राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन - रबी अभियान 2025: 3 अक्टूबर से शुरू होगा 'विकसित कृषि संकल्प अभियान'

Published on: 20-Sep-2025

रबी सीजन 2025-26 के लिए 362.50 मिलियन टन उत्पादन लक्ष्य निर्धारित

भारत सरकार ने आगामी रबी सीजन 2025-26 के लिए 362.50 मिलियन टन कृषि उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह घोषणा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन रबी अभियान 2025 के समापन सत्र में की।

यह सम्मेलन राजधानी दिल्ली में दो दिनों तक आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के कृषि मंत्रियों, कृषि वैज्ञानिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था – रबी फसलों के उत्पादन में वृद्धि करने की रणनीति बनाना और किसानों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का समाधान निकालना।

विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप नई पहल

समापन भाषण में चौहान ने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य है कि “विकसित भारत@2047” की परिकल्पना को कृषि क्षेत्र के माध्यम से साकार किया जाए। इसी दिशा में, आगामी 3 अक्टूबर 2025 से “विकसित कृषि संकल्प अभियान” शुरू किया जाएगा।

इस अभियान को उन्होंने “लैब से लैंड” यानी वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुँचाने की ठोस पहल बताया। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत बीजों और नई तकनीकों से जोड़ना है, ताकि उत्पादकता में तेजी से वृद्धि हो सके।

बीज, खाद और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर

मंत्री चौहान ने स्पष्ट किया कि रबी सीजन में किसानों को बीज, खाद और कीटनाशकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नकली और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों की बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कड़े कानूनों के माध्यम से ऐसे अनैतिक कारोबारियों पर कार्रवाई करेंगी, जो किसानों का शोषण करते हैं। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और उन्हें सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध होगी।

किसानों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता

चौहान ने कहा कि किसानों को समय पर मदद और न्याय दिलाने के लिए राज्यों में प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना जरूरी है। उन्होंने किसानों से जुड़े कॉल सेंटरों को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान तुरंत हो सके। सरकार चाहती है कि किसान केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि कृषि कार्यों में विश्वास और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का विस्तार

केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के दायरे को तेजी से बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ना आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं, मौसम की मार या फसल क्षति की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। बीमा कवरेज बढ़ने से किसान जोखिम उठाने में सक्षम होंगे और नई तकनीकें अपनाने के लिए उत्साहित होंगे।

कृषि विज्ञान केंद्रों और विस्तार सेवाओं को मिलेगा सशक्तिकरण

मंत्री ने इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और राज्य कृषि विस्तार सेवाओं को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ये संस्थान किसानों तक वैज्ञानिक शोध, नई तकनीकों और फसल प्रबंधन की उपयोगी जानकारी पहुँचाने का मुख्य माध्यम हैं। यह पहल किसानों को जल संरक्षण, जैविक खेती, उन्नत बीज चयन, फसल विविधीकरण और आधुनिक उपकरणों के उपयोग के प्रति जागरूक करेगी।

केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को प्राथमिकता

सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी सहमति बनी। चौहान ने राज्यों से आग्रह किया कि वे “विकसित कृषि संकल्प अभियान” को एक जन आंदोलन के रूप में अपनाएं और इसकी पहुंच गांव-गांव तक सुनिश्चित करें। इस अभियान में पंचायत स्तर पर कार्यशालाएं, किसान प्रशिक्षण शिविर और तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान नई विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार और किसानों के प्रति प्रतिबद्धता

सम्मेलन के समापन पर चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का किसानों के प्रति समर्पण और “विकसित भारत” का विजन ही कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने यह भी अपील की कि सभी हितधारक जीएसटी जैसे सुधारों का लाभ गांवों तक पहुँचाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

किसानों की आय वृद्धि और आत्मनिर्भर कृषि की ओर कदम

केंद्रीय कृषि मंत्री ने आशा जताई कि इस सम्मेलन में हुई चर्चाओं और रणनीतियों के आधार पर आगामी रबी सीजन में देश कृषि उत्पादन के नए आयाम छुएगा। केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयास से किसानों की आय बढ़ाने का संकल्प मजबूत होगा और भारत कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

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