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कृषक अपनी सूखी सोयाबीन की फसल देख हुए बेकाबू डीएम का कार्यालय घेरा

कृषक अपनी सूखी सोयाबीन की फसल देख हुए बेकाबू डीएम का कार्यालय घेरा

डीएम शिवराज सिंह वर्मा का कहना है कि खरगोन जिला ही नहीं संपूर्ण राज्य में अगस्त माह के अंतर्गत बारिश बिल्कुल नहीं हुई। काफी कम बारिश हुई है फसलें बर्बाद होने की जानकारी किसानों के जरिए से मिली है। हमने भी कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीम को सतर्क किया है और उनसे कहा है कि वस्तु स्थिति पर निगरानी रखें और खेतों पर जाकर देखें फसलों की क्या हालत है। मध्य प्रदेश के खरगोन में सोयाबीन की फसल सूखने से हताश किसानों ने डीएम कार्यालय का घेराव किया। सोयाबीन की सूखी फसल लेकर किसान डीएम के कार्यालय पहुंच गए। परंतु, वहां डीएम के दफ्तर का गेट बंद देख किसानों का गुस्सा और अधिक बढ़ गया। किसानों ने डीएम कार्यालय का गेट खोला और भीतर घुस गए। डीएम कार्यालय का घेराव कर वहीं धरना डाल दिया, जिसके उपरांत झिरन्या के किसानों ने सोयाबीन की सूखी फसल पशुओं को खिला दी। खरगोन जनपदभर में सोयाबीन एवं कपास की फसल सूखने से नाराज बड़ी तादात में किसान सोयाबीन की सूखी फसल लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे। डीएम परिसर का गेट बंद करने पर किसान भाइयों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए किसान नारेबाजी करते हुए दरवाजा खोलकर डीएम कार्यालय के समक्ष पहुंच गए। बिजली अधिकारी और डीएम के खिलाफ नारेबाजी की गयी। बड़ी संख्या में किसान धरने पर बैठे। संपूर्ण जिले की भीकनगांव, भगवानपुरा, बड़वाह, महेश्वर, झिरन्या तहसीलों से किसान पहुंचे। 

क्रोधित कृषकों ने प्रशासन एवं डीएम के खिलाफ की नारेबाजी

किसानों ने डीएम कार्यालय के सामने सरकार, पुलिस, प्रशासन एवं डीएम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने डीएम कार्यालय के सामने कई घंटे तक धरना दिया। जिला प्रशासन से 2 दिन का आश्वासन मिलने के पश्चात किसानों ने शाम लगभग 5 बजे अपना धरना खत्म कर दिया। 

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बिजली कंपनी अपनी मनमानी कर रही है- किसान संघ

किसान संघ जिला अध्यक्ष सदाशिव पाटीदार का कहना है, कि विद्युत वितरण कंपनी द्वारा मनचाहे तरीके से 7 घंटे बिजली देने का शेड्यूल बनाया गया है। हम सूचना देने के लिए ज्ञापन के जरिए से यहां एकत्रित हुए थे। परंतु सवाल यह खड़ा है कि हमारे आने से पहले कलेक्टर कार्यालय का गेट बंद कर दिया गया। इससे कृषकों ने उग्र रूप धारण कर लिया एवं सभी किसान यहां पहुंच गए हैं। वर्तमान में डीएम साहब घर पर ही निवास कर रहे हैं और जानकारी मिली है कि वे निर्वाचन में काफी व्यस्त हैं। हमारा कहना है, कि जब वोट डालने वाले ही नहीं रहेंगे तो निर्वाचन किसके लिए होगा। विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कहा गया है, कि ये शेड्यूल ऊपर से तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बढ़ती जनसंख्या में खाद्य सुरक्षा के लिए आगाह किया

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बढ़ती जनसंख्या में खाद्य सुरक्षा के लिए आगाह किया

जनपद के सौंसर विकासखंड में विकास यात्रा के चलते मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि मंत्री श्री कमल पटेल ने कृषि विभाग के माध्यम से आयोजित श्रीअन्न (Millets) और प्राकृतिक खेती के उत्पादों जिनमें मिलेट्स से बने कुकीज़, बिस्कुट व्यंजन के स्टॉल का नजारा लिया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विभाग लाभान्वित हितग्राही को मंच से हितलाभ मुख्यमंत्री जी के माध्यम से वितरित किये गये। इस उपलक्ष्य पर कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले, उप संचालक कृषि श्री जितेन्द्र सिंह और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। मुख्यमंत्री जी को मिलेट्स से निर्मित उत्पादों के स्टाल पर सूचना व जानकारी उप परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती प्राची कौतू ने प्रदान की। विभाग के सहायक संचालक श्री धीरज ठाकुर, श्री दीपक चौरसिया, श्री चौकीकर, श्रीमती सरिता सिंह, श्री सचिन जैन, श्री नीलकंठ पटवारी समेत बाकी अधिकारी मौजूद थे।

