अगर आप नया ट्रैक्टर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो महिंद्रा, सोनालिका और जॉन डियर तीनों ही ऐसे ब्रांड हैं जिनके अलग-अलग एचपी और उपयोग के अनुसार कई मॉडल बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन केवल ब्रांड का नाम देखकर ट्रैक्टर चुनना सही तरीका नहीं है। ट्रैक्टर का चुनाव करते समय किसान को अपने खेत का आकार, मिट्टी का प्रकार, खेती का काम, इस्तेमाल होने वाले कृषि यंत्र, 2WD या 4WD की जरूरत, हाइड्रोलिक लिफ्टिंग क्षमता, पीटीओ पावर, गियरबॉक्स, ईंधन खपत, सर्विस सुविधा और कुल बजट जैसे पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए। तीनों कंपनियां अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग मॉडल और फीचर्स उपलब्ध कराती हैं। उदाहरण के लिए, महिंद्रा की मौजूदा रेंज में OJA, JIVO, XP PLUS, SP PLUS, YUVO TECH+, ARJUN और NOVO जैसी सीरीज शामिल हैं, जबकि सोनालीका 20 से 120 एचपी तक की रेंज पेश करती है। जॉन डियर की भारतीय रेंज में 5D, 5E, 5M और स्पेशलिटी ट्रैक्टर शामिल हैं।
महिंद्रा ट्रैक्टर भारतीय बाजार में अलग-अलग हॉर्स पावर और कृषि उपयोग के अनुसार विस्तृत मॉडल रेंज उपलब्ध कराता है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर OJA, YUVRAJ, JIVO, XP PLUS, SP PLUS, YUVO TECH+, ARJUN और NOVO जैसे ब्रांड/सीरीज दिखाई गई हैं। इनमें छोटे खेतों और विशेष कृषि कार्यों के लिए कॉम्पैक्ट मॉडल से लेकर अधिक हॉर्स पावर वाले भारी कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर शामिल हैं। महिंद्रा की वेबसाइट पर ट्रैक्टरों को 2WD और 4WD के आधार पर भी देखा जा सकता है, जिससे किसान अपने खेत और उपयोग के अनुसार मॉडल चुन सकते हैं।
महिंद्रा की XP PLUS और SP PLUS जैसी सीरीज में 36 से 50 एचपी श्रेणी के कई मॉडल उपलब्ध हैं। वहीं YUVO TECH+ में भी 36 से 50 एचपी श्रेणी के कई मॉडल मिलते हैं और कुछ मॉडल 4WD विकल्प में उपलब्ध हैं। इसका मतलब है कि किसान को एक ही ब्रांड के अंदर अलग-अलग इंजन पावर, ड्राइव और उपयोग के अनुसार विकल्प मिल सकते हैं।
महिंद्रा की OJA सीरीज हल्के 4WD ट्रैक्टरों पर केंद्रित है। कंपनी के अनुसार OJA प्लेटफॉर्म में 20 से 70 एचपी तक के विभिन्न प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं और 4WD को इसकी प्रमुख विशेषता के रूप में पेश किया गया है। भारत में लॉन्च किए गए OJA मॉडल 20 से 40 एचपी के कॉम्पैक्ट और स्मॉल-यूटिलिटी सेगमेंट को कवर करते हैं।
सोनालीका की आधिकारिक जानकारी के अनुसार कंपनी 20 से 120 एचपी तक की ट्रैक्टर रेंज उपलब्ध कराती है। कंपनी अपनी रेंज को अलग-अलग क्षेत्रीय और कृषि जरूरतों के अनुसार तैयार करने की बात कहती है। सोनालीका के पोर्टफोलियो में सामान्य खेती से लेकर भारी कृषि और ढुलाई के लिए अलग-अलग मॉडल मौजूद हैं। इसलिए यदि किसान का काम हल्की जुताई से लेकर भारी इंप्लीमेंट संचालन तक फैला हुआ है, तो मॉडल चुनते समय केवल एचपी नहीं बल्कि ट्रांसमिशन, टॉर्क और हाइड्रोलिक लिफ्ट क्षमता को भी देखना जरूरी है।
सोनालीका के कई मॉडलों में अपेक्षाकृत अधिक टॉर्क और हाइड्रोलिक लिफ्ट क्षमता पर जोर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर कंपनी के गोल्ड सीरीज मॉडल में 16F+4R Constant Mesh ट्रांसमिशन और 2000 किलोग्राम लिफ्टिंग क्षमता जैसे फीचर्स बताए गए हैं, जबकि कुछ अधिक शक्तिशाली मॉडल में 2200 किलोग्राम तक की लिफ्टिंग क्षमता और अलग ट्रांसमिशन विकल्प दिए गए हैं।
