मैनेजर की नौकरी छोड़ की बंजर जमीन पर खेती, कमा रहे हैं लाखों

Published on: 12-May-2023

पढ़ाई के बाद मैनेजर के रूप में करियर शुरू करने वाले हिमाचल के मनदीप के लिए, खेती की तरफ लौटना उनके लिए एक ऐसे सपने की तरह था इसके बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था, लेकिन कहते हैं ना कभी-कभी कुदरत ही आपके लिए अपने आप कुछ कर देती है और मनदीप वर्मा के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. लगभग 5 साल तक एक जानी-मानी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने के बाद एक दिन अचानक मनदीप वर्मा ने अपने परिवार के साथ अपने शहर सोलर वापस आने का फैसला कर लिया. सोलन लौटकर मनदीप ने कुछ ऐसा किया जो उनके कामकाज और पढ़ाई से मेल नहीं खाता था और वह था घर में अपने बंजर जमीन पर खेती करने के बारे में सोचना. मनदीप वर्मा खेती के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे लेकिन वह एक बात को लेकर एकदम क्लियर थे कि उन्हें किसी भी तरह की परंपरागत खेती नहीं करनी है.  कुछ अलग करने की सोच नहीं उन्हें हॉर्टिकल्चर (Horticulture) की तरफ खींचा. उसके बाद मनदीप शर्मा ने हॉर्टिकल्चर में जो किया उसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। 

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 सबसे पहले मनदीप वर्मा ने अपने आसपास के इलाके के मौसम के बारे में पूरी तरह से जानकारी ली और उसके बाद इस पर खेती करने से पहले अपने एरिया में यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर से मुलाकात की. पूरी तरह से जानकारी मिल जाने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह अपनी जमीन पर कीवी  की खेती करेंगे । मनदीप वर्मा ने बताया कि उन्होंने कीवी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए लाइब्रेरी में काफी समय व्यतीत किया था। उन्होंने कई किताबें पढ़ी और कृषि पर भी विभिन्न प्रोफेसरों से बातचीत की। उन्हें इस जानकारी के बाद कीवी की खेती (Kiwi Farming) शुरू करने का फैसला लिया। 

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 मनदीप वर्मा ने बताया कि उन्होंने सोलन के उद्यानिकी विभाग से बात की थी और 2014 में 14 बीघे की जमीन पर कीवी गार्डन बनाने का काम शुरू किया था। इस गार्डन में उन्होंने कीवी की उन्नत किस्में लगाई थीं। साल 2017 में उन्होंने कीवी की आपूर्ति के लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग शुरू की थी। इस वेबसाइट पर वह फल को कब तोड़ा जाना है, कब उसे डिब्बे में पैक किया जाना है, ऐसी सभी जानकारियां उपलब्ध कराते थे। उनके इन फलों को हैदराबाद, बैंगलोर, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में ऑनलाइन बेचा जाता है। इसके अलावा मनदीप वर्मा ने इस फसल को तैयार करने में ऑर्गेनिक तरीका अपनाया है। इसके लिए खाद आदि उन्होंने खुद ही तैयार किया।

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