बिहार के किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण और राहत भरी घोषणा की गई है। अब किसानों को आधुनिक कृषि मशीनें खरीदने के लिए भारी आर्थिक सहायता मिलेगी। सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (Sub Mission on Agricultural Mechanization) यानी SMAM योजना के तहत लाखों रुपये की लागत वाले कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि जो मशीन पहले 10 से 20 लाख रुपये तक की आती थी, वह अब किसानों को काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेगी।
यह पहल खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर की गई है, ताकि वे भी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकें। बढ़ती मजदूरी लागत और समय की कमी को देखते हुए कृषि मशीनीकरण अब जरूरत बन चुका है, और यह योजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
कृषि यंत्रों पर अनुदान (Krishi yantra subsidy yojana) देने के लिए राज्य सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। हाल ही में कृषि भवन में कृषि मंत्री Ram Kripal Yadav की उपस्थिति में OFMAS पोर्टल के माध्यम से केंद्रीकृत ऑनलाइन लॉटरी निकाली गई। इस डिजिटल लॉटरी प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी पात्र किसानों को निष्पक्ष और समान अवसर मिले।
लॉटरी प्रक्रिया के बाद चयनित किसानों को तुरंत स्वीकृति पत्र जारी कर दिए गए, ताकि वे बिना देरी के अपने कृषि यंत्रों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर सकें। सरकार का कहना है कि तकनीक के उपयोग से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त रखा गया है।
SMAM योजना के अंतर्गत लगभग 91 प्रकार के कृषि यंत्रों को शामिल किया गया है। इन मशीनों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसमें विभिन्न एचपी क्षमता वाले ट्रैक्टर और पावर टिलर भी शामिल हैं, जो छोटे और बड़े दोनों प्रकार के खेतों के लिए उपयोगी हैं।
जुताई के लिए कल्टीवेटर, रोटावेटर, हैरो और लेवलर जैसे उपकरणों पर भी अनुदान उपलब्ध है। बुवाई के लिए सीड ड्रिल, पोटैटो प्लांटर और ट्रांसप्लांटर जैसी आधुनिक मशीनें भी इस योजना के दायरे में आती हैं।
कटाई के कार्यों को आसान बनाने के लिए रीपर और कंबाइन हार्वेस्टर जैसे उपकरणों पर भी सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, फसल सुरक्षा के लिए मैनुअल और पावर स्प्रेयर पर भी सहायता उपलब्ध है।
फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हैप्पी सीडर, मल्चर और सुपर सीडर जैसी मशीनों को भी योजना में शामिल किया गया है। इन उपकरणों से पराली जलाने की समस्या कम करने में मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
इस बार योजना के प्रति किसानों में काफी उत्साह देखा गया। अधिकारियों के अनुसार, लगभग 1.45 लाख किसानों ने OFMAS पोर्टल पर आवेदन किया था। यह संख्या दर्शाती है कि किसान अब आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए तैयार हैं।
सरकार ने 153.64 करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य में से शेष 79.86 करोड़ रुपये की राशि के लिए लॉटरी निकालकर चयनित किसानों को स्वीकृति प्रदान की है। इससे हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और वे अपनी खेती को नई दिशा दे सकेंगे।
यदि आपने भी इस योजना के तहत आवेदन किया है, तो आप आसानी से अपना चयन स्टेटस ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए आपको OFMAS पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां अपने आवेदन संख्या या पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉगिन करके स्थिति जांची जा सकती है।
चयनित किसानों के अलावा प्रतीक्षा सूची भी जारी की गई है, जिसमें दोगुनी संख्या में किसानों के नाम शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कोई चयनित किसान समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो प्रतीक्षा सूची से अन्य किसानों को अवसर दिया जा सके।
SMAM योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं है। किसान समूहों और सहकारी समितियों को भी इस योजना के तहत प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए लगभग 10 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इससे गांव स्तर पर मशीनें किराए पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जिससे छोटे किसान भी कम लागत में आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर पाएंगे।
फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध है। इससे किसान समूह सामूहिक रूप से मशीनरी खरीदकर साझा उपयोग कर सकते हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विशेष कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना पर भी 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है, जिससे पराली प्रबंधन की समस्या को प्रभावी ढंग से हल किया जा सके।
यदि इस बार लॉटरी में आपका नाम नहीं आया है, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया समय-समय पर जारी रहती है। आप अपने नजदीकी कृषि समन्वयक या प्रखंड कृषि पदाधिकारी से संपर्क करके अगले चरण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
समय पर आवेदन और सही दस्तावेज प्रस्तुत करके आप भविष्य में इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंचाना है।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती की लागत घटेगी और समय की बचत होगी। इससे उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय में सुधार आएगा।
आज के समय में मशीनीकरण केवल सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। मजदूरों की कमी, मौसम की अनिश्चितता और उत्पादन बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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