मिट्टी जांच क्यों है आवश्यक? जानिए सम्पूर्ण जानकारी

Published on: 15-May-2024
Updated on: 14-Jun-2024

फसल उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य दोनों के लिए संतुलित पौध पोषण बहुत महत्वपूर्ण है। मिट्टी परीक्षण खेत की मिट्टी में उपस्थित विभिन्न प्रमुख और गौण पोषक तत्वों की मात्रा की जानकारी देता है। 

मिट्टी परीक्षण के नतीजों को देखते हुए कृषक बन्धु उर्वरकों का सही मात्रा में उपयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

मिट्टी परीक्षण क्या होता है?

मिट्टी परीक्षण का अर्थ है पौधों की मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्राओं का रासायनिक परीक्षणों द्वारा आंकलन करना और विभिन्न मृदा विकास विशेषताओं जैसे मृदा लवणीयता, क्षारीयता और अम्लीयता की जांच करना। फसल उत्पादन के लिए मिट्टी परीक्षण बहुत आवश्यक है।

ये भी पढ़ें: मृदा संरक्षण की विधि एवं इससे होने वाले फायदे

मिट्टी के कितने परीक्षण होते हैं?

पौधों के सही विकास और वृध्दि के लिए सामान्य रूप से सोलह पोषक तत्व आवश्यक हैं। 

पौधे वायु और पानी से प्रायः पहले तीन पोषक तत्व (कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन) प्राप्त करते हैं, शेष 13 पोषक तत्व नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्निशियम और सल्फर) भूमि से प्राप्त होते हैं।

आमतौर पर, ये सभी पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से जमीन में उपलब्ध रहते हैं। खेत में लगातार फसल लगने से मिट्टी से इन सभी आवश्यक तत्वों का बहिष्कार होता रहता है। 

जब पौधों को अच्छी तरह से पोषित नहीं किया जाता, तो फसलों की वृद्धि सही नहीं हो पाती, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और रोगों, कीटों और अन्य रोगों से संक्रमित होने की अधिक संभावना रहती है। 

नतीजतन, फसल उत्पादन कम होता है और अतिरिक्त उर्वरक भी महंगे होते जा रहे हैं। वास्तव में, खेत में इन पोषक तत्वों का उपयोग सिर्फ आवश्यकतानुसार किया जा सकता है और इससे खेती को लाभ मिल सकता है। 

मिट्टी परीक्षण ही खेतो में उर्वरक की सही मात्रा का पता लगा सकता है। इसलिए, उर्वरकों का अधिकतम उपयोग करने और अधिक फसल उत्पादन करने के लिए मिट्टी परीक्षण अनिवार्य है।

ये भी पढ़ें: मृदा की उर्वरता को बढ़ाने वाला बायोचार कैसे तैयार किया जाता है?

मिट्टी परीक्षण के लाभ क्या है?

  • खेत में खाद और उर्वरक की मात्रा की सिफारिश करने के लिए मिट्टी में पोषक तत्वों के स्तर की जांच करके फसल और किस्म के अनुसार तत्वों की सन्तुलित मात्रा का निर्धारण किया जा सकता है। 
  • मृदा उर्वरता मानचित्र बनाना, यह मानचित्र विभिन्न फसल उत्पादन योजनाओं का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण है और प्रत्येक क्षेत्र में उर्वरक उपयोग की जानकारी प्रदान करता है।
  • मृदा की क्षारीयता, अम्लीयता, लवणीयता और मृदा अम्लीयता की पहचान और सुधार करने के लिए सुधारकों की मात्रा और प्रकार की सिफारिश कर कृषि योग्य जमीन बनाने के लिए महत्वपूर्ण सलाह और सुझाव मिलता है।
  • फल के बाग लगाने के लिएभूमि की उपयुक्तता का पता लगाना।

मिट्टी परीक्षण के लिए नमूना कैसे एकत्रीत करे?

खेत में मिट्टी का नमूना जिग-जैग से घूमाकर दस से पंद्रह स्थानों पर निशान लगाकर लेना चाहिए, ताकि सभी क्षेत्रों को शामिल किया जा सके।

खेत में जहा स्थानो का चयन किया गया है उनकी उपरी सतह से घास-फूस, कूडा आदि करकट हटा दे।

हर जगह 15 सें.मी. (6 -9 इंच) गहरा V आकार का गङ्ढा खोदे। गड्डे को साफ करने के बाद, खुरपी से एक तरफ उपर से नीचे तक 2 सेमी मोटी मिट्टी की तह को निकाल ले, फिर इसे ट्रे या साफ बाल्टी में डाल दें।

तैयार मिट्टी को हाथ से अच्छी तरह मिलाकर साफ कपडे पर डालकर गोल ढेर बना लें। अंगूली से ढेर को चार बराबर भागों में बाँध दें। अब बाकी दो हिस्सों की मिट्टी को फिर से अच्छी तरह से मिलाकर गोल बनाओ। जब तक लगभग आधा किलो मिट्टी रह जाती है, इस प्रक्रिया को दोहराया जाना चाहिए। 

सूखे मिट्टी नमूने को एक साफ प्लास्टिक थैली में डाल दें, फिर इसे कपड़े की थैली में डाल दें। नमूने के साथ एक सूचना पत्रक, जिस पर पूरी जानकारी लिखी हो, एक प्लास्टिक की थैली में अंदर और कपड़े की थैली के बाहर बांध दें। 

खेत की मिटटी से तैयार नमूनों को मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला भेजे वहां इसकी जांच होगी।

श्रेणी