सोनालीका की टाइगर सीरीज में भी अलग-अलग एचपी श्रेणियों के मॉडल उपलब्ध हैं। किसान यदि रोटावेटर, कल्टीवेटर, एमबी प्लाऊ, थ्रेशर या अन्य भारी कृषि यंत्रों का नियमित इस्तेमाल करता है, तो उसे संबंधित मॉडल की पीटीओ पावर, अधिकतम टॉर्क और हाइड्रोलिक क्षमता को जरूर देखना चाहिए। केवल ट्रैक्टर का एचपी अधिक होना ही किसी विशेष उपकरण के लिए पर्याप्त होने की गारंटी नहीं देता।
जॉन डियर की भारतीय ट्रैक्टर रेंज में 5D सीरीज 36 से 55 एचपी तक और 5E सीरीज 50 से 74 एचपी तक उपलब्ध है। कंपनी के अनुसार 5D सीरीज को कृषि कार्यों और हैवी-ड्यूटी हॉलेज दोनों के लिए उपयोगी बनाया गया है, जबकि 5E सीरीज बड़े आकार के कृषि उपकरणों और भारी कार्यों के लिए डिजाइन की गई है। इसके अलावा कंपनी की स्पेशलिटी रेंज 28 से 35 एचपी के संकरे आकार वाले ट्रैक्टरों पर केंद्रित है, जिनका उपयोग बागवानी, इंटरकल्चर और पडलिंग जैसे विशेष कार्यों में किया जा सकता है।
जॉन डियर 5D सीरीज में 5045D और 5050D जैसे मॉडल 2WD और 4WD दोनों विकल्पों में उपलब्ध हैं। कंपनी के अनुसार 5050D में 50 एचपी इंजन, 8+4 कॉलरशिफ्ट ट्रांसमिशन तथा सिंगल/डुअल क्लच और अलग पीटीओ विकल्प मिलते हैं। 5050D GearPro में 12+4 ट्रांसमिशन दिए गए हैं। 5D सीरीज में गियरबॉक्स टॉप-शाफ्ट लुब्रिकेशन, पिस्टन स्प्रे कूलिंग जेट और रियर ऑयल एक्सल जैसे फीचर्स भी कंपनी द्वारा बताए गए हैं।
ट्रैक्टर चुनने में सबसे पहले एचपी कैटेगरी तय करना जरूरी है। यदि किसान के पास छोटा खेत है और मुख्य रूप से हल्के कृषि यंत्रों का इस्तेमाल होता है, तो बहुत अधिक एचपी वाले ट्रैक्टर की जरूरत हमेशा नहीं होती। दूसरी तरफ, यदि खेती बड़े क्षेत्र में होती है और रोटावेटर, एमबी प्लाऊ, भारी कल्टीवेटर, बेलर या अन्य बड़े उपकरणों का इस्तेमाल नियमित रूप से किया जाता है, तो अधिक पावर वाले ट्रैक्टर पर विचार किया जा सकता है।
महिंद्रा, सोनालीका और जॉन डियर तीनों ही कंपनियां लगभग समान एचपी श्रेणियों में अलग-अलग मॉडल देती हैं। इसलिए उदाहरण के लिए यदि किसान 45–50 एचपी ट्रैक्टर देख रहा है, तो केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि तीनों में से किसका एचपी ज्यादा है। संबंधित मॉडल का इंजन टॉर्क, पीटीओ एचपी, ट्रांसमिशन, हाइड्रोलिक क्षमता और वजन भी देखना चाहिए। जॉन डियर की 5D सीरीज में 46 और 50 एचपी मॉडल उपलब्ध हैं, जबकि महिंद्रा की XP PLUS, SP PLUS और YUVO TECH+ रेंज में 36–50 एचपी श्रेणी के कई मॉडल मौजूद हैं। सोनालीका भी इस सेगमेंट में कई मॉडल उपलब्ध कराती है।
ट्रांसमिशन ट्रैक्टर के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि किसान का काम मुख्य रूप से जुताई और कम गति वाले कृषि कार्यों पर आधारित है, तो उसे ऐसे गियर अनुपात की जरूरत होती है जिससे उपकरण के अनुसार उपयुक्त गति मिल सके। वहीं ट्रॉली ढुलाई और सड़क पर परिवहन के लिए अलग गति की आवश्यकता हो सकती है।
महिंद्रा, सोनालीका और जॉन डियर अलग-अलग मॉडल में Constant Mesh, Collar Shift, Side Shift, Synchro और अन्य ट्रांसमिशन विकल्प देते हैं। उदाहरण के तौर पर सोनालीका के कुछ मॉडलों में 16F+4R Constant Mesh जैसे विकल्प मिलते हैं, जबकि जॉन डियर 5D में 8+4 और 12+4 कॉलरशिफ्ट ट्रांसमिशन उपलब्ध हैं। महिंद्रा की अलग-अलग सीरीज में भी मॉडल के अनुसार अलग गियरबॉक्स विकल्प मिलते हैं। इसलिए किसान को अपने रोजाना के काम के आधार पर गियरबॉक्स चुनना चाहिए।
