Madhuca longifolia: महुआ के पेड़ की उपयोगिताऐं एवं विशेषताऐं क्या हैं?

Published on: 20-Dec-2023

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि आदिवासी जनजातियों में महुआ के पेड़ (mahua ka ped) का अत्यधिक महत्व है। भारत में कुछ समाज इसे कल्पवृक्ष के नाम से भी पुकारते हैं। मध्य एवं पश्चिमी भारत के दूरदराज वनअंचलों में बसे ग्रामीण आदिवासी जनजातियों के लिए रोजगार के साधन तथा खाद्य रूप में mahua ka ped का महत्व बेहद ज्यादा है।

इसे भिन्न–भिन्न राज्यों में विभिन्न स्थानीय नामों से जाना जाता है। हिंदी में मोवरा, इंग्लिश में इंडियन बटर ट्री, संस्कृत में मधुका, गुड पुष्पा आदि जैसे नामों से जाना जाता है। महुआ को संस्कृत में मधुका कहते हैं, जिसका अर्थ है मीठा, जनजातियों में इसके पेड़ को और इससे तैयार पेय को काफी पवित्र माना जाता है।

इसके वृक्ष की शाखा तोडना काफी अशुभ माना जाता है। इस समुदाय के लोग चमत्कारी महुआ के पेड़ को पुश्तैनी जायदाद में शम्मिलित करते हैं। साथ ही, बाकि सम्पति की भांति इस का भी बटवारा करते हैं। इसको सम्पति समझने के प्रमुख कारण इसकी उपयोगिताऐं हैं।

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Madhuca longifolia: महुआ पेड़ का भौगोलिक क्षेत्र 

इस वृक्ष को शुष्क क्षेत्रों में सहजता से उगाया जाता है। यह मध्य भारत के उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन का एक प्रमुख वृक्ष है। इस वृक्ष की मुख्य विशेषता यह है, कि इसे किसी भी भौगोलिक परिस्थिति में उगाया जा सकता है, परंतु ये सबसे शानदार बालुई मृदा में होता है। भारत में ज्यादातर यह वृक्ष उत्तर भारत और मध्य भारत में पाया जाता है।

सामान्य तौर पर पाए जाने वाले राज्य उड़ीसा, आंध्रप्रदेश,  महाराष्ट्र,  गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार हैं। फरवरी में पत्तिया झड़ जाने के पश्चात इसके वृक्ष पर सफेद रंग के फूल लगते हैं, जो की पिछड़ी जनजातियों में उपभोग के लिए भी इस्तेमाल में लिए जाते हैं।

सामान्य तौर पर वृक्ष में फूल फरवरी से अप्रैल माह तक रहता है। इसमें फूल गुच्छों के स्वरुप में लगते हैं एक गुच्छे में 10-60 फूल लगते हैं। उसके पश्चात फल का मौसम जुलाई से अगस्त माह तक रहता है। इसके फल को आम भाषा में कलेंदी से जाना जाता है। जो दिखने में बेहद कुंदरू जैसा दिखता है।

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Madhuca longifolia: mahua ka ped का घरेलू इस्तेमाल भी होता है

भारत के गांव, जनजातियों के बीच इसका इस्तेमाल घरेलू औषधि एवं खाने के तौर पर लिया जाता था, जो कि आज भी कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। आयुर्वेदा में पेड़ से औषधि की भाँति इस्तेमाल किया जाता है।

गर्म क्षेत्रों में इसकी खेती इसके फूलों, बीजों और लकड़ी के लिए की जाती है। पशु–पक्षियों में भी इसका फल अत्यंत पसंदीदा भोजन है।

Madhuca longifolia: महुआ वृक्ष का क्या-क्या औषधीय इस्तेमाल है?

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में यह पाया गया है, कि वृक्ष के कई भागों में अनेक गुण हैं। जैसे– इसके फूल में पीड़ानाशक, यकृत को सुरक्षित, विषाक्त मूत्र वर्धक एवं त्वचा रोधी रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। इसकी पत्तियों में रक्तरोधी, जलन कम करने जैसे गुण विघमान होते हैं।

पत्तियों में पेट के रक्तस्राव, बवासीर जैसे रोगो से संरक्षण करने की भी क्षमता है। mahua ka ped (महुआ के पेड़) का औषधीय उपयोग (Medicinal uses of mahua) इसका फल– अस्थमा,  छाल – मधुमेह, गलेकेटॉन्सिल और बीज – जलन, घाव एवं मधुमेह में इस्तेमाल किया जाता है।

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