बिहार के मसूर उत्पादक किसानों के लिए इस रबी सीजन में एक बड़ी राहत सामने आई है। NAFED (नेफेड) को राज्य में मसूर दाल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधी खरीद की मंजूरी मिल गई है। यह निर्णय किसानों के लिए न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगा, बल्कि उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से भी राहत देगा। अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए निजी व्यापारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ गई है।
बिहार में अब तक MSP पर मुख्य रूप से धान और गेहूं की ही खरीद होती रही है। मसूर जैसी दलहनी फसलों को इस दायरे में शामिल करना एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह पहली बार है जब किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा राज्य में मसूर की सीधी खरीद की जाएगी। इससे दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरणा मिलेगी।
इस रबी सीजन में लगभग 32,000 मीट्रिक टन मसूर दाल खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य में कुल उत्पादन का अनुमान करीब 1.37 लाख मीट्रिक टन है, ऐसे में इस लक्ष्य को हासिल करना संभव माना जा रहा है। यह खरीद Price Support Scheme (PSS) (PSS) के तहत की जाएगी, जिससे किसानों को MSP का पूरा लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
मौजूदा समय में खुले बाजार में मसूर का भाव लगभग 6,300 से 6,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है, जबकि MSP 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस अंतर के कारण किसानों को सरकारी खरीद के माध्यम से प्रति क्विंटल अधिक लाभ मिलेगा। यह अंतर किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकता है, खासकर उन किसानों के लिए जो छोटे और सीमांत हैं।
खरीद प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए इसे प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और व्यापार मंडलों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया आधार आधारित होगी, जिससे फर्जीवाड़े और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वास्तविक किसानों को ही लाभ मिले और पूरी प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे।
इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान मात्र तीन दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था डिजिटल और आधार आधारित होगी, जिससे भुगतान में देरी या किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी। इससे किसानों का विश्वास सरकारी व्यवस्था में और मजबूत होगा।
राज्य सरकार ने इस योजना को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इसे तेजी से लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि देश में दलहन उत्पादन को भी बढ़ावा देगी और आयात पर निर्भरता को कम करेगी।
किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए समय पर रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक होगा। राज्य सरकार द्वारा खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां किसान अपनी उपज बेच सकेंगे। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में अन्य दलहनी फसलों को भी MSP के दायरे में लाया जा सकता है। इस प्रकार यह पहल कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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