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तमिलनाडु

फसलों पर बरपा कहर, सरकार देगी इतना मुआवजा

फसलों पर बरपा कहर, सरकार देगी इतना मुआवजा

देश में किसानों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया है. जहां एक तरफ बीते खरीफ के सीजन में जमकर हुई बारिश, बाढ़ और सूखे की वजह से फसलें बर्बाद हो गयी थीं वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर जनवरी और फरवरी में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को तबाह करके रख दिया है. कई राज्यों में फसलों की बर्बादी के बाद तमिलनाडु के खराब हालात सामने आ रहे हैं. जहां एक बड़े हिस्से में तेज बारिश की वजह से फसलें खराब हो गयीं. जिसके बाद बेबस और लाचार किसानों की मदद के लिए राज्य सरकार ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है.

प्रति हेक्टेयर सरकार देगी इतना मुआवजा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने किसानों की मदद के लिए कावेरी डेल्टा की प्रभावित हुई फसलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है. जिसमें किसानों को 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का राहत पैकेज दिया जाएगा. यह मुआवजा उन किसानों को दिया जाएगा, जिनकी फसलें कावेरी डेल्टा से सबसे ज्यादा और बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं.

किसानों ने किया शुक्रिया

किसानों ने राज्य सरकार की इस मदद का आभार जताते हुए कहा कि, सरकार का यह कदम हमारे जख्मों पर मरहम की तरह है. ये भी देखें: ठंड़ और पाले की वजह से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा मांगने के लिए हरियाणा के किसान दे रहे धरना

विभागीय स्तर से होगा फसल सर्वे

राज्य सरकार किसानों को मुआवजा देने के लिए फसलों का सर्वे करवाएगी. यह सर्वे विभागीय स्तर पर किया जाएगा. इसके अलावा राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि, कृषि विभाग और राजस्व इस नुकसान का मिलकर आकलन करे. इसके अलावा अगर बीमा को लेकर पहले सर्वे का काम पूरा हो गया तो बचा हुआ मूल्यांकन करवाया जाएगा. साथ ही राज्य सरकार की यही कोशिश है कि, कोई भी पीड़ित किसान मुआवजे से वंचित ना रहा जाए.

6 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसलें बर्बाद

पिछले कुछ दिनों में तमिलनाडु में मूसलाधार बारिश हुई. जिससे राज्य के कई अहम क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुए. बारिश इतनी तेज थी कि, वो अपने तेज बहाव में फसलें भी लेकर बह गयी. जिसमें कावेरी डेल्टा का क्षेत्र बारिश की चपेट में सबसे ज्यादा आया. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस क्षेत्र में ल्ह्बह्ग 6 लाख हेक्टेयर से जायदा फसलें बर्बाद हुई हैं. ज्सिके बाद राज्य सरकार ने राहत राशि का ऐलान करते हुए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है.
बंजर और शुष्क भूमि में खेती को मिलेगा बढ़ावा, टीएनएयू ने तैयार किये लाल चंदन

बंजर और शुष्क भूमि में खेती को मिलेगा बढ़ावा, टीएनएयू ने तैयार किये लाल चंदन

तमिलनाडु में खास कृषि बजट में बंजर और शुष्क भूमि में खेती को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाया है. दरअसल तमिलनाडु कृषि विश्विद्यालय यानि की टीएनएयू ने फारेस्ट कॉलेज एंड रिसर्च में सबसे ज्यादा फायदे देने वाले लाल चंदन के पौधे तैयार किये हैं. टीएनएयू (TNAU) के कुलपति के मुताबिक तमिलनाडु ने अपने वन क्षेत्र को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. जोकि 17 फीसद से बढ़ाकर करीब 30 फीसद तक किया जाएगा. जिसमें लाल चंदन को उगाया जाएगा. बता दें लाल चंदन उगाने से किसानों को काफी ज्यादा फायदा मिलेगा. क्योंकि बाजार में लाल चंदन की लकड़ी की बिक्री पर काफी अच्छा रिटर्न मिलता है. वहीं सरकार की तरफ से प्राइवेट जमीनों पर लाल चंदन के पेड़ उगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है.

