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नींबू की बढ़ती कीमत बढ़ा देगी आम लोगों की परेशानियां

नींबू की बढ़ती कीमत बढ़ा देगी आम लोगों की परेशानियां

आपको बतादें कि गाजीपुर सब्जी मंडी के चेयरमैन सत्यदेव प्रसाद का कहना है, कि सब्जियों के भाव में बीते 15 दिनों से निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। आकस्मिक जलवायु परिवर्तन एवं तापमान में वृद्धि होने से केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा गर्मी से फसलों की पैदावार पर पड़ने वाले प्रभाव से बचने के लिए समस्त राज्य सरकारों को तैयारी करने को कहा है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार, गर्मी की सर्वाधिक मार हरी सब्जियों पर देखने को मिल रही है। यदि इसी प्रकार से तापमान में वृद्धि होती रही तो गेहूं के साथ- साथ हरी सब्जियों की भी पैदावार गिर सकती है। इसकी वजह से महंगाई में एक बार पुनः वृद्धि हो जाएगी एवं खाने- पीने की चीजें भी महंगी हो जाएंगी।

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 खाद्य और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मौस्मिक परिवर्तन का प्रभाव फल के साथ- साथ टमाटर एवं गोभी समेत बहुत सी हरी सब्जियों पर हो सकता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है, कि नींबू का भाव बीते साल की भांति इस बार भी 400 रुपये किलो तक पहुंच सकता है। साथ ही, विभाग के अधिकारियों का यह भी मानना है, कि आने वाले दिनों में फल एवं सब्जियों की पैदावार में 30 प्रतिशत तक की कमी देखने को मिल सकती है।


 

जानें नीबू की कितनी कीमत हो गई है

साथ ही, गाजीपुर सब्जी मंडी के चेयरमैन सत्यदेव प्रसाद ने भी बताया है, कि सब्जियों के भाव में बीते 15 दिनों से निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। नींबू का भाव थोक में जो पहले केवल 30 रुपये किलो थी। वह फिलहाल 60 से 80 रुपये किलो पर पहुँच गई है। इसी प्रकार खुदरा में अब 250 ग्राम नींबू का भाव 25 से 30 रुपये हो गया है। सत्यदेव प्रसाद का कहना है, कि बीते वर्ष नींबू की कीमत खुदरा बाजार में 400 प्रति किलो हो गया था। अगर गर्मी में इज़ाफा इसी प्रकार से चलता रहा तो इस बार भी नींबू 400 रुपये किलो के पार पहुंच सकता है। साथ ही, अन्य सब्जियों के भाव में भी वृद्धि होगी। वर्तमान में खुदरा बाजार में टमाटर 20 से 30 रुपये किलो के भाव से बेचा जा रहा है। इसी प्रकार एक किलो गोभी का मूल्य 40 रुपये हो गया है। वहीं, होली से पूर्व एक किलो गोभी का भाव 20 रुपये था।


 

प्याज की हुई बेहतरीन पैदावार

जानकारी के लिए बतादें कि देश में इस बार आलू एवं प्याज का बेहतरीन उत्पादन हुआ है। इसकी वजह से इनके भावों में कमी देखने को मिली है एवं किसान खर्चा भी नहीं हांसिल कर पा रहे हैं। साथ ही, कृषि मंत्रालय के अधिकारियों की टीम दूसरे मंत्रालयों के विभागों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। इसके लिए समयानुसार प्रदेश सरकार को एडवाइजरी जारी की जा रही है, जिससे कि तापमान वृद्धि से राहत दी जा सके।

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खाद्य पदार्थों की पैदावार प्रभावित होगी

बतादें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ- साथ पूरे देश में गर्मी तीव्रता से बढ़ती जा रही है। दिल्ली में विगत दिनों पारा 34 डिग्री पर पहुंच गया था। साथ ही, मुंबई में तापमान 39 डिग्री के पार पहुंच गया है। विशेष बात यह है, कि मुंबई शहर में तापमान सामान्य से 6 डिग्री अधिक है। अब ऐसी स्थिति में आशंका जताई जा रही है, कि आगामी दिनों में गर्मी और तीव्रता से बढ़ेगी, जिससे खाद्य पदार्थों की पैदावार पर प्रभाव पड़ेगा।