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अंतर्राष्ट्रीय फलक पर मध्यप्रदेश एवं इंदौर धूमकेतु की भाँति चमक रहा है। हाल ही में इंदौर में जी-20, कृषि कार्य समूह की प्रथम बैठक 13 से 15 फरवरी को समापन हुई। बैठक की शुरुआत सोमवार को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। इसके चलते कृषि पर ध्यान से विचार-विमर्श किया। आखरी दिन चार तकनीकी विषयों ‘खाद्य सुरक्षा एवं पोषण’ ‘जलवायु स्मार्ट दृष्टिकोण सहित सतत कृषि ’, ‘समावेशी कृषि मूल्य श्रृंखला एवं खाद्य प्रणाली’, एवं ‘कृषि परिवर्तन हेतु डिजिटलीकरण’ पर चर्चा हुई।

जनसँख्या में वृद्धि की वजह से खाद्य सुरक्षा व्यवस्थित होनी अति आवश्यक है

स्वयं के उद्घाटन भाषण के दौरान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जनसँख्या वृद्धि की वजह खाद्य सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया का केवल 12 फीसद भू-भाग कृषि के लायक है। साल 2030 तक खाद्यान्न की मांग 345 बिलियन टन तक पहुँच जाएगी। वहीं साल 2000 में यह मांग 192 बिलियन टन पर थी। जाहिर है, कि ना तो खेती की भूमि में बढ़ने वाली है एवं ना ही हमारे प्राकृतिक संसाधनों में वृद्धि होनी है। ऐसी स्थिति में कृषि लायक जमीन का समुचित इस्तेमाल एवं कृषि भूमि की पैदावार को बढ़ाने हेतु कोशिश करनी होगी। कृषि उत्पादन बढ़ाना है, तो डिजिटलाइजेशन, नवीन तकनीक मैकेनाइजेशन एवं नव बीज के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा देना होगा। पैदावार में वृद्धि सहित उत्पादन का खर्च कम करना भी बेहद जरुरी है। मुख्यमंत्री जी का कहना है, कि विश्व मे प्रत्येक चीज का विकल्प हो उपस्थित है। परंतु फल, सब्जी और अनाज का कोई विकल्प नहीं है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भी इस साल को मिलेट ईयर के तौर पर घोषित किया गया है। कोशिश करें कि यह पोषक अनाज भूमि से गायब न हो जाए। प्राकृतिक खेती की तरफ रुख करना बेहद आवश्यक है।

कृषि क्षेत्र के विकास हेतु यह तीन एस बेहद महत्वपूर्ण हैं

आपको बतादें कि 14 फरवरी की बैठक में कृषि पर विमर्श के सत्र में नागरिक उड्डयन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा उनके उद्घाटन भाषण के दौरान खेती किसानी में विकास हेतु 3एस टेम्पलेट – स्मार्ट, सर्व आल और सस्टेनेबल के विषय में चर्चा की। उन्होंने भारत की कृषि विकास चर्चा में ड्रोन की अहमियत पर भी ध्यान दिया।

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इश्यू नोट प्रस्तुति के चलते केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सचिव श्री मनोज आहूजा ने मुख्य भाषण प्रस्तुत किया। खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, जलवायु स्मार्ट दृष्टिकोण सहित अड़िग कृषि, समावेशी कृषि मूल्य श्रृंखला एवं खाद्य प्रणाली और कृषि परिवर्तन हेतु डिजिटलीकरण के चार मुख्य विषयों को शम्मिलित करते हुए एडब्ल्यूजी हेतु इश्यू नोट पर प्रस्तुतियां व्यक्त की गईं। आमंत्रित देशों, सदस्य देशों एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इश्यू नोट पर स्वयं की भावना व्यक्त की। जी- 20 सदस्य देशों एवं अतिथि देशों द्वारा भी जी- 20 कृषि एजेंडे पर विशेष गौर करते हुए द्विपक्षीय बैठकें कीं।
मध्य प्रदेश में बरसात और ओलावृष्टि का कहर, 3800 गांवों में 1.5 लाख हेक्टेयर फसल हुई नष्ट

