ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा-पत्र: कृषि और किसानों के लिए 4 बड़ी पहल

Published on: 21-Sep-2026
Updated on: 21-Sep-2026

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में क्या है खास?

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन, कृषि, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और तकनीक समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। सम्मेलन में जारी नई दिल्ली घोषणा-पत्र में वैश्विक स्तर के कई अहम विषयों को शामिल किया गया है। इसमें पेरिस समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बौद्धिक संपदा, दुर्लभ खनिज, अंतरिक्ष सहयोग और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सुधार जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया है। कृषि और किसानों से जुड़े सहयोग को भी घोषणा-पत्र में खास जगह मिली है। सदस्य देशों के बीच कृषि तकनीक, अनुभव और बेहतर खेती के तरीकों को साझा करने पर जोर दिया गया है।

कृषि और किसानों के मुद्दों को क्यों मिली जगह?

ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था और लोगों की आजीविका में कृषि की बड़ी भूमिका है। बड़ी संख्या में लोग खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े कामों पर निर्भर हैं। ऐसे में कृषि से जुड़े मुद्दे सभी सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में बदलाव, अनियमित बारिश, सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं खेती को प्रभावित कर रही हैं। इसके अलावा खेती की बढ़ती लागत, पानी की कमी और बाजार में उतार-चढ़ाव भी किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में सदस्य देशों के बीच कृषि से जुड़ी तकनीक, अनुसंधान और अनुभव साझा करने से नए समाधान खोजने में मदद मिल सकती है। इससे टिकाऊ खेती और खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।

किसानों से जुड़ी चार नई पहलों पर जोर

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि और किसानों से जुड़े चार नए सहयोग क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इनका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत कृषि से जुड़ी तकनीकी जानकारी, अनुभव और बेहतर खेती के तरीकों को साझा करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे अलग-अलग देशों में विकसित कृषि तकनीकों की जानकारी दूसरे देशों तक पहुंच सकती है। कृषि अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। कम पानी में खेती, मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और खेती की लागत कम करने जैसे उपाय इस सहयोग के तहत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश इन्हें जमीन पर किस तरह लागू करते हैं।

जलवायु परिवर्तन से निपटने पर भी जोर

घोषणा-पत्र में जलवायु परिवर्तन को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। इसमें पेरिस समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई है। बदलते मौसम का खेती पर सीधा असर पड़ता है। तापमान बढ़ने, बारिश के समय में बदलाव, सूखा और अचानक भारी बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है। इसका असर किसानों की आय और खाद्य उत्पादन पर भी पड़ सकता है। इसलिए जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना जरूरी है। पानी का बेहतर प्रबंधन, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा तथा कम संसाधनों में टिकाऊ उत्पादन जैसे उपाय किसानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। ब्रिक्स देशों के बीच ऐसे उपायों और तकनीकों का आदान-प्रदान कृषि क्षेत्र को बदलते मौसम के अनुकूल बनाने में मदद कर सकता है।

एआई और डिजिटल तकनीक से खेती को मिल सकता है फायदा

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में एआई और डिजिटल तकनीक को भी महत्व दिया गया है। कृषि में तकनीक की मदद से मौसम की जानकारी, फसल की निगरानी, रोगों की पहचान और सिंचाई प्रबंधन जैसे काम बेहतर तरीके से किए जा सकते हैं। उपग्रह और डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को फसल और मौसम से जुड़ी जानकारी देने में मदद कर सकते हैं। यदि ब्रिक्स देशों के बीच कृषि से जुड़ी नई तकनीक और डिजिटल समाधान साझा किए जाते हैं, तो किसानों को खेती से जुड़े फैसले लेने में बेहतर तकनीकी सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए किसानों तक इंटरनेट, डिजिटल उपकरण और तकनीकी प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ाना जरूरी होगा। स्थानीय भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

दुर्लभ खनिज और अंतरिक्ष सहयोग भी अहम

घोषणा-पत्र में दुर्लभ खनिज और अंतरिक्ष सहयोग जैसे विषय भी शामिल हैं। दुर्लभ खनिज आधुनिक तकनीक और कई उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। वहीं अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल मौसम की जानकारी, आपदा प्रबंधन और पृथ्वी की निगरानी में किया जाता है। कृषि के लिए भी इसका महत्व है। उपग्रहों से प्राप्त जानकारी के जरिए फसल, भूमि, मौसम और जल संसाधनों की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इससे फसल प्रबंधन और कृषि योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में भी अंतरिक्ष तकनीक उपयोगी हो सकती है।

डब्ल्यूटीओ सुधार और बौद्धिक संपदा पर चर्चा

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में डब्ल्यूटीओ में सुधार और बौद्धिक संपदा से जुड़े मुद्दों को भी जगह दी गई है। वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव का असर कृषि उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर पड़ सकता है। कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए बाजार तक पहुंच, व्यापार नियम और देशों के बीच सहयोग जरूरी है। ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर समन्वय से कृषि व्यापार से जुड़े मुद्दों पर साझा प्रयास किए जा सकते हैं। वहीं बौद्धिक संपदा के तहत कृषि अनुसंधान, नई तकनीक, बीज और वैज्ञानिक नवाचार से जुड़े अधिकार महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग से नई तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा मिल सकता है।

किसानों के लिए क्या मायने रखता है?

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि को लेकर बनी सहमति को किसानों के लिए सीधे मिलने वाली नई सरकारी योजना या आर्थिक सहायता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि सहयोग को मजबूत करना है। यदि तय किए गए सहयोग को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो लंबे समय में किसानों को नई कृषि तकनीक, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल समाधान और बेहतर कृषि ज्ञान का लाभ मिल सकता है। खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यापार के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, घोषणा-पत्र में कृषि और किसानों से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जाना यह दिखाता है कि खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती, जलवायु परिवर्तन और कृषि तकनीक अब वैश्विक सहयोग के महत्वपूर्ण विषय हैं। इन फैसलों का वास्तविक फायदा किसानों तक कितना पहुंचेगा, यह आगे होने वाले काम और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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