किसानों को मिलेगा अच्छा मुनाफा

जानकारी के मुताबिक एक बड़े
लाल चंदन के पेड़ की लकड़ी की कटाई करने के लिए 18 साल का इंतजार करना होता है. लेकिन इंतजार के बाद हर पेड़ से 1 क्विंटल तक की लकड़ी मिलती है. जिसकी वजह से किसानों को अच्छा खासा मुनाफा हो सकता है. एक एकड़ की जमीन में आप करीब तीन-तीन मीटर की दूरी पर करीब एक साथ 450 पेड़ उगा सकते हैं. आपको बता दें कि, लाल चंदन के पौधे में तने से लेकर जड़ों तक में एक खास तरह की इंजीनियरिंग प्रणाली शामिल की गयी है. इसकी मदद से ज्यादा उपज मिल सकेगी. इस लाल चंदन की खास किस्म को तेजी से बढ़ने वाले पौधों की प्रजातियों के लिए विकसित किया गया है. ये भी पढ़ें: आज लगाएं यह पौधा, बारह साल में बन जाएंगे करोड़पति लाला चंदन के इस पौधे को विकसित करने के पीछे कृषि भूमि से बेहद दुर्लभ, और संकट से घिरी पेड़ों की प्रजातियों की खेती को बढ़ावा देना है. साइंटिस्ट बताते है कि, अच्छे तरीके से किये गये पौधों का रोपण, ड्रिप से सिंचाई और अच्छे जड़ प्रबंधन के तरीकों से लाल चंदन के विकास को बढ़ावा मिल सकता है.
इस राज्य में किसानों को 50 प्रतिशत छूट पर गन्ने के बीज मुहैय्या कराए जाऐंगे

इस राज्य में किसानों को 50 प्रतिशत छूट पर गन्ने के बीज मुहैय्या कराए जाऐंगे

भारत के उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गन्ने का उत्पादन किया जाता है। किसानों को सहूलियत प्रदान करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने की दो प्रसिद्ध प्रजातियों के बीजों के भाव में 25 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। केंद्र और राज्य सरकारें अपने अपने स्तर से किसानों के हित में निरंतर योजनाएं जारी करती आ रही हैं। समस्त सरकारों का यही उद्देश्य होता है, कि किस तरह किसानों को अधिक आमदनी हो सके। किसान भाइयों को अनुदान पर यंत्र मुहैय्या कराए जा रहे हैं। वर्तमान में बिहार में कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के लिए किसानों को अच्छा खासा अनुदान मुहैय्या कराया जा रहा है। साथ ही, सस्ते बीज भी किसानों को प्रदान किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में एक और बड़ी पहल कर रही है। बीज महंगा होने की वजह से गन्ने की बुवाई जहां महंगी हो रही थी। साथ ही, बीज सस्ता करते हुए राज्य सरकार द्वारा उसी महंगाई में सहूलियत प्रदान की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को गन्ना से जुड़े मामलों में काफी सहूलियत प्रदान की गई है। बतादें, गन्ना की प्रजाति को. शा. 13235 एवं को. शा. 15023 के बीजों की दरों में 25 से 50 प्रतिशत तक कटौती की जा चुकी है। किसान इन दोनों किस्मों के बीजों को निर्धारित केंद्रों से ले सकेंगे।

गन्ने की कीमत कितनी निर्धारित की गई है

प्रदेश सरकार के अधिकारियों का कहना है, कि गन्ने की नई प्रजाति को. शा. 13235 के अभिजनक बीज की अब तक जो कीमत थी, वह 1.20 रुपये प्रति बड़ की दर से बढ़कर 1275 रुपये प्रति क्विंटल रही है। राज्य सरकार द्वारा इसको घटाकर 850 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। गन्ना की दूसरी नई किस्म को. शा. 15023 है। इसके बीज की वर्तमान में कीमत 1.70 रुपये प्रति बड की दर से 1700 रुपये प्रति क्विंटल थी। नई दरों में इस प्रजाति की कीमत 850 रुपये प्रति क्विंटल की जा चुकी है। यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए सरकार की तरफ से आई है बहुत बड़ी खुशखबरी

