डीएसआर तकनीकी से धान रोपने वाले किसानों को पंजाब सरकार दे रही है ईनाम

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12 हजार हेक्टेयर जमीन में डीएसआर तकनीकी से धान की खेती करने का शासन ने दिया है लक्ष्य

चंडीगढ़।
पंजाब सरकार कृषि विभाग डीएसआर तकनीकी (डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस तकनीक) या सीधी बिजाई से धान की खेती करने वाले किसानों को ईनाम दे रही है। इस तकनीकी से धान की रोपाई करने से 35 फीसदी पानी की बचत होती है। जिसे ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा पूरे राज्य के किसानों को 12 लाख हेक्टेयर जमीन में डीएसआर तकनीकी से धान की फसल करने का लक्ष्य दिया है। हालांकि अभी 77 हजार हेक्टेयर में ही डीएसआर तकनीकी से धान की खेती की जा रही है, जो लक्ष्य से काफी पीछे है। राज्य सरकार ने इस तकनीकी से धान की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपए ईनाम देने की घोषणा की है।

बढ़ा दी गई है डीएसआर से खेती करने की तारीख

– कृषि विभाग ने धान की सीधी बुवाई करने के लिए पहले 30 जून तक का समय दिया था। लेकिन लक्ष्य से पीछे रहने के कारण इसकी तारीख अब 4 जुलाई कर दी गई है। जानकारी मिल रही है कि अभी इसका समय और बढ़ाया जाएगा। ताकि ज्यादा से ज्यादा जमीन पर डीएसआर तकनीकी से धान की फसल हो सके।

जानें क्या है डीएसआर तकनीकी?

– यहां किसानों को यह समझने की जरूरत है कि आखिर डीएसआर तकनीकी क्या है? डीएसआर तकनीकी में धान के बीज को सीधे खेत में लगाया जाता है। इसमें धान की नर्सरी बनाने की आवश्यकता नहीं होती है। जिसे प्रसारण बीज विधि (डीएसआर) कहा जाता है। इसके लिए खेत की जमीन समतल होनी चाहिए।

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‘प्रसारण बीज विधि’ के फायदे एवं नुकसान

– प्रसारण बीज विधि (डीएसआर) के तहत धान की फसल करने वाले किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस विधि से खेती करने के कितने फायदे एवं नुकसान हैं।

फायदे

– डीएसआर तकनीकी से धान की फसल को सीधे ड्रिल किया जाता है। इससे पानी की 35% तक बचत होती है। इसमें बासमती किस्म के धान की अच्छी रोपाई होती है। इस विधि से धान की खेती करने पर सरकार से ईनाम दिया जा रहा है।

नुकसान

– डीएसआर तकनीकी से धान की फसल करने से खेत में खरपतवार होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। धान रोपाई की अपेक्षा फसल लेट हो सकती है। किसानों के लिए पानी की सप्लाई भी बेहतर ढंग से करना मुश्किल हो सकता है।

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लोकेन्द्र नरवार

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