मध्य प्रदेश में बरसात और ओलावृष्टि का कहर, 3800 गांवों में 1.5 लाख हेक्टेयर फसल हुई नष्ट

मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से तेज बारिश-आंधी और ओलावृष्टि का कहर जारी है। जिसके कारण अब तक लाखों हेक्टेयर फसल नष्ट हो चुकी है। प्रदेश के लगभग हर जिले में ओलावृष्टि हुई है। कई जगहों पर किसानों की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई हैं। किसानों का कहना है कि बिना मौसम वाली बरसात के कारण अभी तक  गेहूं, चना और सरसों की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। इसके साथ ही संतरा, लहसुन, धनिया, मसूर, इसबगोल, अलसी की फसलें भी बुरी तरह से बर्बाद हो गई है। प्रदेश में फसलों की बर्बादी को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने सर्वे करने के आदेश दिए हैं। यह सर्वे दो फेज में करवाया जा रहा है। पहले फेज के सर्वे में जानकारी निकलकर सामने आई है कि 6 से 9 मार्च के बीच जो बरसात और ओलावृष्टि हुई थी उसमें प्रदेश के 16 जिले बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। इन जिलों के 3280 गांव में 1.09 लाख किसानों की 1.25 लाख हेक्टेयर की फसल नष्ट हो चुकी है। दूसरे फेज का सर्वे 16 से लेकर 19 मार्च तक किया जा रहा है। सर्वे में अब तक कहा गया है कि इस दौरान 27 जिलों के किसान प्रभावित हुए हैं। जिसमें अभी तक 33884 किसानों की 38985 हेक्टयर फसल के खराब होने की जानकारी सामने आई है। यह आंकड़ा भविष्य में बढ़ सकता है क्योंकि दूसरे फेज का सर्वे अब भी जारी है। सर्वे में बताया गया है कि जिन जिलों में खराब मौसम की वजह से नुकसान हुआ है वहां पर 50 से 85% तक फसलें तबाह हो चुकी हैं। अब तक प्रदेश में कुल 1.5 लाख हेक्टेयर की फसल तबाह हो चुकी है। जिसमें अब तक प्रदेश के 3500 से ज्यादा गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। अभी तक खराब मौसम का सबसे ज्यादा प्रभाव विदिशा जिले में देखने को मिला है। विदिशा में सर्वाधिक 49883 हेक्टेयर फसल तबाह हो चुकी है। इसके साथ ही सबसे ज्यादा विदिशा जिले के किसान प्रभावित हुए हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदेश जारी करके 25 मार्च तक सभी प्रकार के सर्वे को पूरा करने के लिए कहा है।

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फसलों की तबाही को देखेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सर्वे में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने इसके लिए अधिकारियों के साथ मीटिंग की है।  उन्होंने कहा कि सर्वे में ईमानदारी होना जरूरी है, सर्वे में होने वाली किसी भी प्रकार की गलती को स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आदेश दिया है कि रेवेन्यू, कृषि और पंचायत विकास के अमले को सर्वे में शामिल किया जाए। सर्वे के बाद प्रभावितों की लिस्ट को पंचायत भवन में चस्पा कर दी जाए ताकि सभी लोग अपना नाम लिस्ट में देख सकें। उन्होंने कहा कि यदि किसान सर्वे से असंतुष्ट नजर आते हैं तो उसका जल्द से जल्द निराकरण किया जाए। इसके साथ ही पशु हानि की भरपाई करने के लिए भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

फसल बर्बाद होने के सदमे में किसान की हुई मौत

प्रदेश के रायसेन जिले के पहरिया गांव में एक किसान की सदमें में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि किसान ने अपनी 8 एकड़ जमीन पर चने की फसल लगाई थी। बिना मौसम तेज बरसात और ओले गिरने के कारण किसान टेंशन में आ गया था। जिससे सोते समय उसकी मौत हो गई। रायसेन जिले में 40 प्रतिशत से ज्यादा फसलें तबाह हो गई हैं। पिछले 24 घंटों में मंडला जिले में सबसे ज्यादा 1.57 नीच बरसात दर्ज की गई है। जिससे जिले की फसलें बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
किसानों  के लिए इस राज्य सरकार की बड़ी घोषणाएं, फसलों के नुकसान पर मिलेगा इतना मुआवजा