यहां से गन्ना खरीद सकते हैं किसान

अधिकारियों ने बताया है, कि किसानों को गन्ना खरीदने के लिए इधर-उधर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दोनों प्रजातियों के बीज शाहजहांपुर में मौजूद यूपी गन्ना शोध परिषद से अटैच बीज केंद्रों एवं चीनी मिल फार्मों से 850 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर किसानों को मुहैय्या कराया जाएगा। समस्त परिषदों को निर्देश जारी किए गए हैं, कि गन्ने की दोनों किस्मों की जो संसोधित कीमतें हैं। उन्हीं दरों पर गन्ना किसानों को मुहैय्या कराई जाऐं।
बिहार सरकार कोल्ड स्टोरेज खोलने पर 50% प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है

बिहार सरकार कोल्ड स्टोरेज खोलने पर 50% प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है

एकीकृत बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत राज्य में कोल्ड स्टोरेज यूनिट की स्थापना हेतु किसानों को अनुदान देने का निर्णय किया गया है। बिहार राज्य में पारंपरिक खेती समेत बागवानी फसलों का भी उत्पादन किया जाता है। बिहार राज्य के किसान सेब, अंगूर, केला, अनार, आम और अमरूद की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। इससे कृषकों की आय में काफी बढ़ोत्तरी भी हुई है। परंतु, कोल्ड स्टोरेज के अभाव की वजह से किसान उतना ज्यादा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा इस परेशानी को दूर करने के लिए किसानों के फायदे हेतु बड़ा निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश में बागवानी फसलों की खेती में अत्यधिक गति आएगी। साथ ही, कृषकों की आमदनी में भी इजाफा हो सकता है।

कोल्ड स्टोरेज से किसानों को काफी फायदा होगा

बिहार सरकार ऐसा मानती है, कि कोल्ड स्टोरेज होने से किसानों की आमदनी बढ़ जाएगी। बाजार में कम भाव होने पर वह अपनी फसल को कोल्ड स्टोरेज में स्टोर कर सकते हैं। जैसे ही भाव में वृद्धि आएगी, वह इसको बाजार में बेच सकते हैं। इससे अच्छा भाव मिलने से किसानों की आमदनी निश्चित रूप से बढ़ेगी। वैसे भी कोल्ड स्टोर के भीतर बहुत दिनों तक खाद्य पदार्थ बेकार नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में किसान भाई हरी सब्जियों एवं फल की तुड़ाई करने के उपरांत कोल्ड स्टोरेज में रखेंगे तो फसलों का खराब होना भी कम हो पाएगा। साथ ही, काफी समय तक वह खराब नहीं होंगे।

बिहार सरकार किसानों को 4000 रुपये अनुदान स्वरूप प्रदान करेगी

बिहार सरकार द्वारा एकीकृत बागवानी मिशन योजना के चलते कोल्ड स्टोरेज यूनिट (टाइप-1) की स्थापना करने के लिए 8000 रुपये की लागत धनराशि तय की गई है। बिहार सरकार की तरफ से इसके लिए किसान भाइयों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में कृषकों को 4000 रुपये मुफ्त में प्राप्त होंगे। जो किसान भाई इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं, तो वह कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

आम उत्पादन के मामले में बिहार कौन-से स्थान पर है

जानकारी के लिए बतादें, कि बिहार में बागवानी की खेती काफी बड़े पैमाने पर की जाती है। आम के उत्पादन के मामले में बिहार पूरे भारत में चौथे स्थान पर आता है। तो उधर लीची की पैदावार के मामले में बिहार का प्रथम स्थान पर है। मुज्फ्फरपुर की शाही लीची पूरी दुनिया में मशहूर है। बतादें, कि इसके स्वाद की कोई टक्कर नहीं है। इसके उपयोग से जूस एवं महंगी- महंगी शराबें तैयार की जाती हैं।