उत्पन्न करने वाला 1947 सीसी इंजन आता है।

फोर्स ऑर्चर्ड मिनी की क्या-क्या विशेषताऐं हैं ? 

फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर (Force ORCHARD Mini Tractor) में आपको 1947 सीसी क्षमता वाला 3 सिलेंडर में Water Cooled इंजन दिया जाता है, जो 27 HP पावर उत्पन्न करता है। कंपनी के इस ट्रैक्टर में Dry Air Cleaner एयर फिल्टर दिया गया है। इस फोर्स मिनी ट्रैक्टर की अधिकतम पीटीओ पावर 23.2 एचपी है और इसके इंजन से 2200 आरपीएम उत्पन्न होता है। कंपनी के इस ट्रैक्टर में 29 लीटर क्षमता वाला ईंधन टैंक दिया गया है। फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर (Force Orchard Mini Tractor) की भार उठाने की क्षमता 950 किलोग्राम है और इसका समकुल भार 1395 किलोग्राम है। कंपनी ने अपने इस ट्रैक्टर को 2840 MM लंबाई और 1150 MM चौड़ाई के साथ 1590 MM व्हीलबेस में तैयार किया है। इस फोर्स ट्रैक्टर का 235 MM ग्राउंड क्लीयरेंस निर्धारित किया गया है।

फोर्स ऑर्चर्ड मिनी के क्या-क्या फीचर्स हैं ?

फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर (Force Orchard Mini Tractor) में आपको Single Drop Arm Mechanical स्टीयरिंग देखने को मिल जाता है, जो खेतीबाड़ी के कार्यों में आरामदायक ड्राइव प्रदान करता है। कंपनी के इस ट्रैक्टर में 8 Forward + 4 Reverse गियर वाला गियरबॉक्स प्रदान किया गया है। इस फोर्स ट्रैक्टर में Dry, dual clutch Plate दिया गया है और इसमें Easy shift Constant mesh टाइप ट्रांसमिशन आता है। कंपनी के इस ट्रैक्टर में आपको Fully Oil Immersed Multiplate Sealed Disc ब्रेक्स प्रदान किए गए हैं। फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर में 2WD ड्राइव आता है, इसमें आपको 5.00 x 15 फ्रंट टायर और 8.3 x 24 रियर टायर देखने को मिल जाते हैं। कंपनी के इस मिनी ट्रैक्टर में Multi Speed PTO टाइप पावर टेकऑफ आती है, जो 540 / 1000 आरपीएम उत्पन्न करती है। 

फोर्स ऑर्चर्ड मिनी की कितनी कीमत है ?

भारत में फोर्स कंपनी ने फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर (Force Orchard Mini Tractor) की एक्स शोरूम कीमत 5.00 लाख से 5.20 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस फोर्स मिनी ट्रैक्टर की ऑन रोड प्राइस समस्त राज्यों में लगने वाले आरटीओ रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स के चलते भिन्न हो सकती है। कंपनी अपने इस फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर (Force Orchard Mini Tractor) के साथ 3000 घंटे या 3 साल की वारंटी प्रदान करती है। 

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पीएम किसान सम्मान निधि की 16 वीं किस्त इस तारीख को किसानों के खाते में पहुंचेगी

पीएम किसान सम्मान निधि की 16 वीं किस्त इस तारीख को किसानों के खाते में पहुंचेगी

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से संबंधित लाखों कृषकों के लिए खुशी का समाचार है। पीएम किसान योजना की 16 वीं किस्त की तारीख जारी हो गई है। किसानों को इसी माह योजना की 16वीं किस्त जारी कर दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस माह के आखिर में लाखों कृषकों के खाते में पीएम किसान योजना के 2000 रुपये हस्तांतरित करेंगे। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर आगामी किस्त की तारीख जारी हो गई है। आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 28 फरवरी, 2024 को किसानों के खाते में पीएम किसान योजना का पैसा जारी कर दिया...
मौसम विभाग ने मार्च माह में गेहूं और सरसों की फसल के लिए सलाह जारी की है