किसानों के लिए इस राज्य सरकार की बड़ी घोषणाएं, फसलों के नुकसान पर मिलेगा इतना मुआवजा

पिछले 2 सप्ताह में मध्य प्रदेश में बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने जमकर कहर ढाया है। इस दौरान राज्य में गेहूं, चना, सरसों और मसूर की खेती बुरी तरह से प्रभावित हुई है। ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल खेतों में पूरी तरह से बिछ गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। पिछले सप्ताह ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए सर्वे के आदेश दिए थे। यह सर्वे पूरा हो चुका है और इसकी विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश शासन को भेजी जा चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि सरकार 50 फीसदी तक बर्बाद हुई फसल पर 32 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा प्रदान करेगी। इसके अलावा किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ भी दिलवाया जाएगा। साथ ही फसलों को हुए नुकसान का सैटेलाइट से सर्वे भी करवाया जाएगा। जिसमें सरकार के तीन विभाग संयुक्त रूप से फसल के सर्वे का काम करेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा है कि ओलावृष्टि से जिन किसानों की फसलों का व्यापक नुकसान हुआ है, उनसे फिलहाल कर्ज की वसूली नहीं की जाएगी। साथ ही अब कर्ज का ब्याज सरकार भरेगी। इस दौरान यदि किसी व्यक्ति की ओलावृष्टि या बिजली गिरने से मौत हो गई है तो उसके परिजनों को सरकार 4 लाख रुपये की सरकारी सहायता उपलब्ध करवाएगी।

गाय-भैंस की मृत्यु पर भी मिलेगी सहायता राशि

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि फसल के नुकसान के अलावा यदि आपदा के दौरान किसी की गाय या भैंस की मृत्यु हो गई है तो ऐसे लोगों को 37 हजार रुपये प्रति जानवर की दर से सहायता राशि उपलब्ध कारवाई जाएगी। इसके साथ ही भेड़-बकरी की मृत्यु पर 4 हजार रुपये तथा बछड़ा और बछिया की मृत्यु पर 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। मुर्गा और मुर्गियों का नुकसान होने पर 100-100 रुपये दिए जाएंगे। यदि आपदा से किसी के घर को नुकसान हुआ है तो उसके घर की मरम्मत के लिए भी सहायता उपलब्ध कारवाई जाएगी। ये भी पढ़े: यहां मिल रहीं मुफ्त में दो गाय या भैंस, सरकार उठाएगी 90 फीसद खर्च

रबी फसल के लिए दोबारा रजिस्ट्रेशन करवा पाएंगे किसान

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ऐसे किसान जिनकी फसल बर्बाद हो गई है और उनके घर में उनकी बेटी की शादी है। ऐसे किसानों को सरकार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत 56 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाएगी। साथ ही कन्या के विवाह में भी सहयोग करेगी। इसके साथ ही जो किसान रबी की फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए हैं, ऐसे किसान फिर से अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। उनके लिए दोबारा पोर्टल खुलवाया जाएगा। ताकि कोई भी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के लाभ से छूटने न पाए।
11.9 लाख किसानों का कर्ज माफ कर रही है शिवराज चौहान सरकार,  बनाई गई है लिस्ट

11.9 लाख किसानों का कर्ज माफ कर रही है शिवराज चौहान सरकार, बनाई गई है लिस्ट

अगर आप मध्य प्रदेश के किसान है तो आपके लिए शिवराज चौहान सरकार एक बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है. मध्यप्रदेश में शिवराज चौहान सरकार ने राज्य के कुल 11.9 लाख किसानों का कर्ज माफ करने की योजना तैयार की है. किसानों को इस योजना के बारे में एक बात जानना जरूरी है कि इसके लिए एक लिस्ट जारी की गई है और इस लिस्ट में उन्हीं किसानों को रखा गया है जिनका मूल और ब्याज मिलाकर कुल बकाया रुपए केवल ₹200000 बचा है. अगर आप डिफाल्टर किसानों की लिस्ट में आते हैं तो इस योजना के तहत लाभ उठाने के लिए आपको अलग से आवेदन करना होगा और उसके बाद जांच करने के बाद ही आप का कर्ज पूरी तरह से माफ किया जाएगा

