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हरी खाद से किसानों को बड़ा फायदा - यूरिया की बचत और मिट्टी की सेहत में सुधार

Published on: 30-Apr-2026
Updated on: 30-Apr-2026

मिट्टी की घटती उर्वरता और रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से हरी खाद (ग्रीन मैन्योर ) अपनाने की अपील की है। लगातार एक ही जमीन पर खेती करने से मिट्टी में जैविक कार्बन और जरूरी पोषक तत्व तेजी से कम हो रहे हैं। इसके अलावा, रासायनिक खादों का अधिक उपयोग और पशुधन में कमी के कारण गोबर खाद भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में हरी खाद को सबसे सस्ता, आसान और टिकाऊ समाधान बताया गया है, जो मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

हरी खाद क्या होती है?

हरी खाद उन फसलों को कहा जाता है जिन्हें विशेष रूप से उगाकर हरी अवस्था में ही खेत में जुताई करके मिट्टी में मिला दिया जाता है। ये फसलें मुख्य रूप से दलहनी होती हैं, जिनकी जड़ों में पाए जाने वाले राइजोबियम जीवाणु वायुमंडल से नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करते हैं।

इसका मतलब यह है कि जो काम किसान महंगे यूरिया से करते हैं, वही काम ये फसलें प्राकृतिक रूप से मुफ्त में कर देती हैं। हरी खाद के लिए ढैंचा, सन, मूंग, उड़द, लोबिया, ग्वारफली और बरसीम जैसी फसलें प्रमुख मानी जाती हैं।

हरी खाद के प्रमुख फायदे

हरी खाद के उपयोग से किसानों को कई तरह के लाभ मिलते हैं:

  • मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है
  • फॉस्फोरस की उपलब्धता बेहतर होती है
  • जिंक, आयरन, कॉपर और मैग्नीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं
  • मिट्टी की संरचना नरम और भुरभुरी बनती है
  • जल धारण क्षमता बढ़ती है, जिससे सूखे में भी फसल को राहत मिलती है
  • खरपतवारों का प्राकृतिक नियंत्रण होता है
  • मिट्टी में लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है
  • अगली फसल में कीट और रोग का प्रकोप कम होता है
  • रासायनिक उर्वरकों की जरूरत घटती है, जिससे लागत कम होती है

ढैंचा से होगी यूरिया की बड़ी बचत

विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा हरी खाद की सबसे प्रभावी फसल है। यह प्रति एकड़ लगभग 55 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन मिट्टी में जोड़ती है, जो करीब 120 से 130 किलोग्राम यूरिया यानी लगभग 3 बोरी यूरिया के बराबर है।

इसी तरह:

सन से 45–50 किलोग्राम नाइट्रोजन

बरसीम से 48–50 किलोग्राम

लोबिया और ग्वारफली से 22–30 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति एकड़ प्राप्त होती है

हरी खाद की बुवाई का सही समय

कृषि विभाग ने किसानों को सही समय पर बुवाई करने की सलाह दी है:

खरीफ सीजन:

सिंचाई उपलब्ध हो तो मई में छिड़काव विधि से बुवाई करें

असिंचित क्षेत्रों में जून (बारिश से पहले) बुवाई करें

40–50 दिन बाद फसल को हरी अवस्था में जुताई कर मिट्टी में मिला दें

हरी खाद अपनाना किसानों के लिए एक समझदारी भरा कदम है। इससे न केवल यूरिया जैसी महंगी खादों पर खर्च कम होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इस खरीफ सीजन से ही हरी खाद को अपनी खेती का हिस्सा बनाएं, ताकि खेती की लागत घटे और उत्पादन में स्थिरता बनी रहे।

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