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धूप

बढ़ती प्रचंड गर्मी से पशुओं को ऐसे बचाएं, गर्मी से दुग्ध उत्पादन में 15% प्रतिशत गिरावट

बढ़ती प्रचंड गर्मी से पशुओं को ऐसे बचाएं, गर्मी से दुग्ध उत्पादन में 15% प्रतिशत गिरावट

गर्मी में बढ़ोत्तरी होने की स्थिति में मवेशी चारा तक खाना कम कर देते हैं। इससे पशुओं की दुग्ध उत्पादक क्षमता में गिरावट आ जाती है। साथ ही, तेज धूप की तपिश की वजह से पशु तनाव में आ जाते हैं। इसकी वजह से उनके शरीर में सुस्ती बढ़ने लग जाती है। आजकल देशभर में अत्यधिक गर्मी पड़ रही है। इससे आम जनमानस के साथ- साथ मवेशियों का भी हाल-बेहाल हो चुका है। सुबह के 9 बजते ही शरीर को तपा देने वाली गर्म हवाएं चलने लगती हैं। ऊपर से चिलचिलाती प्रचंड धूप ने लोगों को परेशान कर दिया है। विभिन्न राज्यों में तापमान 40 डिग्री के भी लांघ चुका है। इसकी वजह से मुख्यतः मवेशी बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं। गर्मी की वजह से दुधारू मवेशियों ने दूध देना कम कर दिया है। ऐसी स्थिति में पशुपालकों की आमदनी कम हो गई है।

दुग्ध उत्पादन में 15 प्रतिशत की गिरावट

मीडिया खबरों के अनुसार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में तापमान 43 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है। तापमान में बढ़ोत्तरी होने से मवेशियों ने दूध देना तक कम कर दिया है। बतादें, कि बढ़ती गर्मी की वजह से दूध की पैदावार में 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वह दूध बेच कर पशु चारे पर आने वाली लागत जैसे-तैसे निकाल पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसान भाइयों का कहना है, कि यदि इसी प्रकार तापमान में वृद्धि जारी रही, तो दूध उत्पादन में और भी कमी आ सकती है। इससे उनको पशुपालन में घाटा उठाना पड़ सकता है। ये भी देखें: बढ़ते तापमान और गर्मी से पशुओं को बचाने की काफी आवश्यकता है

मवेशियों को सुबह-शाम तालाब में स्नान कराऐं

पशु चिकित्सकों के अनुसार, गर्मी बढ़ने पर मवेशी चारा खाना काफी कम कर देते हैं। इससे उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता में गिरावट आ जाती है। साथ ही, चिलचिलाती धूप की तपिश की वजह से पशु तनाव में आ जाते हैं। इससे उनके शरीर में सुस्ती बढ़ने लगती है, जिसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से दूध देने की क्षमता पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में दूध की मात्रा में कमी आने लगती है। ऐसी स्थिति में पशुओं को गर्मी और लू से संरक्षण देने के लिए सुबह- शाम उसे नहर अथवा तालाब में नहलाना चाहिए। इससे उनके शरीर का तापमान काफी कम रहता है, जिससे वह सेहतमंद रहते हैं।

मवेशियों को प्रतिदिन 4 से 5 बार शीतल जल पिलाएं

साथ ही, मवेशियों को गर्मी से बचाव के लिए 4 से 5 बार शीतल जल पिलाएं। साथ ही, पशुओं को छायादार और हवादार स्थान पर ही बांधे। यदि दोपहर में काफी ज्यादा तापमान बढ़ गया है, तब मवेशी के बाड़े में कूलर या पंखा भी चला सकते हैं। इससे मवेशियों को गर्मी से काफी सहूलियत मिलती है। यदि मवेशी सूखा चारा नहीं खा पा रहे हैं, तो उन्हें हरी- हरी घास खाने को दें। इससे दूध की पैदावार कम नहीं होगी। अगर संभव हो तो किसान भाई अपनी गाय- भैंस को लोबिया घास खाने के लिए उपलब्ध कराऐं। इसके अंदर काफी ज्यादा मात्रा में फाइबर, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व विघमान रहते हैं। इससे गाय- भैंस पूर्व की तुलना में अधिक दूध देने लगती हैं।

यह घास दुग्ध उत्पादन को बढ़ा सकती है

यदि किसान भाई चाहते हैं, तो दूध की पैदावार बढ़ाने के लिए मवेशियों को अजोला घास भी खिला सकते हैं। यह घास पानी में उत्पादित की जाती है और पोषण से भूरपूर होती है। गर्मी के मौसम में इसे मवेशियों के लिए संजीवनी कहा गया है। साथ ही, प्रतिदिन 200 ग्राम सरसों के तेल में 250 ग्राम गेहूं का आटा मिलाकर मिश्रण बना लें। इस मिश्रण को प्रतिदिन सुबह- शाम चारे के साथ मिश्रित करके मवेशियों को खिलाएं। सिर्फ एक हफ्ते तक ऐसा करें, इससे पशुओं में दूध देनी की क्षमता बढ़ सकती है।
किसान गोबर से बने इन उत्पादों का व्यवसाय करके कुछ ही समय में अमीर बन सकते हैं