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गेहूँ की फसल के लिए एडवाइजरीकिसानों को सलाह दी जाती है कि वे आगे बारिश के पूर्वानुमान के कारण खेतों में सिंचाई न करें/उर्वरक न डालें।उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत पर नियमित निगरानी रखें क्योंकि यह मौसम गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोगविकास के लिए अनुकूल है।किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में सिंचाई न करें/उर्वरक न डालें। आगे बारिश के पूर्वानुमान के कारण अन्य कृषि संबंधी अभ्यास करें।पीली रतुआ की उपस्थिति के लिए गेहूं की फसल का नियमित सर्वेक्षण करें।नए लगाए गए और छोटे पौधों के ऊपर बाजरा या ईख...
ग्लैमर की चकाचौंध को छोड़ 5 साल से खेती कर रहे मशहूर एक्टर की दिलचस्प कहानी

ग्लैमर की चकाचौंध को छोड़ 5 साल से खेती कर रहे मशहूर एक्टर की दिलचस्प कहानी

आपने ये तो बहुत बार सुना और पढ़ा होगा कि किसी ने अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर खेती किसानी शुरू की। लेकिन, क्या आपने सुना है, कि कोई टीवी एक्टर अपने ग्लेमर के पीक पर पहुंचकर खेती किसानी का रुख करे। जी हाँ, आज हम आपको एक ऐसे ही मशहूर एक्टर की कहानी सुनाऐंगें, जिसने कि अपने कामयाब एक्टिंग करियर को छोड़कर किसान बनने का फैसला लिया। उन्होंने खुद इसके पीछे की वजह का चौंकाने वाला खुलासा किया है। एक्टिंग को ग्लैमर की दुनिया भी कहा जाता है और अगर कोई इस दुनिया में रच-बस जाए तो उसका इससे बाहर निकलना काफी...
जानें महिंद्रा 1626 एचएसटी की विशेषताएं, फीचर्स और कीमत के बारे में ?

जानें महिंद्रा 1626 एचएसटी की विशेषताएं, फीचर्स और कीमत के बारे में ?

कृषि के साथ-साथ बहुत सारे ऐसे कार्य होते हैं, जिनमें ट्रैक्टर की अहम भूमिका है। अगर आप आधुनिक खेती के लिए एक ताकतवर लोडर ट्रैक्टर खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो आपके लिए महिंद्रा 1626 एचएसटी ट्रैक्टर एक बेहद शानदार विकल्प हो सकता है। कंपनी का यह लोडर ट्रैक्टर 26 HP पावर उत्पन्न करने वाले 1318 CC इंजन के साथ आता है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ट्रैक्टर इंडस्ट्री में एक बड़ा और विश्वसनीय नाम है। कंपनी के ट्रैक्टर विभिन्न इलाकों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हैं। महिंद्रा ट्रैक्टर उच्च शक्ति और अच्छी कार्यक्षमता के अनुरूप निर्मित किए जाते हैं,...
फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर की विशेषताएँ, फीचर्स और कीमत

फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर की विशेषताएँ, फीचर्स और कीमत

फोर्स कंपनी भारतीय कृषि क्षेत्र में अपने शानदार प्रदर्शन वाले ट्रैक्टर निर्मित करने के लिए मशहूर है। फोर्स ट्रैक्टर एक शक्तिशाली इंजन के साथ आते हैं, जो खेती सहित समस्त व्यावसायिक कार्यों को सुगमता से पूर्ण कर सकते हैं। यदि आप भी खेती के लिए शक्तिशाली ट्रैक्टर खरीदने का विचार बना रहे हैं, तो आपके लिए फोर्स ऑर्चर्ड मिनी ट्रैक्टर (Force Orchard Mini Tractor) एक बेहतरीन विकल्प सिद्ध हो सकता है। कंपनी का यह मिनी ट्रैक्टर कॉम्पैक्ट साइज का होकर भी ज्यादा भार उठा सकता है। इस फोर्स ट्रैक्टर में आपको 2200 आरपीएम के साथ 27 HP शक्ति उत्पन्न...