जाने क्या है नैनो डीएपी फर्टिलाइजर और किन फसलों पर किया जा रहा है ट्रायल?

जाने क्या है नैनो डीएपी फर्टिलाइजर और किन फसलों पर किया जा रहा है ट्रायल?

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आजकल हर तरह की खेती में उत्पादन बढ़ाने के लिए केमिकल और अलग अलग तरह के उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कृषि से बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए उर्वरकों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। जिससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी प्रभावित हो रही है। इसी समस्या को कम करने के लिए लंबे समय से उपाय ढूंढे जा रहे हैं और इसके लिए नैनो तकनीक काफी बेहतरीन साबित हो रही है।

इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोओपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) बहुत समय से लिक्विड फॉर्म में उर्वरक बनती रही है और अब उसी ने नैनो यूरिया लॉन्च किया था। जिसे किसानों ने खूब पंसद किया। पहले किसानों को भारी-भारी बोरी उर्वरकों की उठानी पड़ती थी। लेकिन अब ये काम बसह 500 मिली की बोतल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये उर्वरक लिक्विड फॉर्म में है और इसका छिड़काव बेहद आसानी से पानी के साथ किया जा सकता है। पिछले कुछ सालों में नैनो यूरिया फर्टिलाइजर से कृषि की उत्पादकता बढ़ाने और पर्यावरण की सुरक्षा में काफी मदद मिली है।

इस पहल में अब केंद्र सरकार भी हिस्सेदार हो गई है और सरकार की तरफ से नैनो डीएपी लॉन्च करने की घोषणा कर दी है। सरकार ने नैनो पोटाश, नैनो जिंक और नैनो कॉपर उर्वरकों पर भी काम करने की बात कही है। 5 फसलों चना, मटर, मसूर, गेहूं, सरसों पर नैनो डीएपी का ट्रायल कर रहे हैं।

क्या है नैनो डीएपी फर्टिलाइजर?

नैनो यूरिया की तरह ही नैनो डीएपी ‘डाय-अमोनियम फॉस्फेट (Diammonium Phosphate)’ का लिक्विड वर्जन है। अब से पहले ये फ़र्टिलाइज़र सूखे फॉर्म में मिलता था और इसे पाउडर-गोलियों के तौर पर पीले रंग की बोरी में उपलब्ध करवाया जाता है। इस उर्वरक से मिट्टी प्रदूषण के आसार रहते हैं।

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कई बार किसान फसल की आवश्यकता से अधिक डीएपी उर्वरक का इस्तेमाल करते हैं। जिससे बाद में मिट्टी के उपजाऊपन पर नकारात्मक असर पड़ता है। यह एक फॉस्फेटिक यानी रसायनिक खाद है, जो पौधों में पोषण और उनके अंदर नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी को पूरा करती है।

अगर इसमें नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा की बात की जाए तो इस उर्वरक में 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस होता है। इससे पौधों की जड़ों का विकास काफी अच्छी तरह से होता है। यह उर्वरक फसल की उत्पादकता को बढ़ाने में काफी बेहतरीन है और किसानों की परेशानी को कम करता है।

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