न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद: तूअर, उड़द और मूंग सहित 6 प्रमुख फसलों की खरीद को मिली मंजूरी

Published on: 26-Sep-2025
Updated on: 26-Sep-2025

किसानों को मिलेगा 13,890 करोड़ रुपए का सीधा लाभ

देशभर के किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के लिए दलहन और तिलहन की 6 प्रमुख फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से किसानों को लगभग 13,890.60 करोड़ रुपए का सीधा आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में यह योजना किसानों की आय को नई मजबूती देने वाली साबित होगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक में यह घोषणा की। बैठक में उत्तर प्रदेश और गुजरात के कृषि मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस खरीफ सीजन में दलहन और तिलहन की खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए लाभ

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए केंद्र ने यहां दलहन और तिलहन की भारी मात्रा में खरीद को हरी झंडी दी है। राज्य में उड़द, तूअर, मूंग, तिल और मूंगफली जैसी फसलों की सरकारी खरीद होगी।

इस मंजूरी के अंतर्गत उड़द की 2,27,860 मीट्रिक टन तक खरीद की जाएगी, जिस पर लगभग 1,777.30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसी तरह तूअर की 1,13,780 मीट्रिक टन खरीद होगी, जिसके लिए 910.24 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। मूंग की खरीदी 1,983 मीट्रिक टन होगी, जिस पर 17.38 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वहीं तिल की 30,410 मीट्रिक टन तक खरीद की जाएगी, जिस पर लगभग 299.42 करोड़ रुपए का व्यय होगा। इसके अतिरिक्त मूंगफली की 99,438 मीट्रिक टन खरीदी के लिए 722.22 करोड़ रुपए की राशि तय की गई है।

उत्तर प्रदेश के किसानों को सबसे बड़ी राहत यह है कि तूअर और उड़द जैसी दलहनी फसलों की 100% खरीद सुनिश्चित की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि जो भी किसान इन फसलों का उत्पादन करेंगे, वे अपने उत्पाद को सीधे MSP पर बेच पाएंगे।

गुजरात के किसानों के लिए बड़ी राहत

गुजरात में भी किसानों को इस योजना से बड़ा लाभ मिलने वाला है। राज्य में विशेष रूप से मूंगफली की भारी मात्रा में खरीदी स्वीकृत की गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी सरकारी खरीद मानी जा रही है।

गुजरात में उड़द की 47,780 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर 372.68 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मूंग की 4,415 मीट्रिक टन तक खरीद होगी, जिसमें 38.71 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। सोयाबीन की खरीदी 1,09,905 मीट्रिक टन तक होगी, जिस पर 585.57 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सबसे अहम बात यह है कि मूंगफली की 12,62,163 मीट्रिक टन तक की ऐतिहासिक खरीदी स्वीकृत की गई है, जिस पर 9,167.08 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है। यह फैसला गुजरात के किसानों के लिए सीधा आर्थिक वरदान साबित होगा।

पारदर्शी और डिजिटल खरीद प्रक्रिया

केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और सुरक्षित बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि बिचौलियों को किसी भी तरह से इस प्रणाली में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। किसानों का पंजीकरण केवल उन्हीं के लिए किया जाएगा जिन्होंने वास्तव में दलहन और तिलहन की खेती की है।

इसके लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और POS मशीनों की तैनाती की जाएगी। उत्तर प्रदेश में खरीफ 2025–26 की खरीद के लिए 350 केंद्र बनाए जाएंगे जबकि गुजरात में 400 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पंजीकरण और खरीद की पूरी प्रक्रिया ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति पोर्टलों के माध्यम से होगी। संचालन का जिम्मा NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय एजेंसियों को दिया गया है।

सबसे अहम बात यह है कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। यह पूरी प्रणाली डिजिटल फसल खरीद योजना 2025 का हिस्सा है, जिससे किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से MSP का पूरा लाभ मिल सकेगा।

फसल खरीद में संशोधन की गुंजाइश

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि खरीदी की मात्रा को प्रथम अग्रिम उत्पादन अनुमान के आधार पर भविष्य में घटाया या बढ़ाया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पात्र किसान MSP लाभ से वंचित न रह जाए।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम

दलहन और तिलहन की मांग लगातार बढ़ रही है, और ऐसे समय में MSP पर सीधी खरीद किसानों की आय को मजबूत करने वाला कदम साबित होगी। इससे न केवल किसानों को फसल की सही कीमत मिलेगी, बल्कि देश में दलहन और तिलहन की आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

इस योजना से लाखों किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, विशेष रूप से वे छोटे और मध्यम किसान जो अक्सर बाजार में उचित दाम नहीं पाते। अब उन्हें अपनी उपज को सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने का भरोसा मिलेगा।

सक्षेप में कहा जाए तो खरीफ 2025–26 के लिए केंद्र सरकार का यह कदम किसानों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत प्रदान करेगा। दलहन और तिलहन की MSP पर खरीद से न केवल किसानों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि देश के खाद्य सुरक्षा मिशन को भी मजबूती मिलेगी।

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