हरियाणा में मत्स्य पालकों को बड़ी राहत: कृषि फीडर पर 10 पैसे प्रति यूनिट बिजली, नई लैब और मछली मंडियां भी बनेंगी

Published on: 27-Oct-2026
Updated on: 28-Oct-2026

हरियाणा सरकार राज्य में मत्स्य पालन और झींगा पालन को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मत्स्य पालकों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ जांच प्रयोगशालाओं, आधुनिक मछली मंडियों और प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार की योजना के तहत हिसार और फरीदाबाद में ₹100 करोड़ की लागत से दो आधुनिक मछली मंडियां विकसित की जाएंगी। वहीं, यमुनानगर, रोहतक और फरीदाबाद में ₹6.04 करोड़ खर्च करके तीन नई मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन पहलों का उद्देश्य मत्स्य पालकों की उत्पादन लागत घटाना, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देना और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाना है।

हरियाणा के कृषि, किसान कल्याण एवं मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक के बाद इन योजनाओं की जानकारी दी। बैठक में विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन, निदेशक पवन कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित योजनाओं को लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत बिजली दरों में रियायत देने के साथ मत्स्य पालन से जुड़ी तकनीकी और विपणन सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।

कृषि फीडर से बिजली लेने वाले मत्स्य पालकों को मिलेगी 10 पैसे प्रति यूनिट की दर

हरियाणा सरकार ने मत्स्य एवं झींगा पालन से जुड़े किसानों के लिए बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। कृषि फीडर से जुड़े मत्स्य पालकों को अब मात्र 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है। इससे तालाबों में पानी की आपूर्ति और पालन से संबंधित अन्य जरूरी कार्यों में बिजली पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

वहीं, गैर-कृषि फीडर से बिजली लेने वाले मत्स्य पालकों को भी राहत दी गई है। एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) और कृषि उद्योग श्रेणी के अंतर्गत बिजली की दर ₹6.60 प्रति यूनिट से घटाकर ₹4.75 प्रति यूनिट कर दी गई है। इसके साथ ही स्वीकृत बिजली लोड की सीमा 20 किलोवाट से बढ़ाकर 40 किलोवाट कर दी गई है। इस फैसले से अधिक बिजली की जरूरत वाले तालाबों और झींगा पालन इकाइयों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बिजली खर्च में कमी आने से मत्स्य पालकों की कुल उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।

यमुनानगर, रोहतक और फरीदाबाद में बनेंगी तीन नई मृदा एवं जल परीक्षण लैब

मत्स्य पालन में मिट्टी और पानी की गुणवत्ता का विशेष महत्व होता है। इसे ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने तीन जिलों में नई मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की स्वीकृति के बाद यमुनानगर, रोहतक और फरीदाबाद में इन प्रयोगशालाओं के निर्माण पर कुल ₹6.04 करोड़ खर्च किए जाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनके मार्च 2027 तक शुरू होने की संभावना है।

इन प्रयोगशालाओं में तालाबों की मिट्टी और पानी की जांच कराई जा सकेगी। जांच के नतीजों के आधार पर मत्स्य पालक पालन के लिए उपयुक्त परिस्थितियों का आकलन कर सकेंगे और जरूरी सुधारों की योजना बना सकेंगे। पानी की गुणवत्ता, मिट्टी की स्थिति और अन्य जरूरी मानकों की जानकारी मिलने से मछलियों तथा झींगों के बेहतर विकास के लिए उचित प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। इससे उत्पादन संबंधी फैसले लेने में भी आसानी हो सकती है।

हिसार और फरीदाबाद में ₹100 करोड़ से विकसित होंगी आधुनिक मछली मंडियां

हरियाणा में मत्स्य उत्पादों के विपणन को बेहतर बनाने के लिए हिसार और फरीदाबाद में दो आधुनिक मछली मंडियां स्थापित करने की योजना बनाई गई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत इन दोनों परियोजनाओं पर कुल ₹100 करोड़ खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। फिलहाल इन मंडियों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।

आधुनिक मछली मंडियों के निर्माण से मछली और झींगा उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे मत्स्य पालकों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने के लिए सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। बेहतर विपणन सुविधाएं विकसित होने से मत्स्य पालन व्यवसाय को संगठित करने और उत्पादों की बिक्री प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

करनाल में ₹50 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक मछली प्रसंस्करण प्लांट

मत्स्य क्षेत्र में प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार करने के लिए करनाल में ₹50 करोड़ की लागत से आधुनिक मछली प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जा रही है। इस परियोजना का निर्माण कार्य दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रसंस्करण इकाई विकसित होने से मछली उत्पादों को बाजार के लिए तैयार करने, उनके रखरखाव और प्रसंस्करण संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है। इससे राज्य में मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकारी मत्स्य बीज फार्मों के नवीनीकरण पर ₹20.48 करोड़ खर्च

हरियाणा सरकार मत्स्य पालन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। इसके तहत कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर और रोहतक के सांपला स्थित सरकारी मत्स्य बीज फार्मों का नवीनीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इन कार्यों पर कुल ₹20.48 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं।

मत्स्य बीज फार्मों की सुविधाओं में सुधार होने से मत्स्य पालकों को बेहतर गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज पालन की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उत्पादन की संभावनाओं को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

हरियाणा में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल

हरियाणा सरकार की इन योजनाओं में बिजली की दरों में राहत देने से लेकर मिट्टी और पानी की जांच, आधुनिक मछली मंडियों, प्रसंस्करण इकाई और सरकारी मत्स्य बीज फार्मों के विकास तक कई महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य मत्स्य एवं झींगा पालकों की लागत कम करना, उत्पादन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना और विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

यदि इन परियोजनाओं को निर्धारित समय के अनुसार पूरा किया जाता है, तो राज्य में मत्स्य पालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को बेहतर तकनीकी सहायता तथा बाजार संबंधी सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे हरियाणा में मत्स्य पालन और झींगा पालन को एक लाभकारी कृषि-आधारित व्यवसाय के रूप में विकसित करने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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