खरीफ सीजन में उर्वरकों की कोई कमी नहीं: श्री गौड़ा

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केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने कहा है कि खरीफ सीजन में देश भर में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों की मांग के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है।

श्री गौड़ा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान को आश्वासन दिया कि उनके राज्य को मांग के अनुसार यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। श्री चौहान ने आज नई दिल्ली में श्री गौड़ा से मुलाकात की।  राज्य में अभी तक यूरिया की कमी नहीं हुई है, लेकिन पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इस मॉनसून में बारिश अच्‍छी होने तथा बुआई का रकबा 47 प्रतिशत बढ़ जाने के कारण यूरिया की खपत में वृद्धि हुई है। श्री चौहान ने मौजूदा परिप्रेक्ष्‍य में केंद्र सरकार से राज्य को यूरिया का अतिरिक्त आवंटन करने का अनुरोध किया और जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों के दौरान यूरिया की अनुमानित आवश्यकताओं का हवाला देते हुए कहा कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों की ओर से इसकी अधिक मांग आ सकती है।

श्री गौड़ा ने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश को यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। जून तक, राज्य को लगभग 55000 मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया मिल चुका है हुआ, और 3 जुलाई, 2020 को 19000 मीट्रिक टन का और आबंटन किया गया है। जो कि जुलाई में पहले आबंटित यूरिया के अतिरिक्‍त है। उर्वरक विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है, और चालू मौसम के दौरान किसानों की मांग को पूरा करने के लिए यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति करने की व्‍यवस्‍था कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में केन्‍द्र सरकार समय पर किसानों को किफायती दरों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मानसून अपेक्षाकृत बेहतर होने के कारण उर्वरकों की डीबीटी बिक्री में मई और जून के महीने में काफी तेजी रही।

मध्य प्रदेश में, यूरिया की डीबीटी बिक्री मई और जून के महीने में पिछले साल की इसी महीने की तुलना में क्रमश: 176% और 167% बढ़ी है। राज्‍य में यूरिया की उपलब्धता की स्थिति अभी तक संतोषजनक है। 4 जुलाई, 2020 तक राज्य में 4.63 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्‍ध था। उर्वरक विभाग स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और उर्वरकों की कोई भी अतिरिक्त मांग की पूर्ति घरेलू उत्पादन और आयात में वृद्धि के माध्यम से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के परामर्श से की जाएगी।

 

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