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बिना लागात लगाये जड़ी बूटियों से किसान कमा रहा है लाखों का मुनाफा

बिना लागात लगाये जड़ी बूटियों से किसान कमा रहा है लाखों का मुनाफा

खेती में नवीन तकनीकों को प्रयोग में लाने के अतिरिक्त किशोर राजपूत ने देसी धान की 200 किस्मों को विलुप्त होने से बचाव किया है, जिनको देखने आज भारत के विभिन्न क्षेत्रों से किसान व कृषि विशेषज्ञों का आना जाना लगा रहता है।

भारत में सुगमता से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। खेती में होने वाले व्यय को कम करके बेहतर उत्पादन प्राप्त करने हेतु आज अधिकाँश किसानों द्वारा ये तरीका आजमा रहे हैं। 

लेकिन छत्तीसगढ़ के एक युवा किसान के माध्यम से वर्षों पूर्व ही प्राकृतिक खेती आरंभ कर दी थी। साथ ही, गौ आधारित खेती करके जड़ी-बूटियां व औषधीय फसलों की खेती की भी शुरूआत की थी। 

किशोर राजपूत नामक इस युवा किसान की पूरे भारतवर्ष में सराहनीय चर्चा हो रही है। शून्य बजट वाली इस खेती का ये नुस्खा इतना प्रशिद्ध हो चूका है, कि इसकी जानकारी लेने के लिए दूरस्थित किसानों का भी छत्तीसगढ़ राज्य के बेमेतरा जनपद की नगर पंचायत नवागढ़ में ताँता लगा हुआ है। 

अब बात करते हैं कम लागत में अच्छा उत्पादन देने वाली फसलों के नुस्खे का पता करने वाले युवा किसान किशोर राजपूत के बारे में।

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किशोर राजपूत को खेती किसानी करना कैसे आया

आमतौर पर अधिकाँश किसान पुत्र अपने पिता से ही खेती-किसानी के गुड़ सीखते हैं। यही बात किशोर राजपूत ने कही है, किशोर पिता को खेतों में अथक परिश्रम करते देखता था, जो उसके लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत साबित हुआ। 

युवा का विद्यालय जाते समय रास्ते में पेड़-पौधों, पशु-पक्षी, हरियाली बहुत आकर्षित करती थी। किशोर ने कम आयु से ही खेतों की पगडंडियों पर मौजूद जड़ी-बूटियों के बारे में रुचि लेना और जानना शुरू कर दिया। 

बढ़ती आयु के दौरान किशोर किसी कारण से 12वीं की पढ़ाई छोड़ पगडंडियों की औषधियों के आधार पर वर्ष २००६ से २०१७ एक आयुर्वेदित दवा खाना चलाया। 

आज किशोर राजपूत ने औषधीय फसलों की खेती कर भारत के साथ साथ विदेशों में भी परचम लहराया है, इतना ही नहीं किशोर समाज कल्याण हेतु लोगों को मुफ्त में औषधीय पौधे भी देते हैं।

किशोर ने कितने रूपये की लागत से खेती शुरू की

वर्ष २०११ में स्वयं आधार एकड़ भूमि पर किशोर नामक किसान ने प्राकृतिक विधि के जरिये औषधीय खेती आरंभ की। इस समय किशोर राजपूत ने अपने खेत की मेड़ों पर कौच बीज, सर्पगंधा व सतावर को रोपा, जिसकी वजह से रिक्त पड़े स्थानों से भी थोड़ा बहुत धन अर्जित हो सके। 

उसके उपरांत बरसाती दिनों में स्वतः ही उत्पादित होने वाली वनस्पतियों को भी प्राप्त किया, साथ ही, सरपुंख, नागर, मोथा, आंवला एवं भृंगराज की ओर भी रुख बढ़ाया। 

देखते ही देखते ये औषधीय खेती भी अंतरवर्तीय खेती में तब्दील हो गई व खस, चिया, किनोवा, गेहूं, मेंथा, अश्वगंधा के साथ सरसों, धान में बच व ब्राह्मी, गन्ने के साथ मंडूकपर्णी, तुलसी, लेमनग्रास, मोरिंगा, चना इत्यादि की खेती करने लगे। 