किसान गोबर से बने इन उत्पादों का व्यवसाय करके कुछ ही समय में अमीर बन सकते हैं

आपकी जानकारी के लिए बतादें कि बाजार में धूपबत्ती की भांति इस वक्त गोबर से बने दिये भी खूब बिक रहे हैं। सबसे खास बात यह है, कि गोबर से निर्मित दिये भारत समेत विदेशों में भी ऑनलाइन माध्यम से विक्रय किए जा रहे हैं। फिलहाल, दुनियाभर में किसान खेती से हटकर विभिन्न प्रकार के व्यापार कर रहे हैं। हालांकि, यह समस्त व्यापार कृषि एवं पशुपालन से ही संबंधित हैं। आज हम आपको गाय भैसों के गोबर से होने वाले ये बिजनेस आइडियाज देंगे, जो आपको कुछ ही समयांतराल में अमीर बना देंगे। सबसे खास बात यह है, कि इन कारोबारों को शुरू करने के लिए आपको काफी अधिक पूंजी की आवश्यकता नहीं है।

गोबर से निर्मित धूपबत्ती

गोबर से तैयार की गई धूपबत्ती इस समय बाजार में आम धूपबत्तियों और अगरबत्तियों से कहीं अधिक बिकती हैं। दरअसल, गाय के गोबर को काफी ज्यादा पवित्र माना जाता है, इसका उपयोग हिंदू धर्म को मानने वाले लोग अपनी पूजा पाठ वाली जगह पर भी करते हैं। यही कारण है, कि गाय के गोबर से निर्मित अगरबत्ती बाजार में बड़ी ही तीव्रता से बिक रही है। सबसे खास बात यह है, कि बिजनेस आप बड़ी सुगमता से घर पर भी चालू कर सकते हैं।

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गोबर से निर्मित दिये

धूपबत्ती की भांति इस समय गोबर से निर्मित दिये भी बाजार में अत्यधिक बिक रहे हैं। सबसे खास बात यह है, कि गोबर से निर्मित दिये भारत के अलावा विदेशों में भी ऑनलाइन माध्यम से बिक रहे हैं। इस व्यवसाय को भी आप सहजता से अपने घर में ही चालू कर सकते हैं। इसके लिए आपको सर्व प्रथम गाय के गोबर को सुखा कर उसका पाउडर बना लेना है, उसके पश्चात उसमें गोंद मिलाकर दिये के शेप में उसे ढाल लेना है। दो चार दिनों तक के लिए उसको धूप में रख कर सुखाने के पश्चात आप सहजता से उत्तम कीमत पर उसकी बाजार में बिक्री कर सकते हैं।

गोबर से निर्मित गमलों का व्यवसाय

जैसा कि हम जानते हैं, कि बारिश का मौसम चल रहा है, ऐसे में गमलों की मांग काफी ज्यादा है। लोग अब हरियाली की तरफ दौड़ रहे हैं। इस गमले की सबसे मुख्य बात यह है, कि इसमें पौधे बड़ी ही तीव्रता से बड़े होते हैं और जब ये गमला गलने लगता है, तो उसे खाद के रूप में भी उपयोग कर लिया जाता है। यही कारण है, कि फिलहाल बाजार में इसकी मांग काफी बढ़ गई है। इस प्रकार के गमले इस समय बाजार में 50 से 100 रुपये के बिक रहे हैं।

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गोकाष्ठ लकड़ी का व्यवसाय

गोकाष्ठ एक ऐसी वस्तु है, जिसका उपयोग दाह संस्कार में किया जाता है। दरअसल, हिंदू धर्म में जब कोई इंसान मरता है, तो उसका दाह संस्कार किया जाता है। मतलब की उसके शरीर को जलाया जाता है। अब ऐसी स्थिति में इस क्रिया के लिए लकड़ियों की काफी जरूरत होती है। इसी कारण से प्रति वर्ष लाखों वृक्ष कट जाते हैं। परंतु, यदि ये क्रिया गोकाष्ठ से होने लगे तो धरती के लाखों वृक्ष प्रति वर्ष बच जाएंगे। सबसे खास बात यह है, कि गोष्ठ बनाने हेतु आप 50000 तक में एक मशीन ला सकते हैं और फिर उससे अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

गोबर से खाद का व्यवसाय

गोबर एक प्रकार का जैविक खाद है। गांवों में आज भी किसान गोबर का उपयोग खाद के तौर पर करते हैं। यदि आप इस चीज का व्यवसाय चालू करते हैं, तो देखते ही देखते कुछ ही दिनों में आप धनी बन सकते हैं। दरअसल, इस समय शहरों के अंदर लोग अपनी बालकनी को गमलों से भर रहे हैं। साथ ही, उन गमलों में लगे पौधों को बड़ा करने हेतु वह जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। इस वजह से यदि आप इस व्यवसाय में दांव लगाते हैं, तो निश्चित तौर पर आप सफल रहेंगे।