यदि आप रोटावेटर, एमबी प्लाऊ, हैवी कल्टीवेटर या अन्य भारी इंप्लीमेंट इस्तेमाल करते हैं, तो हाइड्रोलिक लिफ्टिंग क्षमता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कृषि उपकरण का वजन और ट्रैक्टर की लिफ्ट क्षमता एक-दूसरे के अनुरूप होना जरूरी है।
सोनालीका की आधिकारिक वेबसाइट पर उसके कुछ मॉडल में 2000 किलोग्राम और 2200 किलोग्राम तक की लिफ्टिंग क्षमता बताई गई है। महिंद्रा की अलग-अलग सीरीज और जॉन डियर के विभिन्न मॉडल में भी हाइड्रोलिक क्षमता मॉडल के अनुसार बदलती है। इसलिए केवल ब्रांड के आधार पर तुलना करने के बजाय जिस मॉडल को खरीदना है, उसी मॉडल की वास्तविक लिफ्टिंग क्षमता और इंप्लीमेंट की आवश्यकता की तुलना करना अधिक उपयोगी होगा।
ट्रैक्टर खरीदते समय 2WD और 4WD का चुनाव खेत की परिस्थितियों के आधार पर करना चाहिए। सामान्य समतल जमीन और नियमित कृषि कार्यों के लिए 2WD मॉडल पर्याप्त हो सकता है, जबकि अधिक ट्रैक्शन की जरूरत वाले कार्यों, गीली जमीन, कठिन परिस्थितियों या कुछ विशेष कृषि कार्यों में 4WD विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
महिंद्रा OJA में 4WD को प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषता के रूप में पेश किया गया है। महिंद्रा की अन्य सीरीज में भी 2WD और 4WD दोनों तरह के विकल्प मौजूद हैं। जॉन डियर 5D सीरीज के 5045D और 5050D जैसे मॉडल भी 2WD और 4WD में उपलब्ध हैं। इसलिए किसान को अपने खेत की मिट्टी, पानी की स्थिति, इंप्लीमेंट और सालाना उपयोग के आधार पर ड्राइव विकल्प चुनना चाहिए।
रोटावेटर, थ्रेशर, रीपर, मल्चर और दूसरे पीटीओ संचालित उपकरण इस्तेमाल करने वाले किसानों के लिए पीटीओ पावर महत्वपूर्ण है। केवल इंजन की एचपी देखकर ट्रैक्टर खरीदना सही नहीं है, क्योंकि अलग-अलग मॉडल में पीटीओ आउटपुट अलग हो सकता है।
यदि आपका मुख्य काम रोटावेटर या थ्रेशर चलाना है, तो संबंधित उपकरण की पावर आवश्यकता को पहले देखें और फिर ट्रैक्टर की पीटीओ पावर से उसका मिलान करें। इसी तरह भारी उपकरण के लिए हाइड्रोलिक लिफ्टिंग क्षमता भी देखनी चाहिए। इस तरह इंजन पावर, पीटीओ पावर और हाइड्रोलिक क्षमता को एक साथ देखकर निर्णय लेना अधिक व्यावहारिक रहता है।
किसी भी ट्रैक्टर का वास्तविक माइलेज केवल कंपनी के इंजन स्पेसिफिकेशन से तय नहीं होता। मिट्टी की स्थिति, खेत की गहराई, ट्रैक्टर पर लोड, इंप्लीमेंट का आकार, इंजन आरपीएम, टायर प्रेशर और ऑपरेटर की ड्राइविंग शैली जैसे कई कारक डीजल खपत को प्रभावित करते हैं।
इसलिए महिंद्रा, सोनालीका और जॉन डियर में से किसी एक ब्रांड को केवल कथित माइलेज के आधार पर चुनने के बजाय किसान को अपने वास्तविक कृषि कार्य में प्रति घंटे ईंधन खर्च पर ध्यान देना चाहिए। यदि संभव हो, तो समान एचपी वाले संबंधित मॉडलों को एक जैसे कृषि कार्य में चलाकर स्थानीय किसानों और डीलर से वास्तविक उपयोग की जानकारी लेना अधिक उपयोगी हो सकता है।
ट्रैक्टर खरीदना केवल इंजन और कीमत का फैसला नहीं है। ट्रैक्टर कई वर्षों तक इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए सर्विस सेंटर, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और स्थानीय डीलर सपोर्ट भी महत्वपूर्ण हैं। किसी ब्रांड का राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा नेटवर्क होना उपयोगी है, लेकिन आपके गांव या खेत के आसपास वास्तविक सर्विस सुविधा अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