प्रारंभिक समय में खेती के लिए काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, आरंभ में बेहतर उत्पादन न हो पाना, लेकिन समय के साथ उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है।

अमेरिकी चिया बीज की खेती से किसान भाई कमा रहे हैं जबरदस्त मुनाफा

अमेरिकी चिया बीज की खेती से किसान भाई कमा रहे हैं जबरदस्त मुनाफा

महाराष्ट्र के किसान इन दिनों प्याज और कपास की खेती में बढ़ती हुई लागत और कम होते मुनाफे को देखते हुए परेशान हैं। मंडी में अब इन फसलों के ठीक-ठाक रेट मिलना लगभग मुश्किल सा हो गया है। ऐसे में महाराष्ट्र के नांदेड जिले के किसानों ने अमेरिकी चिया बीज की खेती शुरू की है। इस खेती से स्थानीय किसान जबरदस्त मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे किसान भाइयों की आर्थिक स्थिति तेजी से बदल रही है।

बाजार में है जबरदस्त मांग

इन दिनों अमेरिकी चिया बीज की बाजार में जबरदस्त मांग है। जिसके कारण ये फसल हाथों हाथ बिक जाती है और किसानो को फसल का उचित दाम भी मिलता है। चिया बीज का  उपयोग ज्यादातर दवाइयां बनाने में किया जाता है इसलिए कई बार व्यापारी सीधे किसान के खेत से ही ऐसी फसलें खरीद ले जाते हैं, जिससे किसानों को बाजार में जाकर अपनी फसल को बेंचने में मेहनत नहीं करनी पड़ती। ये भी देखें: किसानों को मिलेगा आसानी से खाद-बीज, रेट में भारी गिरावट हाल ही में नादेड़ में एक किसान ने ढाई एकड़ में अमेरिकी चिया बीज की फसल बोई थी जिसमें उन्हें 11 क्विंटल तक की उपज मिली है। उन्होंने बताया है कि उनकी यह फसल प्रति क्विंटल 70 हजार रुपये के भाव से बिकी है। जिससे उन्हें जबरदस्त मुनाफा हुआ है। किसान ने बताया है कि यह एक ऐसी फसल है जो बेहद कम लागत में ज्यादा उपज देती है, साथ ही इसका दाम भी अन्य फसलों की अपेक्षा ज्यादा रहता है।

मात्र इतनी आती है इस फसल में लागत

किसान ने बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश से साढ़े सात किलो बीज मंगवाया था, जिसके लिए उन्हें 20 हजार रुपये चुकाने पड़े थे। इसके बाद उन्होंने इन बीजों को ढाई एकड़ जमीन में बोया था। किसान ने बताया कि इस फसल पर किसी भी प्रकार के कीट का प्रकोप नहीं पड़ता, साथ ही न इस फसल को किसी भी प्रकार के जानवर खाते हैं। इसलिए इस फसल में अन्य फसलों की अपेक्षा मेहनत भी कम लगती है। चिया बीज की फसल में 7-8 बार सिंचाई करना बेहद जरूरी होता है। इसके अलावा बुवाई के बाद फसल पर किसी भी प्रकार के खाद का छिड़काव करने की जरूरत भी नहीं होती। किसान ने बताया है कि उन्हें इस फसल की खेती करने पर जबरदस्त मुनाफा हुआ है। उन्हें फसल बेंचने पर एक क्विंटल बीजों पर 70 हजार रुपये मिले हैं। उन्हें इस बार 11 क्विंटल उपज हांसिल हुई है, इस हिसाब से उन्होंने अभी तक 7 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। चिया बीज का उपयोग विशेषकर वजन घटाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग और सौंदर्य उपचार में भी इसका बहुतायत से उपयोग किया जाता है इसलिए दवा निर्माता कंपनियों के बीच इसकी जबरदस्त मांग बनी रहती है। किसान ने बताया है कि उसने अन्य फसलों की खेती में घाटा लगने के कारण अमेरिकी चिया बीज की खेती शुरू की थी। जिसके उन्हें अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। अब वो अपने अलावा क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी अमेरिकी चिया बीज की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।