अमरूद की फसल को इन दो बिमारियों से बचाने का वैज्ञानिक तरीका

By: Merikheti
Published on: 28-Nov-2023

अमरूद की फसल में लगने वाले दो रोग फल मक्खी एवं मिली बक्की फसल को पूर्णतय क्षतिग्रस्त कर सकती हैं। इस पर काबू करने के लिए कृषकों को फसल चक्र में तब्दीली से लेकर विभिन्न बातों का ख्याल रखना पड़ेगा। अमरूद एक काफी लोकप्रिय फल है, भारत के अधिकांश कृषकों के द्वारा अमरूद का उत्पादन किया जाता है। यदि देखा जाए तो अमरूद के आर्थिक व व्यावसायिक महत्व के कारण यहां के कृषकों की दिलचस्पी इसकी ओर काफी बढ़ रही है।  ऐसी स्थिति में आज हम कृषकों के लिए अमरूद की फसल में लगने वाली बीमारियां व इसकी रोकथाम की जानकारी लेकर आए हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार गोस्वामी का कहना है, कि अमरूद में सबसे बड़ी दिक्कत बरसात के फसल में फल मक्खी की होती है। इसका सबसे शानदार तरीका फसल चक्र में बदलाव अधिकांश लोग इसको बाहर नियंत्रण भी कहते हैं।

अमरूद में कितनी बार फूल व फल लगते हैं

बतादें, कि अमरूद में दो बार फूल आते हैं और दो बार ही फल लगते हैं। जो बरसात की फसल होती है, उसके फूल अप्रैल माह में आते हैं। यदि किसान अप्रैल माह में उन फूलों को झड़ा दें, तो फल मक्खी पर काबू पा सकते हैं। उसके केवल दो तरीके हैं या तो उसकी प्रूनिंग कर दें अथवा फिर उसमें 10 फीसद यूरिया का घोल स्प्रे कर दें। साथ ही, यदि किसान ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो उसकी दूसरी विधि फेरोमेन ट्रैप है।

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फल मक्खी बीमारी पर इस प्रकार नियंत्रण करें 

पूसा वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार गोस्वामी ने बताया कि अमरूद में लगने वाली फल मक्खी है। उसकी रोकथाम के लिए मिथाइल यनल के ट्रैप वर्तमान में बाजार में उपलब्ध हैं। फेरोमेन ट्रैप के साथ-साथ में ये बैगिंन भी आजकल उपलब्ध हो रही हैं, जोकि एक पॉली प्रोफाइनल ट्यूब है। यदि यह भी कृषकों के पास मौजूद नहीं हैं, तो वह लिफाफे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे मिथाइल यनल ट्रैप के साथ-साथ फिरान ट्रैप के नाम से भी जाना जाता है।  इसके लिए कृषकों को एक बात का विशेष ख्याल रखना है, कि फेरोमोन ट्रैप में रखे रसायन को 15-21 दिन के समयांतराल में बदलना है। दरअसल, इसमें फेरोमेन, मिथाइल यू जनाइल एवं स्पाइनोसस का घोल होता है। इसके पश्चात आपको 30 से 45 दिन के पश्चात बैगिंग करनी है, जिससे फल बेर की आकृति का हो जाएगा। ऐसा करने से फल मक्खी के आक्रमण पर काबू देखने को मिलेगा।

अमरूद की फसल को प्रभावित करने वाली बक्की बीमारी

साथ ही, वर्तमान में अमरूद की फसल में दूसरी परेशानी भी आने लगी हैं, जो मिली बक्की है। यह एक ऐसा रोग है, जिसमें कृषकों को अमरूद के पत्तों में सफेद-सफेद बिल्कुल रुई की भांति इसमें कीड़े नजर आऐंगे। इसकोू काबू करने के लिए आप किसी भी कपड़े धोने वाले पाउडर का घोल बनाकर इसपर स्प्रे कर दें। उसके उपरांत कार्बोसल्फान का लगभग 2 ML प्रति लीटर के हिसाब से आप इस पर घोल का छिड़काव करें।

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