Budget 2026: ‘भारत विस्तार’ से कृषि में डिजिटल और AI क्रांति की शुरुआत

Published on: 01-Feb-2026
Updated on: 01-Feb-2026
Budget 2026: ‘भारत विस्तार’ से कृषि में डिजिटल और AI क्रांति की शुरुआत
समाचार सरकारी योजनाएं

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। केंद्रीय बजट 2026-27 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘भारत विस्तार’ नामक एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म की घोषणा की, जिसे कृषि के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। यह एक मल्टीलिंगुअल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्लेटफॉर्म होगा, जिसे एग्रीस्टैक पोर्टल और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) द्वारा विकसित वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के साथ एकीकृत किया जाएगा। 

इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों, संसाधनों और सलाह तक सरल, तेज़ और सटीक पहुंच उपलब्ध कराना है, ताकि वे डेटा-आधारित निर्णय लेकर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकें। सरकार का मानना है कि AI और डिजिटल तकनीक का यह समावेश खेती के पारंपरिक तरीकों में बड़ा बदलाव लाएगा और किसानों के सामने मौजूद अनिश्चितताओं व जोखिमों को काफी हद तक कम करेगा।

AI आधारित सलाह से उत्पादकता में वृद्धि और जोखिम में कमी

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि ‘भारत विस्तार’ प्लेटफॉर्म किसानों को उनकी ज़मीन, फसल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कस्टमाइज़्ड सलाह प्रदान करेगा। यह सलाह फसल चयन, मौसम की सटीक जानकारी, मिट्टी की स्थिति, बाजार के रुझान और वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों पर आधारित होगी। 

एग्रीस्टैक पोर्टल को ICAR के प्रमाणित प्रैक्टिस पैकेजों से जोड़ने के बाद यह प्लेटफॉर्म किसानों को बेहतर योजना बनाने, उत्पादन बढ़ाने और जलवायु या बाजार से जुड़ी अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान वास्तविक ज़मीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सही समय पर सही निर्णय ले सकें, जिससे उनकी आय में स्थिरता आए और खेती अधिक टिकाऊ बने।

देश की बड़ी कृषि-आधारित आबादी के लिए बड़ा लाभ

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि भारत की लगभग 46.1 प्रतिशत कार्यबल आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है, जैसा कि PLFS 2023-24 के आंकड़े दर्शाते हैं। ऐसे में ‘भारत विस्तार’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकते हैं, जिनके पास अक्सर आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सलाह की सीमित पहुंच होती है। 

यह पहल सरकार के “विकसित भारत” के विज़न के अनुरूप है, जिसके तहत प्रिसीजन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देकर किसानों को तकनीक से जोड़ने पर ज़ोर दिया जा रहा है। डिजिटल समाधानों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

ग्रामीण विकास और कृषि सुधारों से तेज़ विकास दर

वित्त मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार ने बीते वर्षों में किसानों और ग्रामीण नागरिकों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार लागू किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, कृषि उत्पादकता में सुधार करना, किसान परिवारों की क्रय शक्ति को मजबूत करना और कृषि समुदायों को व्यापक व सार्वभौमिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। 

इन नीतिगत प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव यह रहा है कि कृषि क्षेत्र ने लगभग 7 प्रतिशत की मजबूत विकास दर हासिल की है, जिससे ग्रामीण गरीबी कम करने और गांवों में जीवन स्तर सुधारने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है।

हाई-वैल्यू खेती और फसल विविधीकरण पर विशेष ज़ोर

केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली खेती (हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर) को बढ़ावा देने का स्पष्ट संकेत दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना, उनकी उत्पादकता बढ़ाना, आय में इजाफा करना और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा करना है। 

केंद्र सरकार नारियल, चंदन और अखरोट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को विशेष समर्थन प्रदान करेगी। वित्त मंत्री ने नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए एक विशेष ‘नारियल प्रमोशन स्कीम’ का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में पुराने और गैर-उत्पादक पेड़ों के स्थान पर नई, उन्नत और अधिक उत्पादक किस्मों के पौधे लगाए जाएंगे।

काजू, कोकोआ और चंदन के लिए विशेष राष्ट्रीय कार्यक्रम

इसके अतिरिक्त, सरकार काजू और कोकोआ की खेती, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित विशेष कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है। इस पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर बनाना, निर्यात में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और वर्ष 2030 तक भारतीय काजू व कोकोआ को एक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। 

इसके तहत प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, चंदन जैसी सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसल के संरक्षण, उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर इसके पूरे इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम करेगी।

बजट 2026 की अन्य अहम घोषणाएं

कृषि के साथ-साथ बजट भाषण में वित्त मंत्री ने अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। देशभर में 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त भारतीय क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का एक राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। 

इसके अलावा, पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को रोजगार सृजन के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में की गई ये घोषणाएं कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के समग्र, टिकाऊ और तकनीक-आधारित विकास के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।