सोनालीका ट्रैक्टर्स: ‘जीतने का दम’ के 30 साल और एक प्रेरणादायक भारतीय सफलता गाथा

Published on: 18-Jan-2026

भारतीय कृषि मशीनरी उद्योग में सोनालीका ट्रैक्टर्स आज सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, साहस और किसान-प्रथम सोच का प्रतीक बन चुका है। वर्ष 1996 में पंजाब के होशियारपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर से शुरू हुई यह यात्रा आज 1.1 अरब डॉलर मूल्य की वैश्विक ट्रैक्टर कंपनी में तब्दील हो चुकी है। वर्ष 2026 में सोनालीका किसानों के साथ अपनी साझेदारी के 30 गौरवशाली वर्ष पूरे कर रही है, जो ‘जीतने का दम’ के मूल मंत्र पर आधारित एक असाधारण सफर को दर्शाता है। इन तीन दशकों में सोनालीका ने न केवल भारतीय खेती को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और कृषि नवाचार की पहचान को सशक्त बनाया है।

सोनालीका की यह कहानी किसी कॉरपोरेट बोर्डरूम या मल्टीनेशनल रणनीति से नहीं, बल्कि खेतों की मिट्टी, किसानों की मेहनत और उनकी वास्तविक जरूरतों से जन्मी है। इस असंभव-सी लगने वाली सफलता की नींव रखी श्री एल. डी. मित्तल ने, जिन्होंने एलआईसी से सेवानिवृत्ति के बाद आरामदायक जीवन चुनने की बजाय कुछ नया, सार्थक और राष्ट्रनिर्माण से जुड़ा कार्य करने का संकल्प लिया। उनके इस विजन में उनके दोनों पुत्र, डॉ. ए. एस. मित्तल और डॉ. दीपक मित्तल, पूरी मजबूती से जुड़े। इन तीनों ने भारतीय कृषि की असीम संभावनाओं पर भरोसा करते हुए सोनालीका को एक स्थानीय पहल से वैश्विक ब्रांड तक पहुंचाया।

किसान-प्रथम सोच से बनी एक मजबूत विरासत

सोनालीका की सफलता का मूल आधार हमेशा एक ही रहा है—भारतीय किसान को केंद्र में रखना। कंपनी का स्पष्ट दर्शन रहा कि देश के किसानों को अधिक ताकतवर, भरोसेमंद और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीक मिलनी चाहिए। शुरुआती वर्षों में सोनालीका ने कृषि उपकरणों के निर्माण से अपनी पहचान बनाई, जहां इसके थ्रेशर ने किसानों का भरोसा जीता और खेतों में अपनी उपयोगिता साबित की। किसानों की बढ़ती मांग और जरूरतों को समझते हुए कंपनी ने ट्रैक्टर निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। वर्ष 1996 में, जब भारतीय ट्रैक्टर उद्योग में एक जैसी डिजाइन और सीमित नवाचार देखने को मिलते थे, तब सोनालीका ने अलग रास्ता चुना। कंपनी ने ट्रैक्टरों को भारत की विविध मिट्टी, अलग-अलग फसलों और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया। यही कारण है कि सोनालीका के ट्रैक्टर आज भी अपनी मजबूती, टिकाऊपन और विश्वसनीय परफॉर्मेंस के लिए पहचाने जाते हैं। यह भरोसा इस बात से भी झलकता है कि 30 साल पहले बना पहला सोनालीका ट्रैक्टर आज भी पहले क्रैंक में स्टार्ट हो जाता है।

स्वदेशी निर्माण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार

भारी-भरकम और क्षेत्र-विशेष ट्रैक्टरों की बढ़ती मांग को देखते हुए, सोनालीका ने वर्ष 2011 से वर्टिकल इंटीग्रेशन की रणनीति को अपनाया। इसके तहत कंपनी ने इंजन, ट्रांसमिशन, गियरबॉक्स और अन्य प्रमुख पार्ट्स का इन-हाउस निर्माण शुरू किया। इस कदम ने सोनालीका को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाया और उच्च हॉर्स पावर वाले ट्रैक्टर विकसित करने में मदद की। इतना ही नहीं, एंट्री-लेवल ट्रैक्टरों में भी बड़े इंजन, पावर स्टीयरिंग, ऑयल-इमर्स्ड ब्रेक और मल्टी-स्पीड ट्रांसमिशन जैसे प्रीमियम फीचर्स शामिल किए गए। कंपनी ने क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष ट्रैक्टर भी लॉन्च किए, जैसे दक्षिण भारत के लिए ‘महाबली’, महाराष्ट्र के लिए ‘छत्रपति’ और राजस्थान के लिए ‘महाराजा’। इसके साथ ही 70 से अधिक कृषि उपकरणों की विस्तृत श्रृंखला ने किसानों की उत्पादकता, समय बचत और लागत दक्षता को नई दिशा दी।

वैश्विक मंच पर भारतीय ब्रांड की मजबूत पहचान

सोनालीका की सफलता की कहानी भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2004 में पहला ट्रैक्टर निर्यात करने के बाद, 2011 में सोनालीका यूरोप को ट्रैक्टर निर्यात करने वाली पहली भारतीय ट्रैक्टर ब्रांड बनी। आज कंपनी एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका सहित 150 से अधिक देशों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। वित्त वर्ष 2019 से सोनालीका भारत से ट्रैक्टर निर्यात में लगातार नंबर 1 ब्रांड बनी हुई है। वर्तमान में भारत से निर्यात होने वाला हर तीसरा ट्रैक्टर सोनालीका के होशियारपुर स्थित अत्याधुनिक प्लांट में निर्मित होता है। वैश्विक बाजार में करीब 30% एक्सपोर्ट शेयर के साथ सोनालीका ने यह साबित किया है कि भारतीय ब्रांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता और प्रदर्शन में किसी से कम नहीं हैं।

पारदर्शिता, भरोसा और भविष्य की मजबूत तैयारी

सोनालीका ने ट्रैक्टर उद्योग में पारदर्शिता की एक नई मिसाल पेश की है। वर्ष 2022 में कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर ट्रैक्टरों की कीमतें सार्वजनिक कीं और 2025 में सर्विस व मेंटेनेंस खर्च की जानकारी भी किसानों के लिए उपलब्ध कराई। इस पहल ने किसानों के बीच भरोसे को और मजबूत किया। भविष्य की ओर देखते हुए सोनालीका अपनी उत्पादन क्षमता को 3 लाख ट्रैक्टर प्रति वर्ष तक बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड डायग्नोस्टिक्स और पर्सनलाइज्ड रिटेल अनुभव के माध्यम से कंपनी किसानों के साथ अपने रिश्ते को और गहरा बना रही है। मजबूत नेतृत्व, तकनीकी आत्मनिर्भरता और किसान-प्रथम सोच के साथ सोनालीका के अगले 30 साल भी वैश्विक कृषि मशीनीकरण में भारत की ताकत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प रखते हैं।

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