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भारतीय ट्रैक्टर उद्योग: 162 देशों में भारतीय ट्रैक्टरों की गूंज, किसानों का बढ़ा भरोसा

Published on: 30-Sep-2025
Updated on: 01-Oct-2025
भारतीय ट्रैक्टर उद्योग
कृषि यंत्र ट्रैक्टर ब्लॉग

भारतीय ट्रैक्टर उद्योग: दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक बनने की ओर 

भारत ने ट्रैक्टर निर्माण और कृषि उपकरण क्षेत्र में पिछले दो दशकों में अद्भुत प्रगति दर्ज की है। कभी केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित रहे भारतीय ट्रैक्टर अब विश्व के 162 देशों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। यह उपलब्धि केवल औद्योगिक विकास का परिणाम नहीं है, बल्कि कड़े उत्सर्जन मानकों को अपनाने और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप खुद को ढालने का भी नतीजा है।

वैश्विक मानकों का पालन और नए अवसर

अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ परिवहन परिषद (ICCT) की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत ने अपने कृषि ट्रैक्टर और निर्माण उपकरण क्षेत्र में वैश्विक उत्सर्जन मानकों को सफलतापूर्वक अपनाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नए द्वार खोल दिए हैं। अमेरिका, यूरोपीय संघ और लैटिन अमेरिका जैसे बड़े बाजारों तक पहुंचना आसान नहीं था, क्योंकि वहां सख्त पर्यावरणीय नियम और टैरिफ संबंधी बाधाएं मौजूद थीं। इसके बावजूद भारतीय निर्माताओं ने अपने उत्पादों को इन मानकों के अनुरूप ढालकर प्रतिस्पर्धी स्थिति हासिल की।

यह रिपोर्ट 2025 में आयोजित भारत स्वच्छ परिवहन शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत की गई। इसमें 2008-09 से 2024-25 तक के निर्यात आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया है। निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीय कंपनियों ने न केवल घरेलू स्तर पर आधुनिक तकनीक अपनाई, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी टिकाऊ विकास की दिशा में एक नई पहचान बनाई है।

यूरोप में भारतीय ट्रैक्टरों की लोकप्रियता

यूरोपीय बाजार भारतीय ट्रैक्टरों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता था, क्योंकि यहां उत्सर्जन नियम बेहद कड़े हैं। लेकिन भारत ने इन नियमों के साथ तालमेल बैठाकर शानदार सफलता हासिल की है। वर्ष 2008-09 में जहां यूरोपीय संघ को ट्रैक्टर निर्यात का मूल्य मात्र 38 मिलियन डॉलर था, वहीं 2024-25 तक यह आंकड़ा बढ़कर 181 मिलियन डॉलर पहुंच गया। यह वृद्धि 11% चक्रवृद्धि वार्षिक दर (CAGR) को दर्शाती है। खासतौर पर बेल्जियम ने एक बड़े बाजार के रूप में उभरते हुए 2024-25 में 28 मिलियन डॉलर के ट्रैक्टर आयात किए, जबकि दो साल पहले इसका स्तर लगभग शून्य था। इस तेज़ी का प्रमुख कारण TREM-IV उत्सर्जन मानकों का क्रियान्वयन रहा, जिसने भारत से बेल्जियम को ट्रैक्टर निर्यात को एक ही वर्ष में लगभग 200 गुना तक बढ़ा दिया।

ब्राजील और अमेरिका: नई ऊंचाइयां और चुनौतियां

भारत ने ब्राजील और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।

ब्राजील: 2017-18 में यहां भारतीय ट्रैक्टरों का निर्यात मात्र 4.5 मिलियन डॉलर था। लेकिन 2024-25 तक यह बढ़कर 88 मिलियन डॉलर हो गया। यह 65% CAGR की अप्रत्याशित वृद्धि है। ब्राजील ने जब MAR-I उत्सर्जन मानकों को अपनाया, तो भारतीय ट्रैक्टर पहले से ही इन मानकों पर खरे उतर रहे थे।

संयुक्त राज्य अमेरिका: अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा ट्रैक्टर निर्यात गंतव्य है, जिसकी 2024-25 में कुल हिस्सेदारी 21% रही। हालांकि, 2023-24 में कुल निर्यात मात्रा में 40% की गिरावट और 2024-25 में 10% की गिरावट देखी गई। इसके बावजूद, टियर 4f मानकों के अनुरूप 18 किलोवाट से कम और 75–130 किलोवाट क्षमता वाले ट्रैक्टरों का निर्यात बढ़ा है। वहीं, 37–75 किलोवाट श्रेणी में मानक अलग होने के कारण हिस्सेदारी कुछ घट गई है।

एशिया, अफ्रीका और नए उभरते बाजार

भारतीय ट्रैक्टर केवल यूरोप और अमेरिका तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि एशिया और अफ्रीका जैसे उभरते बाजारों में भी लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।

  • बांग्लादेश: पिछले 10 वर्षों में 11% वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
  • थाईलैंड: मध्यम आकार के ट्रैक्टरों की मांग ने यहां 16% CAGR की मजबूती दी।
  • दक्षिण अफ्रीका: विशेष रूप से 37–75 किलोवाट की श्रेणी वाले ट्रैक्टरों में 13% की स्थिर वृद्धि देखी गई।
  • मेक्सिको: हाल ही में एक नया और उभरता हुआ गंतव्य बनकर सामने आया है, जहां भारतीय ट्रैक्टरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

नीतिगत समर्थन और कर सुधार

भारत सरकार ने भी इस विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृषि उपकरणों पर जीएसटी में कटौती से जहां घरेलू किसानों को राहत मिली, वहीं निर्यात बाजार को भी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली। ICCT का मानना है कि यह कदम न केवल किसानों की सामर्थ्य बढ़ाता है, बल्कि स्वच्छ तकनीक को अपनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को और मजबूत करता है।

आने वाला बदलाव: TREM-V मानक

भारत अब अप्रैल 2026 से TREM-V उत्सर्जन मानक लागू करने की तैयारी कर रहा है। ये मानक न केवल यूरोपीय संघ के बराबर होंगे, बल्कि कई मामलों में अमेरिकी मानकों से भी अधिक कठोर होंगे। इसका मतलब है कि भारत सीधे यूरो-IV से यूरो-VI स्तर पर छलांग लगाएगा।

ICCT इंडिया के प्रमुख अमित भट्ट के अनुसार, नए मानकों से भारत के घरेलू ट्रैक्टर बेड़े का आधुनिकीकरण होगा और निर्यात के और भी बड़े अवसर पैदा होंगे। वहीं, अध्ययन के लेखक अरविंद हरिकुमार ने कहा कि अगली पीढ़ी के स्वच्छ और आधुनिक ट्रैक्टर ग्रामीण विकास की रफ्तार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती

अंतरराष्ट्रीय अध्ययन यह दर्शाता है कि उत्सर्जन मानकों का पालन अब केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार में सफलता का आधार बन चुका है। भारतीय ट्रैक्टर निर्माता अपने उत्पादों को नियमों के अनुरूप बनाकर न केवल घरेलू पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि दुनिया भर में तेजी से बढ़ते बाजारों में भी अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं।

भारत का यह सफर बताता है कि सही नीति, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता के जरिए कोई भी देश स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है। आने वाले समय में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग न केवल किसानों की ताकत बनेगा, बल्कि वैश्विक कृषि उपकरण बाजार में भी नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।

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