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तरबूज की खेती कैसे करें: होगी लाखों रुपए की कमाई

Published on: 17-Apr-2026
Updated on: 17-Apr-2026

तरबूज की खेती की संपूर्ण जानकारी

तरबूज एक लोकप्रिय ग्रीष्मकालीन फल है, जिसकी उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका में मानी जाती है। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि शरीर को ठंडक देने में भी अत्यंत लाभकारी है। इसमें लगभग 92% पानी होता है, जो गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, खनिज तत्व और कार्बोहाइड्रेट भी पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। दुनिया के कई देशों में तरबूज की खेती की जाती है, और जापान में तो इसे विशेष कांच के डिब्बों में उगाकर चौकोर आकार में तैयार किया जाता है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है।

भारत में तरबूज की खेती कहाँ होती है?

भारत में तरबूज की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। इन क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी तरबूज की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। गर्म और शुष्क जलवायु में इसकी पैदावार बेहतर होती है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ प्राप्त होता है।

उपयुक्त मिट्टी और जल निकास

तरबूज की खेती के लिए उपजाऊ और अच्छे जल निकास वाली भूमि सबसे उपयुक्त होती है। लाल बलुई और मध्यम प्रकार की मिट्टी में इसकी पैदावार उत्कृष्ट होती है। जलभराव वाली भूमि में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे जड़ सड़ने की समस्या हो सकती है। मिट्टी का pH मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए, जिससे पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है।

फसल चक्र का महत्व

अच्छी पैदावार के लिए फसल चक्र अपनाना आवश्यक है। लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है और कीट व रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए तरबूज की खेती को अन्य फसलों के साथ बदल-बदल कर करना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

प्रमुख किस्में और उनकी विशेषताएं

तरबूज की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जो अधिक पैदावार और बेहतर गुणवत्ता प्रदान करती हैं। “Improved Shipper” किस्म बड़े आकार के फलों के लिए जानी जाती है और इसमें 8-9 प्रतिशत मिठास होती है। “Special No.1” जल्दी पकने वाली किस्म है, जबकि “Sugar Baby” गहरे लाल गूदे और 9-10 प्रतिशत मिठास के लिए प्रसिद्ध है। ये किस्में किसानों के लिए लाभदायक साबित होती हैं।

आईसीएआर द्वारा विकसित किस्में

आईसीएआर-आईआईएचआर बैंगलोर द्वारा विकसित किस्में जैसे “Arka Muthu”, “Arka Aiswarya” और “Arka Manik” आधुनिक खेती के लिए बेहद उपयुक्त हैं। Arka Muthu जल्दी पकने वाली किस्म है और 75-80 दिनों में तैयार हो जाती है। Arka Aiswarya में उच्च मिठास और अधिक उत्पादन होता है, जबकि Arka Manik अपने बड़े आकार और उच्च गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। ये किस्में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देती हैं।

अन्य लोकप्रिय और विदेशी किस्में

भारत में विदेशी किस्में भी लोकप्रिय हो रही हैं, जैसे China की Yellow Doll और Red Doll तथा USA की Regency, Royal Sweet और Ferrari। इसके अलावा Asahi Yamato किस्म भी काफी प्रसिद्ध है, जो 95 दिनों में तैयार होती है और इसके फल मध्यम आकार के होते हैं। Varun, Yuvaraj, Aayesha जैसी किस्में भी किसानों के बीच लोकप्रिय हैं।

जमीन की तैयारी

तरबूज की अच्छी खेती के लिए खेत की गहरी जुताई आवश्यक होती है। इसके बाद खेत को समतल करना चाहिए ताकि पानी का उचित निकास हो सके। मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी है, जिससे बीज आसानी से अंकुरित हो सकें। खेत की तैयारी में जैविक खाद का प्रयोग करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।

बुवाई का समय और दूरी

उत्तर भारत में तरबूज की बुवाई जनवरी से मार्च और नवंबर-दिसंबर में की जाती है। बुवाई के लिए उचित दूरी रखना बहुत जरूरी है। कतार से कतार की दूरी 2 से 3.5 मीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 60 सेंटीमीटर होनी चाहिए। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और वे अच्छी तरह विकसित होते हैं।

बुवाई की विधियां और बीज उपचार

तरबूज की बुवाई विभिन्न तरीकों से की जाती है, जैसे क्यारियों, गड्ढों और मेड़ों पर। प्रत्येक विधि में बीज की गहराई 2-3 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बीज को बोने से पहले कार्बेन्डाजिम और ट्राइकोडर्मा से उपचारित करना चाहिए, जिससे रोगों से बचाव होता है और अंकुरण दर बढ़ती है।

खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई

तरबूज की खेती में खरपतवार नियंत्रण बहुत महत्वपूर्ण है। शुरुआती अवस्था में खेत को खरपतवार मुक्त रखना चाहिए, क्योंकि इससे 30 प्रतिशत तक पैदावार प्रभावित हो सकती है। सिंचाई के लिए गर्मियों में सप्ताह में एक बार पानी देना उचित होता है। ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो और फल पर सीधे पानी न पड़े, क्योंकि इससे गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

कटाई, भंडारण और सावधानियां

तरबूज की कटाई तब करनी चाहिए जब फल पूरी तरह पक जाए। पकने की पहचान तने के पास के सूखे रेशों और थपथपाने पर आने वाली आवाज से होती है। कटाई के बाद फलों को ठंडे और नमी वाले स्थान पर रखना चाहिए। इनसे सेब और केले के साथ नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। सही भंडारण से तरबूज 14 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। 

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