घर पर इस तरीके से उगायें चेरी टमाटर, होगा जबरदस्त मुनाफा

Published on: 11-May-2023

भारत में इन दिनों खेती किसानी में लगातार नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। जिससे देश में विदेशी फसलों की खेती भी बेहद आसानी से होने लगी है। अब किसान इन विदेशी फसलों का उत्पादन करके फसल को बाजार में आसानी से बेंच सकते हैं। भारत के बाजार में देखा गया है कि यहां विदेशी फसलों की उपलब्धता कम होती है, ऐसे में  किसानों को बाजार में उन फसलों का मनचाहा दाम मिलता है। जिससे देश के किसान नई तकनीक के द्वारा विदेशी फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं चेरी टमाटर की खेती के बारे में। यह फसल पिछले कुछ सालों से भारतीय किसानों के बीच मशहूर हो रही है। इसे आप अपने बगीचे में भी उगा सकते हैं। चेरी टमाटर की बाजार में कई किस्में उपलब्ध हैं। इनमें काली चेरी ,चेरी रोमा, टोमेटो टो, कर्रेंट और येलो पियर प्रमुख हैं।

किचन गार्डन में इस तरह से उगायें चेरी टमाटर

चेरी टमाटर को आप अपने किचन गार्डन में आसानी से उगा सकते हैं। इसके लिए आप मिट्टी के बर्तनों या गमलों का उपयोग कर सकते हैं। गमलों को तैयार करने के लिए उनकी निचली सतह पर रेत डालें। इसके बाद उसे मिट्टी से भर दें। मिट्टी के साथ वर्मी कंपोस्ट को भी डाल सकते हैं। चेरी टमाटर की बुवाई बीजों के माध्यम से होती है। जिन्हें आप अपने नजदीकी नर्सरी या कृषि बीज भंडार से खरीद सकते हैं। बीजों की गमले में बुवाई कर दें और इसके बाद उनमें समय-समय पर पानी देते रहें। ये भी पढ़े: टमाटर की खेती में हो सकती है लाखों की कमाई : जानें उन्नत किस्में चेरी टमाटर के पौधे को गर्मियों में ज्यादा तो सर्दियों में कम पानी की जरूरत होती है। इसके पौधों को बीमारियों से ज्यादा खतरा रहता है। चेरी टमाटर के पौधों में ज्यादातर फंगल इंफेक्शन का खतरा होता है। इससे बचने के लिए गमले की मिट्टी में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के घोल का छिड़काव किया जा सकता है। यह छिड़काव महीने में ज्यादा से ज्यादा 2 बार कर सकते हैं।

जल्द ही मिलने लगता है उत्पादन

बुवाई के 2 माह के भीतर चेरी टमाटर का पौधा फल देने लगता है। इसका उपयोग सब्जी के साथ-साथ दवाई के रूप में भी किया जाता है। चेरी टमाटर का उपयोग कब्ज की बीमारी में किया जाता है। साथ ही इसका उपयोग कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने में भी किया जाता है। चेरी टमाटर के उपयोग से वजन कम करने में और गठिया रोग को खत्म करने में भी मदद मिलती है।

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