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केंद्र सरकार की मूंग सहित इन फसलों की खरीद को हरी झंडी, खरीद हुई शुरू

केंद्र सरकार की मूंग सहित इन फसलों की खरीद को हरी झंडी, खरीद हुई शुरू

केंद्र सरकार मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत किसानों से फसलों की ताबड़तोड़ खरीददारी कर रही है। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने जानकारी दी है, कि अब तक केंद्र सरकार 24,000 टन मूंग खरीद चुकी है। इसके साथ ही सरकार आगामी दिनों में 4,00,000 टन खरीफ मूंग की खरीददारी करने जा रही है। इसके लिए सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। सरकार यह 4,00,000 टन खरीफ मूंग उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत 10 राज्यों के किसानों से खरीदेगी।


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अधिकारियों ने बताया है, कि मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) को पूरी तरह से केंद्र सरकार का कृषि मंत्रालय नियंत्रित करता है। कृषि मंत्रालय जब देखता है, कि बाजार में फसलों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे गिर गए हैं, तब कृषि मंत्रालय मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत किसानों से फसलें खरीदना प्रारंभ कर देता है। ताकि किसानों को अपनी फसलों को औने पौने दामों में बेचने पर मजबूर न होना पड़े। यह खरीददारी कृषि मंत्रालय के आधीन आने वाला भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) करता है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल अभी तक 24,000 टन मूंग की खरीदी हो चुकी है, जिसमें से 19,000 टन अकेले कर्नाटक के किसानों से खरीदी गई है। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल पाए। इसके लिए खरीदी प्रक्रिया की हर राज्य में सघनता से जांच की जा रही है। ताकि किसानों को अपनी फसलों को बेचने पर किसी भी प्रकार की परेशानी न होने पाए।


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बकौल कृषि मंत्रालय, मूंग के अलावा 2022-23 खरीफ सत्र में उगाई गई 2,94,000 टन उड़द और 14 लाख टन मूंगफली की भी खरीददारी की जाएगी। कृषि मंत्रालय ने इसकी स्वीकृति भी भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) को भेज दी है। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) ने कृषि मंत्रालय को अपने जवाब में बताया है, कि इस साल अभी तक उड़द और मूंगफली की खरीद नहीं हो सकी है। क्योंकि अभी भी बाजार में इन दोनों फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से बहुत ज्यादा ऊपर चल रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) ने अभी तक जिन फसलों की खरीद की है। उन्हें कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को देना शुरू कर दिया है, ताकि इन फसलों को पीडीएस के माध्यम से खपाया जा सके। इसी तरह अगर खरीफ की फसलों के अंतर्गत आने वाले धान की फसल की बात करें, तो अभी तक भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) के माध्यम से सरकार ने 306.06 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की है। जबकि सरकार का लक्ष्य 775.72 लाख टन धान खरीदने का है।
आखिर किस वजह से NAFED द्वारा कच्चे चना भंडारण हेतु बनाई गई विशेष योजना

आखिर किस वजह से NAFED द्वारा कच्चे चना भंडारण हेतु बनाई गई विशेष योजना

NAFED ने अपने 20% कच्चे चना स्टॉक को चना दाल (चना या बंगाल चना) में परिवर्तित करने और रिटेल बाजार में आपूर्ति करने की योजना तैयार की है। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) ने अपने 20% प्रतिशत कच्चे चना भंडारण को चना दाल (चना या बंगाल चना) में बदलने एवं रिटेल बाजार में सप्लाई करने की योजना निर्मित की है। दो सरकारी अधिकारियों ने कहा है, कि यह विकास ऐसे वक्त में हुआ है, जब सरकार के पास रणनीतिक बफर जरूरत के मुकाबले भारी मात्रा में चना एवं अन्य दालों का कम भंडार है। आज के समय में NAFED के समीप भंडार में तकरीबन 3.6 मिलियन टन (MT) चना है, जिसमें इस वर्ष एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री की तरफ से प्राइस सपोर्ट स्कीम (Price Support Scheme (PSS) के अंतर्गत खरीदा गया 3.3 मिलियन टन शामिल है। रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन के चलते बाजार की कम कीमतों की वजह से पिछले दो सालों में ज्यादा खरीद का परिणाम है।

किसान अपनी उपज नेफेड (NAFED) को बेच रहे हैं

कृषि मंत्रालय की तरफ से खाद्य उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, 2022-23 (जुलाई-जून) में चना का उत्पादन 13.5 मीट्रिक टन होने का अंदाजा लगाया गया है। जो कि पिछले साल के तकरीबन समान है। इस साल भी ज्यादा पैदावार की वजह चना की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,335 प्रति क्विंटल से नीचे बनी हुई हैं। इससे किसान अपनी पैदावार सरकार की खरीद एजेंसी नेफेड को बेचने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे किसानों को काफी अच्छा-खासा लाभ प्राप्त हो रहा है।

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निफेड ने 2.3 मीट्रिक टन के रणनीतिक मानदंड के तुलनात्मक 4.27 मीट्रिक टन का बफर स्टॉक तैयार किया है। इसके अंतर्गत समस्त 5 घरेलू दालों के साथ-साथ आयातित स्टॉक भी शम्मिलित है। बाजार सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के लॉरेंस रोड बाजार में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की कच्चे चने की प्रजातियां 5,100 से 5,125 रुपए प्रति क्विंटल में बिकीं हैं।

दाल में 20% प्रतिशत कच्चा चना परिवर्तित किया जाएगा

एक सरकारी अधिकारी का कहना है, कि 20% कच्चे चना भंडार को दाल में बदलना एक प्रयोग है। कच्चा चना जारी करने के अतिरिक्त नेफेड (NAFED) कच्चे चने को पीसकर दाल के तौर पर जारी करने पर विचार कर रहा है। इसके पश्चात यह राज्यों को जारी किया जाएगा अथवा खुले बाजार में यह अभी तक सुनिश्चित नहीं है। इसे खुले बाजार में विक्रय किया जा सकता है अथवा खुदरा विक्रेताओं को दिया जा सकता है।

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सालभर से दालों का भंडारण नहीं किया गया

सरकार राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अपने भंडार को खत्म करने के लिए करीब एक साल से रियायती दर पर चना दे रही है। क्योंकि दालों को एक साल से ज्यादा समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता है। हाल ही में ग्राहकों के मामलों के विभाग ने लिक्विडेशन को प्रोत्साहित करने के लिए छूट की दर को 8 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 15 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने पिछले वर्ष अगस्त में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 15 लाख टन चना के आवंटन को रियायती दर पर की कई सारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर आवंटित करने की स्वीकृति दी थी।