नींबू की खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

नींबू की खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

नींबू की खेती अधिकांश किसान मुनाफे के तौर पर करते हैं। नींबू के पौधे एक बार अच्छी तरह विकसित हो जाने के बाद कई सालों तक उत्पादन देते है। यह कम लागत में ज्यादा मुनाफे देने वाली फसलों में से एक है। बतादें, कि नींबू के पौधों को सिर्फ एक बार लगाने के उपरांत 10 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। पौधरोपण के पश्चात सिर्फ इनको देखरेख की जरूरत पड़ती है। इसका उत्पादन भी प्रति वर्ष बढ़ता जाता है। भारत विश्व का सर्वाधिक नींबू उत्पादक देश है। नींबू का सर्वाधिक उपयोग खाने के लिए किया जाता है। खाने के अतिरिक्त इसे अचार बनाने के लिए भी इस्तेमाल में लिया जाता है। आज के समय में नींबू एक बहुत ही उपयोगी फल माना जाता है, जिसे विभिन्न कॉस्मेटिक कंपनियां एवं फार्मासिटिकल कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। नींबू का पौधा झाड़ीनुमा आकार का होता है, जिसमें कम मात्रा में शाखाएं विघमान रहती हैं। नींबू की शाखाओ में छोटे-छोटे काँटे भी लगे होते है। नींबू के पौधों में निकलने वाले फूल सफेद रंग के होते हैं, लेकिन अच्छी तरह तैयार होने की स्थिति में इसके फूलों का रंग पीला हो जाता है। नींबू का स्वाद खट्टा होता है, जिसमें विटामिन ए, बी एवं सी की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। बाजारों में नींबू की सालभर काफी ज्यादा मांग बनी रहती है। यही वजह है, कि किसान भाई नींबू की खेती से कम लागत में अच्छी आमदनी कर सकते हैं।


 

नींबू की खेती के लिए उपयुक्त मृदा

नींबू की खेती के लिए सबसे अच्छी बलुई दोमट मृदा मानी जाती है। साथ ही, अम्लीय क्षारीय मृदा एवं लेटराइट में भी इसका उत्पादन सहजता से किया जा सकता है। उपोष्ण कटिबंधीय एवं अर्ध शुष्क जलवायु वाले इलाकों में नींबू की पैदावार ज्यादा मात्रा में होती है। भारत के पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान राज्यों के विभिन्न इलाकों में नींबू की खेती काफी बड़े क्षेत्रफल में की जाती है। ऐसे इलाके जहां पर ज्यादा वक्त तक ठंड बनी रहती हैं, ऐसे क्षेत्रों में नींबू का उत्पादन नहीं करनी चाहिए। क्योंकि, सर्दियों के दिनों में गिरने वाले पाले से इसके पौधों को काफी नुकसान होता है। 

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नींबू में रोग एवं उनका नियंत्रण

कागजी नींबू

नींबू की इस किस्म का भारत में अत्यधिक मात्रा में उत्पादन किया जाता है। कागजी नींबू के अंदर 52% प्रतिशत रस की मात्रा विघमान रहती है | कागजी नींबू को व्यापारिक तौर पर नहीं उगाया जाता है।


 

प्रमालिनी

प्रमालिनी किस्म को व्यापारिक तौर पर उगाया जाता है। इस प्रजाति के नींबू गुच्छो में तैयार होते हैं, जिसमें कागजी नींबू के मुकाबले 30% ज्यादा उत्पादन अर्जित होता है। इसके एक नींबू से 57% प्रतिशत तक रस अर्जित हो जाता है।


 

विक्रम किस्म का नींबू

नींबू की इस किस्म को ज्यादा उत्पादन के लिए किया जाता है। विक्रम किस्म के पौधों में निकलने वाले फल गुच्छे के स्वरुप में होते हैं, इसके एक गुच्छे से 7 से 10 नींबू अर्जित हो जाते हैं। इस किस्म के पौधों पर सालभर नींबू देखने को मिल जाते हैं। पंजाब में इसको पंजाबी बारहमासी के नाम से भी मशहूर है। साथ ही, इसके अतिरिक्त नींबू की चक्रधर, पी के एम-1, साई शरबती आदि ऐसी किस्मों को ज्यादा रस और उत्पादन के लिए उगाया जाता है। 

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नींबू के खेत की तैयारी इस तरह करें

नींबू का पौधा पूरी तरह से तैयार हो जाने पर बहुत सालों तक उपज प्रदान करता है। इस वजह से इसके खेत को बेहतर ढंग से तैयार कर लेना चाहिए। इसके लिए सर्वप्रथम खेत की बेहतर ढ़ंग से मृदा पलटने वाले हलो से गहरी जुताई कर देनी चाहिए। क्योंकि, इससे खेत में उपस्थित पुरानी फसल के अवशेष पूरी तरह से नष्ट हो जाते है। इसके पश्चात खेत में पुरानी गोबर की खाद को डालकर उसकी रोटावेटर से जुताई कर मृदा में बेहतर ढ़ंग से मिला देना चाहिए। खाद को मृदा में मिलाने के पश्चात खेत में पाटा लगाकर खेत को एकसार कर देना चाहिए। इसके उपरांत खेत में नींबू का पौधरोपण करने के लिए गड्डों को तैयार कर लिया जाता है।


