सरसों की अगेती बुवाई शुरू: सरसों की उन्नत किस्में देंगी 35 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज

Published on: 06-Oct-2025
Updated on: 06-Oct-2025

IARI की सिफारिश – अगेती बुवाई से अधिक तेल व उपज का मौका

Mustard Farming Update: जैसे-जैसे शरद ऋतु की ठंडक महसूस होने लगी है, किसानों के लिए सरसों की बुवाई का सुनहरा समय आ गया है। सरसों न केवल एक प्रमुख तिलहनी फसल है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। यह फसल किसानों को तेल उत्पादन, खली (पशु चारा), और निर्यात के रूप में कई स्रोतों से आय प्रदान करती है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने इस समय किसानों को अगेती बुवाई (Early Sowing) शुरू करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जो किसान 10 से 30 अक्टूबर के बीच बुवाई करते हैं, वे 30–35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज प्राप्त कर सकते हैं। सही बीज, उचित नमी और तकनीकी प्रबंधन इस अधिक उत्पादन का आधार बनते हैं।

अगेती बुवाई का सही समय और फायदे

सरसों की बुवाई के लिए 10 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक का समय सबसे उपयुक्त माना गया है। इस अवधि में बुवाई करने से पौधों की वृद्धि मजबूत होती है, ठंड और रोगों का असर कम होता है, तथा फसल समय पर पककर बाजार में जल्दी आ जाती है।

जल्दी पकने वाली फसल का एक बड़ा लाभ यह है कि किसान इसे बेचकर अगली रबी फसल के लिए समय से भूमि तैयार कर सकते हैं।

यदि बुवाई में देरी की जाती है, तो पौधे कमजोर होते हैं, फूल झड़ने की समस्या बढ़ती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।

कम एरोसिक एसिड वाली सरसों की उन्नत किस्में (Low Erucic Acid Mustard Varieties)

आज के समय में स्वास्थ्य और गुणवत्ता दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए IARI ने ऐसी सरसों की किस्में विकसित की हैं जिनमें एरोसिक एसिड की मात्रा 2% से भी कम होती है, जिससे तेल हृदय के लिए सुरक्षित और बेहतर होता है।

मुख्य किस्में:

  • पूसा करिश्मा – पहली लो एरोसिक किस्म, उच्च तेल मात्रा और बेहतर उपज क्षमता।
  • पूसा सरसों 21, 22, 24, 29 – ऊंचे पौधे, मजबूत तना, और देरी से पकने के बावजूद स्थिर उपज।
  • पूसा सरसों 30 – मोटे दाने वाली यह किस्म 30–35 क्विंटल/हेक्टेयर तक उत्पादन देती है।
  • पूसा सरसों 32 – 140–145 दिनों में तैयार, उपज क्षमता 32–35 क्विंटल/हेक्टेयर तक।
  • डबल जीरो सरसों – तेल के साथ खली भी सुरक्षित, पोल्ट्री फीड के लिए उपयोगी।

तेल और खली दोनों से लाभ – डबल जीरो सरसों की किस्में (Double Zero Mustard Varieties)

जो किसान तेल उत्पादन के साथ-साथ खली का व्यवसाय करना चाहते हैं, उनके लिए डबल जीरो किस्में सबसे उपयुक्त हैं। इन किस्मों में एरोसिक एसिड 2% से कम और ग्लूकोसिनोलेट्स 30 ppm से कम होते हैं। इससे खली पोल्ट्री फीड के रूप में सुरक्षित हो जाती है और किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलता है।

मुख्य किस्में:

पूसा डबल जीरो 31 – लगभग 140–145 दिनों में तैयार, 28–32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज।

नई पूसा डबल जीरो (2025) – नवीनतम किस्म, 140 दिनों में तैयार और 32–34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज क्षमता।

इन डबल जीरो किस्मों की मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि पोल्ट्री उद्योग में इनकी खली का उपयोग तेजी से हो रहा है। इससे किसानों को पारंपरिक तेल विक्रय के अलावा अतिरिक्त लाभ के अवसर मिल रहे हैं।

सामान्य लेकिन भरोसेमंद किस्में (For Small and Limited Resource Farmers)

अगर आपके पास सिंचाई संसाधन सीमित हैं या खेती छोटे पैमाने पर कर रहे हैं, तो IARI की पारंपरिक लेकिन भरोसेमंद किस्में भी एक अच्छा विकल्प हैं।

लोकप्रिय किस्में:

  • पूसा बोल्ड – मोटा दाना, अच्छी गुणवत्ता और लगातार स्थिर उत्पादन।
  • पूसा जय किसान और पूसा जगन्नाथ – अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में भी सफल।
  • पूसा विजय – 145 दिनों में पकने वाली उच्च उपज वाली नई किस्म, उत्पादन क्षमता 32–36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।

बीज चयन से पहले किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  •  हमेशा प्रमाणित बीज का ही उपयोग करें।
  •  बीज किसी सरकारी कृषि केंद्र, ICAR संस्थान या अधिकृत विक्रेता से ही लें।
  •  बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशी या जैविक एजेंट से उपचारित करना न भूलें।
  •  खेत की गहरी जुताई करें और जल निकास व्यवस्था दुरुस्त रखें।
  •  संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का उपयोग करें।

किसानों के लिए विशेषज्ञ सलाह

जो किसान सरसों की खेती शुरू कर रहे हैं, उन्हें अपने क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और सिंचाई व्यवस्था के अनुसार किस्म का चयन करना चाहिए। इसके लिए निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या राज्य कृषि विभाग से सलाह लेना उचित रहेगा।

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक बुवाई पूरी कर लेने पर फसल का अंकुरण बेहतर होता है और सर्दी की शुरुआत में पौध मजबूत बनता है। नवंबर के बाद बुवाई करने से अंकुरण प्रभावित हो सकता है और उत्पादन घट सकता है।

समय पर बुवाई और उन्नत किस्में – सफलता की कुंजी

सरसों की अगेती बुवाई केवल फसल की शुरुआत नहीं, बल्कि पूरे सीजन की सफलता का आधार होती है। यदि किसान IARI द्वारा अनुशंसित उन्नत किस्में अपनाकर 10 से 30 अक्टूबर के बीच बुवाई करते हैं, तो वे 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज प्राप्त कर सकते हैं।

इस प्रकार, सही किस्म का चयन, वैज्ञानिक तकनीक और समय पर बुवाई मिलकर किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर तेल गुणवत्ता और अतिरिक्त बाजार लाभ दिला सकती है। 

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