मेरीखेती ने आनंदपुर में जून महीने की किसान पंचायत का भव्य आयोजन किया

Published on: 25-Jun-2024
Updated on: 01-Jul-2024

मेरीखेती प्रतिमाह किसानों को कृषि से जुड़ी आधुनिक और लाभकारी जानकारी प्रदान करने के लिए वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों के साथ गांव-गांव जाकर एक किसान पंचायत का आयोजन कराती है। 

मेरीखेती किसान पंचायत में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को कृषि से अधिक से अधिक लाभ अर्जित करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जाती है।

जून माह की मेरीखेती किसान पंचायत का आयोजन प्रीतम सिंह की अध्यक्षता में ग्राम आनंदपुर जिला गौतमबुद्धनगर (UP) में किया गया। 

किसान पंचायत के दौरान डॉ विपिन कुमार एसोसिएट डायरेक्टर एग्रोनोमी कृषि विज्ञान केंद्र गौतम बुद्ध नगर ने किसानों को धान की नर्सरी, उपज और रोगों से बचाव जैसे अहम विषयों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि धान की नर्सरी के लिए उन्नत किस्म के बीजों का चयन करना अत्यंत जरूरी है। क्योंकि, इसकी वजह से रोग लगने की बिल्कुल संभावना नहीं होती है।

लेकिन, फिर भी धान नर्सरी में उगाये गये पौधों में झुलसा रोग, भूरा धब्बा और टुंग्रो वायरस पनपने लगते हैं। तो इसकी रोकथाम के लिये नाइट्रोजन उर्वरकों का इस्तेमाल कम कर दें। क्योंकि उर्वरकों का सीमा से ज्यादा इस्तेमाल करना इन समस्याओं को पैदा कर सकता है।

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इसके अलावा धान की नर्सरी में जीवामृत या नीम से निर्मित प्राकृतिक कीटनाशक का छिड़काव करें। इससे स्वस्थ नर्सरी और खेतों से अच्छी उपज लेने में बहुत मदद मिलेगी।

अकसर ऐसा देखने को मिलता है, कि धान की नर्सरी में थ्रिप्स, केस वर्म, आर्मी वर्म, और हरे फुदके जैसे कीट पौध पर चिपककर उसको नष्ट कर देते हैं। 

ऐसी स्थिति में पौधशाला को बचाने के लिये नर्सरी से अतिरिक्त पानी को निकालकर बाहर कर दें। किसान चाहें तो नीम से बने कीटनाशक और 12.5 किलोग्राम नीम केक को भी प्रति 10 मीटर वर्ग के हिसाब से नर्सरी में डाल सकते हैं। 

इसके अलावा सिंचाई के पानी में जरूरत के अनुसार केरोसिन मिलाने से भी कीड़ों का प्रकोप समाप्त हो जाता है।

नर्सरी में बुवाई के 10-15 दिन के अंतराल पर कीटनाशक और फफूंदी नाशक छिड़काव करें। रसायन वाले कीटनाशकों के स्थान पर नीम पत्तियों का घोल बनाकर छिड़काव करें। 

नर्सरी में अधिक पानी न भरने दें, जरूरत के अनुसार पानी ही पौध में डालें। पौधों की गलन रोकने के लिये धूप पड़ने पर अतिरिक्त पानी को नर्सरी से निकाल दें। शाम के समय नर्सरी में हल्की सिंचाई करके पानी की बचत करें।

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