महिंद्रा, सोनालीका और जॉन डियर सभी अपने-अपने डीलर और सर्विस नेटवर्क उपलब्ध कराते हैं। जॉन डियर अपनी वेबसाइट पर डीलर लोकेटर और सर्विस सपोर्ट की जानकारी देता है, जबकि महिंद्रा और सोनालीका भी अपनी वेबसाइट पर मॉडल और डीलर संबंधी जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
ट्रैक्टर की खरीद कीमत के साथ-साथ वारंटी और रखरखाव की शर्तों को भी समझना चाहिए। जॉन डियर के अनुसार भारत में उसके ट्रैक्टरों पर 5 वर्ष की वारंटी उपलब्ध है और 5D सीरीज के लिए कंपनी 5 वर्ष या 5000 घंटे की वारंटी बताती है। महिंद्रा अपनी वेबसाइट पर वर्तमान में 6-वर्ष की वारंटी को अपनी प्रमुख आफ्टर-सेल्स विशेषताओं में सूचीबद्ध करता है, हालांकि वास्तविक वारंटी मॉडल और शर्तों के अनुसार जांची जानी चाहिए।
सोनालीका भी अपने अलग-अलग मॉडल के लिए वारंटी और सर्विस संबंधी जानकारी उपलब्ध कराती है। इसलिए किसान को खरीदारी के समय वारंटी की अवधि के साथ यह भी देखना चाहिए कि इसमें कौन-कौन से पार्ट्स शामिल हैं, सर्विस इंटरवल क्या है और वारंटी किन परिस्थितियों में लागू होती है।
ट्रैक्टर की कीमत मॉडल, एचपी, 2WD/4WD, ट्रांसमिशन, टायर, हाइड्रोलिक्स और अतिरिक्त फीचर्स के अनुसार बदलती है। इसलिए महिंद्रा, सोनालीका और जॉन डियर की तुलना करते समय एक ही एचपी श्रेणी और समान ड्राइव कॉन्फिगरेशन वाले मॉडल की तुलना करनी चाहिए।
उदाहरण के लिए, 50 एचपी के 2WD ट्रैक्टर और 50 एचपी के 4WD ट्रैक्टर की कीमत और उपयोग अलग हो सकता हैं। इसी तरह बेस मॉडल और अधिक गियर/हाइड्रोलिक/पीटीओ सुविधाओं वाले मॉडल में भी कीमत का अंतर हो सकता है। सोनालीका अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कई ट्रैक्टर मॉडलों की कीमत ऑनलाइन दिखाती है, जबकि महिंद्रा और जॉन डियर भी अपने मॉडल और डीलर संबंधी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराते हैं।
महिंद्रा चुनते समय किसान इसकी विस्तृत मॉडल रेंज, 2WD/4WD विकल्प, अलग-अलग सीरीज और आधुनिक OJA जैसी तकनीक-आधारित रेंज को ध्यान में रख सकता है। खासकर जिन किसानों को अलग-अलग एचपी और उपयोग के लिए एक बड़े पोर्टफोलियो में विकल्प चाहिए, उनके लिए मॉडल-टू-मॉडल
ट्रैक्टर खरीदने से पहले किसान को सबसे पहले अपनी कुल खेती योग्य जमीन और सालाना उपयोग के घंटे का अनुमान लगाना चाहिए। इसके बाद यह देखना चाहिए कि ट्रैक्टर से मुख्य रूप से कौन-कौन से काम लिए जाएंगे। यदि रोटावेटर और भारी इंप्लीमेंट ज्यादा चलाने हैं, तो पीटीओ पावर और हाइड्रोलिक क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि खेत में ट्रैक्शन की समस्या है, तो 4WD मॉडल पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद इंजन टॉर्क, ट्रांसमिशन, गियर संख्या, टायर साइज और फ्यूल टैंक की क्षमता देखनी चाहिए। अंत में स्थानीय डीलर की दूरी, सर्विस सुविधा, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, वारंटी और कुल ऑन-रोड कीमत की तुलना करनी चाहिए।
मेरीखेति प्लेटफॉर्म आपको खेती-बाड़ी से जुड़ी सभी ताज़ा जानकारियां उपलब्ध कराता रहता है। इसके माध्यम से ट्रैक्टरों के नए मॉडल, उनकी विशेषताएँ और खेतों में उनके उपयोग से संबंधित अपडेट नियमित रूप से साझा किए जाते हैं। साथ ही मैसी फर्ग्यूसन, आयशर, जॉन डियर, न्यू हॉलैंड और सोनालीका ट्रैक्टर जैसी प्रमुख कंपनियों के ट्रैक्टरों की पूरी जानकारी भी यहां प्राप्त होती है।