2,123 करोड़ रुपए के प्रस्ताव के लिए दी गई है मंजूर

मध्यप्रदेश राज्य में बहुत से किसान ऐसे हैं जिन्होंने कई साल पहले कर दिया था और किसी कारण वश में है यह कर्ज नहीं चुका पाए थे. सरकार ने पूरी तरह से जांच करते हुए ऐसे किसानों की एक लिस्ट तैयार की है और इसमें ऐसे किसानों को शामिल किया गया है जिन का बकाया राशि ₹200000 तक का है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इसके लिए लगभग 2123 करोड रुपए का प्रस्ताव मंजूर किया गया है जिससे लाखों किसान फायदा उठाने वाले हैं. मंत्रिमंडल बैठक में फैसला ले लिया है और बुधवार को ही है प्रस्ताव सामने रखा गया है. ये भी पढ़े: अब किसानों को घर बैठे मिलेगा कृषि योजनाओं का लाभ, इस एप पर मिलेगी सम्पूर्ण जानकारी

किसानों को है इसके लिए आवेदन करने की जरूरत

अगर किसान इस लिस्ट में आना चाहते हैं तो कर्ज माफी के लिए उन्हें एक आवेदन देना होगा जिसकी सरकार के द्वारा जांच की जाएगी और उसके बाद यह निर्धारित किया जाएगा कि उनका कर्ज माफी किया जाएगा या नहीं.यह आवेदन ऑनलाइन किसानों से मांगे गए हैं. पहले कांग्रेस सरकार ने भी किसानों के लोन माफी की घोषणा की थी जिसके बाद बहुत से किसानों ने लोन की राशि जमा ही नहीं की थी लेकिन उसके बाद ही सरकार बदल गई और किसानों पर यह लोन माफी की योजना को रोक दिया गया और तब से किसान उस कर्ज के तले दबे हुए हैं.माना जा रहा है कि इस योजना से किसानों को लाभ मिलेगा.
मध्य प्रदेश सरकार अब से किसान कल्याण योजना के तहत 4 की जगह 6 हजार रुपए की धनराशि देगी

मध्य प्रदेश सरकार अब से किसान कल्याण योजना के तहत 4 की जगह 6 हजार रुपए की धनराशि देगी

मध्य प्रदेश के कृषक भाइयों के लिए सरकार द्वारा Kisan Kalyan Yojana में एक बड़ा परिवर्तन किया है। आपकी जानकारी के लिए बतादें कि किसानों को 4 हजार के स्थान पर 6 हजार रुपए दिए जाऐंगे। आज हम इस लेख में आपको योजना की धनराशि किस तरह मिलेगी इसके बारे में आपको जानकारी प्रदान करेंगे।

किसान कल्याण योजना

दरअसल, कृषकों के लिए समस्त राज्य सरकार आए दिन कोई न कोई योजना जारी करती रहती हैं। जैसा कि आप जानते हैं, कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के अंदर विधानसभा चुनाव (Assembly Elections ) होने वाले हैं। इसकी तैयारियां राज्य सरकार ने पहले से ही करनी शुरू कर दी हैं। बतादें, कि किसानों की सहायता व विधानसभा चुनाव में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के द्वारा शुरू की गई ‘किसान कल्याण योजना’ (Kisan Kalyan Yojana ) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

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KKY भुगतान धनराशि में हुआ इजाफा

किसान कल्याण योजना के अंतर्गत सरकार के द्वारा किसान भाइयों को 2 समान किश्तों में कुल 4 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है। जो कि 1 अप्रैल से 31 अगस्त और 1 सितंबर से 31 मार्च के माह में प्रदान किए जाते थे। परंतु, सरकार ने योजना की धनराशि 4 हजार रूपए से बढ़ाकर 6 हजार रुपए कर दी है। यह धनराशि किसान भाइयों को 3 किश्तों के अंतर्गत मिलेगी।

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  • पहली किश्त- 1 अप्रैल से 31 जुलाई
  • दूसरी किश्त- 1 अगस्त से 30 नवम्बर
  • तीसरी किश्त- 1 दिसम्बर से 31 मार्च

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह विभिन्न योजनाऐं जारी की हैं

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ना केवल किसान कल्याण योजना (Kisan Kalyan Yojana) को मंजूरी दी है। बल्कि बाकी बहुत सारी सरकारी योजनाओं व कार्यों को भी स्वीकृति दे दी है। जैसे कि मध्य प्रदेश में लड़कियों की शिक्षा (Girls Education) में सुधार करने के लिए राज्य में नए स्कूल खुलेंगे। सरकार ने लगभग 19 कन्या शिक्षा परिसरों के विकास पर अपनी मोहर लगा दी है। मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 1362.91 करोड़ रुपये के खर्च से 37 स्कूलों का निर्माण किया जाएगा।