 

नींबू पोधरोपण का उपयुक्त समय एवं विधि

नींबू का पौधरोपण पौध के तौर पर किया जाता है। इसके लिए नींबू के पौधों को नर्सरी से खरीद लेना चाहिए। ध्यान दने वाली बात यह है, कि गए पौधे एक माह पुराने एवं पूर्णतय स्वस्थ होने चाहिए। पौधों की रोपाई के लिए जून और अगस्त का माह उपयुक्त माना जाता है। बारिश के मौसम में इसके पौधे काफी बेहतर ढ़ंग से विकास करते हैं। पौधरोपण के पश्चात इसके पौधे तीन से चार साल उपरांत उत्पादन देने के लिए तैयार हो जाते हैं। नींबू का पौधरोपण करने के लिए खेत में तैयार किये गए गड्डों के बीच 10 फीट का फासला रखा जाता है, जिसमें गड्डो का आकार 70 से 80 CM चौड़ा एवं 60 CM गहरा होता है। एक हेक्टेयर के खेत में लगभग 600 पौधे लगाए जा सकते हैं। नींबू के पौधों को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है। वह इसलिए क्योंकि नींबू का पौधरोपण बारिश के मौसम में किया जाता है। इस वजह से उन्हें इस दौरान ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसके पौधों की सिंचाई नियमित समयांतराल के अनुरूप ही करें। सर्दियों के मौसम में इसके पौधों को 10 से 15 दिन के अंतराल में पानी देता होता है। इससे ज्यादा पानी देने पर खेत में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो कि पौधों के लिए अत्यंत हानिकारक साबित होती है।


 

नींबू की खेती में लगने वाले कीट

रस चूसक कीट

सिटरस सिल्ला, सुरंग कीट एवं चेपा की भांति के कीट रोग शाखाओं एवं पत्तियों का रस चूसकर उनको पूर्णतय नष्ट कर देते हैं। बतादें, कि इस प्रकार के रोगों से बचाव करने के लिए पौधों पर मोनोक्रोटोफॉस की समुचित मात्रा का छिड़काव किया जाता है। इसके अलावा इन रोगो से प्रभावित पौधों की शाखाओं को काटकर उन्हें अलग कर दें।

काले धब्बे

नींबू की खेती में काले धब्बे का रोग नजर आता है। बतादें, कि काला धब्बा रोग से ग्रसित नींबू के ऊपर काले रंग के धब्बे नजर आने लगते हैं। शुरआत में पानी से धोकर इस रोग को बढ़ने से रोक सकते हैं। अगर इस रोग का असर ज्यादा बढ़ जाता है, तो नींबू पर सलेटी रंग की परत पड़ जाती है। इस रोग से संरक्षण करने हेतु पौधों पर सफेद तेल एवं कॉपर का घोल बनाकर छिड़काव किया जाता है। 

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नींबू में जिंक और आयरन की कमी होने पर क्या करें

नींबू के पौधों में आयरन की कमी होने की स्थिति में पौधों की पत्तियां पीले रंग की पड़ जाती हैं। जिसके कुछ वक्त पश्चात ही पत्तियां सूखकर गिर जाती हैं और पौधा भी आहिस्ते-आहिस्ते सूखने लगती है। नींबू के पौधों को इस किस्म का रोग प्रभावित ना करे। इसके लिए पौधों को देशी खाद ही देनी चाहिए। इसके अलावा 10 लीटर जल में 2 चम्मच जिंक की मात्रा को घोलकर पौधों में देनी होती है।


 

नींबू की कटाई, उत्पादन और आय

नींबू के पौधों पर फूल आने के तीन से चार महीने बाद फल आने शुरू हो जाते हैं। इसके उपरांत पौधों पर लगे हुए नींबू को अलग कर लिया जाता है। नींबू की उपज गुच्छो के रूप में होती है, जिसके चलते इसके फल भिन्न-भिन्न समय पर तुड़ाई हेतु तैयार होते है। तोड़े गए नीबुओं को बेहतरीन ढंग से स्वच्छ कर क्लोरीनेटड की 2.5 GM की मात्रा एक लीटर जल में डालकर घोल बना लें। इसके पश्चात इस घोल से नीबुओं की साफ-सफाई करें। इसके पश्चात नीबुओं को किसी छायादार स्थान पर सुखा लिया जाता है। नींबू का पूरी तरह विकसित पौधा एक साल में लगभग 40 KG की उपज दे देता है। एक हेक्टेयर के खेत में लगभग 600 नींबू के पौधे लगाए जा सकते हैं। इस हिसाब से किसान भाई एक वर्ष की उपज से 3 लाख रुपए तक की आमदनी सुगमता से कर सकते हैं।