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कंटोला

डाकुओं को आश्रय देने वाली जमीन पर आज हो रही है ककोड़ा की खेती

डाकुओं को आश्रय देने वाली जमीन पर आज हो रही है ककोड़ा की खेती

इटावा के बीहड़ में होने वाली ककोड़ा यानी खेखसा की खेती के बारे विस्तार से जानिए

इटावा। आज हम आपको
ककोड़ा या कर्कोट की खेती (इन नामों से भी जाना जाता है : कंटोला, खेकसी, खेखसा) (kakoda, kantola, Khekhasa, kheksi) (वानस्पतिक नाम : Momordica dioica) के बारे में विस्तार से बताएंगे। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में बीहड़ जंगल हैं। बारिश के दिनों में इस बीहड़ क्षेत्र में एक खास किस्म की सब्जी पाई जाती है, जिसे यहां के स्थानीय किसान तोड़कर शहर में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कभी डांकुओं को आश्रय देने वाली इस जमीन पर आज ककोड़ा की खेती अपने पैर जमा रही है।

काफी स्वादिष्ट होती है ककोड़ा की सब्जी

- आमतौर पर बारिश के दौरान ही ककोड़ा की सब्जी उगती है। जो काफी स्वादिष्ट होती है। इसमें विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं। बताया जाता है कि इनका नियमित सेवन करने से कई रोगों से छुटकारा मिलता है। इसीलिए इसे एक औषधीय सब्जी के नाम से भी जाना जाता है।
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डायबिटीज के रोगियों के लिए रामबाण है ककोड़ा

- तमाम औषधियों से भरपूर ककोड़ा की सब्जी डायबिटीज के रोगियों के लिए रामबाण दवा है। कई नामी चिकित्सकों के दावा है कि ककोड़ा के नियमित सेवन से डायबिटीज पर कंट्रोल किया जा सकता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी ककोड़ा काफी लाभदायक है। शरीर के कई महत्वपूर्ण रोगों में ककोड़ा औषधि के रूप में काम करती है

ककोड़ा में मिलते हैं ये पोषक तत्व

- आयुर्वेद के जानकारों की मानें तो ककोड़ा की सब्जी में कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं, जिनका नियमित सेवन मनुष्य के लिए बेहद लाभकारी है। ककोड़ा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर के साथ-साथ कई अन्य प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं।
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अधिक बारिश में बढ़ती है पैदावार

- ककोड़ा की सब्जी बारिश के दिनों में अच्छी पैदावार देती है। जितना ज्यादा बारिश होगी, यह सब्जी उतनी ही बेहतर उपज देती है। बारिश के दिनों में यहां के स्थानीय किसानों में ककोड़ा की सब्जी को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।
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बीहड़ में हर रोज बढ़ रहा है खेती का क्रेज

- इटावा के बीहड़ों में खेती करने के लिए किसानों में हर रोज क्रेज बढ़ रहा है। यहां अब खेती का चलन शुरू हो गया है। बीहड़ और चम्बल क्षेत्र में अच्छी बारिश के दौरान ककोड़ा की अच्छी पैदावार हो रही है, जिससे किसानों में खुशी का माहौल है। ----- लोकेन्द्र नरवार
कंटोला एक औषधीय गुणों से भरपूर सब्जी है, इसके सेवन से कई सारे रोग दूर भाग जाते हैं

कंटोला एक औषधीय गुणों से भरपूर सब्जी है, इसके सेवन से कई सारे रोग दूर भाग जाते हैं

आज हम इस लेख में कंटोला नामक बागवानी फसल के विषय में बात करेंगे। आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि कंटोला के अंदर भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सीडेंट हमारे शरीर को स्वस्थ व सेहतमंद रखते हैं। हमारे शरीर के बेहतरीन स्वास्थ्य के लिए अच्छे पोषक तत्वों की काफी जरूरत होती है। इसके लिए हमें कई तरह की सब्जियों का सेवन करना चाहिए, जो हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करें। साथ ही, हमें बाकी बीमारियों से भी दूर रखें। ऐसी स्थिति में आज हम आपको एक बेहद ही फायदेमंद सब्जी कंटोला के संबंध में बताने जा रहे हैं, जो आयुर्वेद में एक ताकतवर औषधि के तौर पर मशहूर है। इस सब्जी के अंदर मांस से 40 गुना अधिक प्रोटीन विघमान होता है। इस सब्जी में उपस्थित फाइटोकेमिकल्स हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ाता है। इसकी खेती विशेष रूप से भारत के पहाड़ी हिस्सों में की जाती है। भारत में इसे अन्य लोकल नाम कंकोड़ा, कटोला, परोपा एवं खेख्सा के नाम से जाना जाता है।

कंटोला की फसल हेतु खेत की तैयारी

कंटोला की खेती के लिए बलुई दोमट मृदा काफी अच्छी होती है। आप खेत की जुताई के बाद इसपर कम से कम 2 से 3 बार पाटा जरुर चला दें. इसकी बेहतर पैदावार के लिए खेत में समय-समय पर गोबर की खाद मिला कर जैविक तरीके से खाद देते रहें। किसी भी फसल की बेहतरीन उपज के लिए खेत की तैयारी काफी अहम भूमिका अदा करती है।

कंटोला की बुआई कब की जाती है

कंटोला एक खरीफ के समय में उत्पादित की जाने वाली फसल है। गर्मी के समय में मैदानी इलाकों में जनवरी और फरवरी महीने के अंतर्गत उगाई जाती है। साथ ही, खरीफ की फसल की जुलाई-अगस्त में बुवाई की जाती है। इसके बीजों को, कंद अथवा कटिंग के जरिए से लगाया जाता है।

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कंटोला की कटाई कब की जाती है

कंटोला के फल का बड़े आकार में होने पर ही इसकी कटाई की जाती है। इन फलों की मुलायम अवस्था में दो से तीन दिनों की समयावधि पर नियमित तुड़ाई करना फायदेमंद होता है। कंटोला की खेती करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

कंटोला में कौन कौन से औषधीय गुण विघमान हैं

कंटोला अपने औषधीय गुणों की वजह से जाना जाता है। यह हमारे शरीर की पाचन शक्ति को बढ़ाता है। इसमें उपस्थित रासायनिक यौगिक मानव शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। यह शरीर के ब्लड शुगर लेवल, त्वचा में दरार एवं आंखों के बेहतरीन स्वास्थ्य के लिए सहायक साबित होता है। यह किडनी में होने वाली पथरी को भी दूर करता है। साथ ही, बवासीर के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है।