गेंदा है औषधीय गुणों से भरपूर जाने सम्पूर्ण जानकारी

Published on: 25-Apr-2024

गेंदे का फूल सुगंध के साथ साथ बहुत सी बीमारियों में भी फायदेमंद होता है। आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे गेंदे के औषिधीय गुणों के बारे में। 

गेंदा बहुत सी बीमारियों में सहायक होता है इसीलिए इसका उपयोग आयुर्वेद में भी किया जाता है। गेंदे के फूल में मिनरल्स, विटामिन बी, विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते है जो बहुत सी बीमारियों से लड़ने में सहायक होते है। 

भारत जैसे राज्य में गेंदे के फूल का बहुत बड़ा महत्व है इसका उपयोग धार्मिक कार्यों के अलावा शादी वगेरा में भी बड़े स्तर पर किये जाते है। आपको जानकार हैरानी होगी गेंदे का फूल बहुत से बीमारियों से लड़ने में भी सहायक है।  

इसके बहुत से औषधीय गुण है जो शरीर के अंदर बहुत सी बीमारियों से लड़ने में सहायक होता है। इसके अलावा गेंदे के फूल का उपयोग मुर्गियों के भोजन के लिए भी किया जाता है, इससे मुर्गी के अंडे की गुणवत्ता में वृद्धि होती है और अंडा आकर्षक भी बनता है। 

गेंदा के फूल से मिलने वाले औषिधीय  गुण 

गेंदा के फूल से मिलने वाले औषधीय गुण बहुत है, जो शरीर के अंदर बहुत सी बीमारियों से लड़ने में सहायक होते है आइये बात करते है गेंदे के फूल से मिलने वाले औषधीय गुणों के बारे में। 

  1. गेंदे की हरी पत्तियों को तोड़कर यदि उसका रस कान में डाला जाए तो कान के दर्द में राहत मिलती है। गेंदे का रस कान में होने वाले दर्द के लिए काफी उपयोगी है। 
  2. गेंदे की पत्तियां रोगाणु रोधी का भी काम करती है। यदि गेंदे की पत्तियों का रस निचोड़ कर खुजली, दिनाय या फोड़ा पर लगाए जाए तो इससे ठीक हो जाता है। 
  3. अपरस की बीमारी( यानी शरीर पर लाल चिकत्ते पड जाना ) में यह रस काफी लाभदायक होता है। 
  4. अंदरूनी चोट या मोच आने पर भी गेंदे की पत्तियों का रस निकाल कर मालिस करने पर यह काफी असरदार होता है। 
  5. यदि गेंदे की पत्तियों का रस निकालकर कटी हुए जगहों या फिर जिस जगह से रक्त बह रहा हो वहा पर लगाने से रक्त को रोका जा सकता है। 
  6. गेंदे के फूल से आरक को निकाल कर पीने से खून साफ़ होता है। 
  7. खूनी बबासीर के लिए इसे काफी उपयोगी माना जाता है। ताजे फूलों का रस निकाल कर पीने से खूनी बबासीर में आराम मिलता है। 

गेंदा की खेती के लिए कैसी भूमि होनी चाहिए ?

गेंदा की खेती के लिए उचित जल निकास वाली भूमि बेहतर मानी जाती है। गेंदे की खेती के लिए मटियार, दोमट और बलुआर मिट्टी को उचित माना जाता है। 

गेंदा की खेती के लिए भूमि की तैयारी 

भूमि की कम से कम 3 से 4 बार जुताई करें, जुताई करने के बाद खेत में पाटा लगाए और भूमि को समतल बना ले। मिट्टी भुरभुरी होने पर खेत में क्यारियां बना दे। 

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गेंदा की व्यावसायिक किस्में कौन सी है ?

  1. अफ्रीकन गेंदा: गेंदे की इस किस्म के पौधे शाखाओ से 1 मीटर तक ऊँचे रहते है। इस किस्म के फूल गोलाकार, पीले और नारंगी रंग में बहुगुणी पंखुड़ियों वाले होते है। इस किस्म में कुछ पौधों की ऊंचाई 20 सेंटीमीटर भी होती है। इसके अलावा इस किस्म के बड़े फूलों का व्यास 7 से 8 सेंटीमीटर होता है। व्यवसाय के दृष्टिकोण से उगाये जाने वाले गेंदे के फूल प्रभेद-पूसा ऑरेंज, अफ़्रीकी येलो और पूसा वसंतु है। 
  2. फ्रांसीसी गेंदा: इस किस्म के पौधों की ऊंचाई 25 से 30 सेंटीमीटर तक होती है। गेंदे की इस किस्म में बहुत फूल आते है, पूरा पौधा फूलों से ढका हुआ होता है। इस प्रजाति की कुछ उन्नत किस्में है: कपिड येलो, बटन स्कोच, बोलेरो और  रेड ब्रोकेट। 

खाद और उर्वरक का उपयोग 

गेंदे के खेत में जुताई से पहले 200 क्विंटल खाद डाले। खाद डालने के बाद खेत की अच्छे से जुताई करें ताकि खाद अच्छे से मिट्टी में मिल जाए। 

उसके बाद खेत में  120 किलो नत्रजन, 80 किलो फॉस्फोरस, 70 किलो पोटाश खेत में प्रति एकड़ के हिसाब से डालें। इसके बाद आखिरी बार जुताई करते वक्त फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा को खेत में डाल दे।  इसके बाद नत्रजन की आधी मात्रा को पौधों की रुपाई के बाद 30 या 40 दिन के अंदर उपयोग करें। 

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