पीएम-कुसुम 2.0 लॉन्च: किसानों की आय को दोगुना करने की नई योजना

Published on: 12-May-2026
Updated on: 12-May-2026

पीएम-कुसुम 2.0: किसानों के लिए नई उम्मीद

केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना का दूसरा चरण लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। पीएम-कुसुम 2.0 का उद्देश्य केवल किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादक बनाकर अतिरिक्त आय का अवसर देना भी है। इस योजना के जरिए सरकार खेती और सौर ऊर्जा को एक साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इस योजना का कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है। विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा पूरी हो चुकी है और आने वाले कुछ हफ्तों में इसे मंजूरी मिलने की संभावना है। मंजूरी मिलने के बाद योजना को चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

फल और सब्जी किसानों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

पीएम-कुसुम 2.0 (PM-KUSUM 2.0) का सबसे बड़ा लाभ फल, सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों को मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत खेतों में ऊंचे ढांचे पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे ताकि खेती और बिजली उत्पादन दोनों एक साथ हो सकें। इन पैनलों की ऊंचाई इतनी रखी जाएगी कि नीचे खेती का काम बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, टमाटर, बैंगन, पपीता, आम और कई सब्जियां आंशिक छाया में बेहतर उत्पादन देती हैं। ऐसे में खेतों में लगे सोलर पैनल फसलों को आवश्यक छाया भी प्रदान करेंगे। इससे किसानों को एक तरफ अच्छी पैदावार मिलेगी और दूसरी तरफ बिजली उत्पादन से अतिरिक्त कमाई भी होगी।

यह मॉडल खासकर उन किसानों के लिए फायदेमंद होगा जिनके पास बागवानी या सब्जी उत्पादन की खेती है। इससे भूमि का बेहतर उपयोग होगा और खेती की लागत भी कम हो सकती है।

एग्री-पीवी मॉडल से बदलेगी खेती की तस्वीर

सरकार पीएम-कुसुम 2.0 (PM KUSUM 2.0 Yojana) के तहत एग्री-पीवी मॉडल को बढ़ावा देगी। इस मॉडल में सोलर पैनल खेतों में कम से कम 2.1 मीटर ऊंचाई पर लगाए जाएंगे ताकि फसलों को पर्याप्त धूप और छाया दोनों मिल सकें। यह तकनीक खेती और बिजली उत्पादन का संतुलित मॉडल मानी जा रही है।

इस प्रणाली के जरिए खेत की उत्पादकता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। किसान पहले की तरह खेती कर सकेंगे और साथ ही सौर ऊर्जा उत्पादन भी जारी रहेगा। इससे खेती को नई तकनीकी पहचान मिलेगी।

सरकार ने इस योजना के तहत लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा उत्पादन की नई क्रांति देखने को मिल सकती है। इससे देश की हरित ऊर्जा क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा।

किसानों को मिलेगी दोहरी आय

पीएम-कुसुम 2.0 किसानों के लिए दोहरी आय का बड़ा अवसर लेकर आ रही है। किसान एक ओर अपनी फसल बेचकर आय प्राप्त करेंगे, वहीं दूसरी ओर सौर ऊर्जा उत्पादन से अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। खेतों में उत्पन्न बिजली को ग्रिड में बेचने की सुविधा मिलने से हर महीने नियमित आय का स्रोत तैयार होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी जोत वाले किसानों को सालाना लाखों रुपये तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक मजबूती आएगी और किसानों की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी।

कई किसान मौसम की मार और बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण नुकसान झेलते हैं। लेकिन यदि उनके पास बिजली उत्पादन से नियमित आय का स्रोत होगा तो उनकी आर्थिक निर्भरता केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगी। यह मॉडल किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डीजल पंपों से मिलेगी राहत

योजना का एक प्रमुख उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल पंपों को खत्म करना भी है। वर्तमान समय में बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए डीजल पंपों पर निर्भर हैं, जिससे उनकी लागत काफी बढ़ जाती है। डीजल की बढ़ती कीमतें किसानों की कमाई पर सीधा असर डालती हैं।

पीएम-कुसुम 2.0 के तहत सरकार सिंचाई व्यवस्था को पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित बनाने पर जोर दे रही है। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप किसानों को सस्ती और लगातार बिजली उपलब्ध कराएंगे। इससे किसानों को दिन और रात दोनों समय सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।

डीजल पंपों की जगह सोलर पंपों के उपयोग से प्रदूषण भी कम होगा। इसके अलावा किसानों की ईंधन पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।

50 हजार करोड़ रुपये के बड़े बजट की तैयारी

सरकार पीएम-कुसुम 2.0 के लिए लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का बड़ा बजट तैयार कर रही है। यह मौजूदा योजना की तुलना में करीब 45 प्रतिशत अधिक है। इससे साफ है कि सरकार इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है।

नई योजना में विकेंद्रीकृत सोलर प्लांट, फीडर लेवल सोलराइजेशन और बैटरी स्टोरेज पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बैटरी स्टोरेज की मदद से रात के समय भी बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे किसानों को लगातार ऊर्जा मिल सकेगी और बिजली आपूर्ति की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र में ऊर्जा संकट कम होगा। इसके अलावा देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण योगदान देगी।

पहली पीएम-कुसुम योजना क्यों रही पीछे

वर्ष 2019 में शुरू हुई पीएम-कुसुम योजना से सरकार को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इसकी प्रगति लक्ष्य के अनुसार नहीं हो सकी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कंपोनेंट-ए में 10 हजार मेगावाट लक्ष्य के मुकाबले केवल 1,052.95 मेगावाट क्षमता ही स्थापित हो सकी।

इसी तरह फीडर लेवल सोलराइजेशन में 35.13 लाख पंपों के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 14.24 लाख पंप ही सोलराइज्ड हो पाए। हालांकि इस योजना से 21.77 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला, लेकिन कई चुनौतियों के कारण योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।

वित्तीय समस्याएं, ग्रिड कनेक्टिविटी की कमी, जागरूकता का अभाव और तकनीकी दिक्कतें इसके प्रमुख कारण रहे। कई किसानों को योजना की प्रक्रिया समझने में कठिनाई हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में बैंकिंग और सब्सिडी से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। अब सरकार इन्हीं कमियों को दूर कर पीएम-कुसुम 2.0 को ज्यादा प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है।

किसानों के लिए सुनहरा अवसर साबित होगी योजना

यदि पीएम-कुसुम 2.0 तय समय पर लागू होती है, तो यह किसानों के लिए खेती के साथ कमाई बढ़ाने का बड़ा अवसर बन सकती है। खासकर फल, सब्जी और बागवानी करने वाले किसानों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।

यह योजना किसानों को केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं बल्कि ऊर्जा उत्पादक बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर 

भी पैदा हो सकते हैं। सौर ऊर्जा परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर तकनीकी और रखरखाव से जुड़े रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।

कृषि और ऊर्जा के इस संयोजन से देश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सकती है। आने वाले समय में पीएम-कुसुम 2.0 भारतीय कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाली योजना साबित हो सकती है।

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