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Drought

यूके के वैज्ञानिकों ने गेंहू की Rht13 किस्म विकसित की

यूके के वैज्ञानिकों ने गेंहू की Rht13 किस्म विकसित की

यूके के वैज्ञानिकों ने गेंहू की एक खास किस्म पर शोध कर के उसका नाम Rht13 दिया है। गेंहू की इस किस्म से कम नमी वाली भूमि अथवा सूखी भूमि पर भी बंपर उत्पादन मिलता है। खेती करने में सबसे ज्यादा दिक्कत सूखाड़ जमीन में होती है। अच्छी वर्षा नहीं होने से किसानों के चेहरे पर मायूसी के बादल छा जाते हैं। अगर बारिश अच्छी नहीं हुई तो किसानों की उम्मीद निराशा में बदल जाती है। अब ऐसी स्थिति में यूके के वैज्ञानिकों ने शोध कर के गेंहू की एक नवीन किस्म को तैयार किया है। गेहूं की इस किस्म की सूखी जमीन पर भी खेती कर बंपर उत्पादन हांसिल किया जा सकता है। वहीं, वैज्ञानिकों ने गेंहू के इस प्रजाति को Rht13 नाम दिया है। गेंहू की ये किस्म कम नमी वाली भूमि अथवा सूखी भूमि पर भी बेहतरीन उत्पादन देगा। Rht13 फसल की लंबाई पारंपरिक गेंहू की तुलना में कम होगी। इस फसल से किसानों को बेहद लाभ मिलेगा। सबसे प्रमुख बात यह है, कि इसकी कम पानी वाले क्षेत्र में भी बेहतरीन पैदावार होगी।

Rht13 गेंहू की प्रमुख विशेषताएं

Rht13 गेंहू की बुवाई जमीन के बेहद अंदर तक की जाती है। ये एक बेहतरीन उत्पादन देने वाली प्रजाति है। इसमें विभिन्न तरह की मृदा एवं जलवायु में अच्छी तरह से बढ़ सकने की शक्ति है। Rht13 गेहूं में एक जीन होता है, जिसे Rht13 के नाम से जाना जाता है। यह जीन पौधे को ज्यादा शाखाओं और ज्यादा दाने उत्पादित करने में सहयोग करता है। Rht13 जीन की वजह, Rht13 गेंहू पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक उत्पादन देता है।

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Rht13 किस्म के गेंहू से किसानों को क्या क्या लाभ हैं

Rht13 से किसानों को फायदे ही फायदे हैं, क्योंकि Rht13 गेहूं पारंपरिक किस्मों के मुकाबले में लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन देता है। सिर्फ इतना ही नहीं Rht13 गेहूं विभिन्न प्रकार की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों में बेहतर ढ़ंग से बढ़ता है।

Rht13 किस्म तूफानी मौसम को सहन करने में भी समर्थ है

शोधकर्ताओं की मानें, तो गेंहू की किस्म Rht13 की जमीन के अंतर्गत काफी गहराई से बुवाई की जाए तो, ये किसानों को कई प्रकार से फायदा पहुंचा सकता है। इसमें तूफान को भी झेलने की क्षमता होती है। किसानों को इसकी खेती करने से कम परिश्रम में अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
पूसा परिसर में बिल गेट्स ने किया दौरा, खेती किसानी के प्रति व्यक्त की अपनी रुची

पूसा परिसर में बिल गेट्स ने किया दौरा, खेती किसानी के प्रति व्यक्त की अपनी रुची

गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन ब‍िल गेट्स (Bill Gates) द्वारा पूसा कैंपस में गेहूं एवं चने की उन प्रजातियों की फसलों के विषयों में जाना जो जलवायु पर‍िवर्तन की जटिलताओं का सामना करने में समर्थ हैं। विश्व के अरबपति बिल गेट्स (Bill Gates) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) का भृमण करते हुए, यहां के पूसा परिसर में तकरीबन डेढ़ घंटे का समय व्यतीत किया एवं खेती व जलवायु बदलाव के विषय में लोगों से विचार-विमर्श किया।

बिल गेट्स ने कृषि क्षेत्र में अपनी रुची जाहिर की

आईएआरआई के निदेशक ए.के. सिंह द्वारा मीडिया को कहा गया है, कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सह-अध्यक्ष एवं ट्रस्टी बिल गेट्स (Bill Gates) द्वारा आईएआरआई के कृषि-अनुसंधान कार्यक्रमों, प्रमुख रूप से जलवायु अनुकूलित कृषि एवं संरक्षण कृषि में गहन रुचि व्यक्त की।

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इसी मध्य गेट्स (Bill Gates) द्वारा आईएआरआई की जलवायु में बदलाव सुविधा एवं कार्बन डाइऑक्साइड के उच्च पैमाने के सहित खेतों में उत्पादित की जाने वाली फसलों के विषय में जानकारी अर्जित की है। बिल गेट्स ने मक्का-गेहूं फसल प्रणाली के अंतर्गत सुरक्षित कृषि पर एक कार्यक्रम में भी मौजूदगी दर्ज की। गेट्स ने संरक्षण कृषि के प्रति अपनी विशेष रुचि व्यक्त की। उसकी यह वजह है, कि गेट्स का एक लक्ष्य विश्व स्तर पर कुपोषण की परेशानी का निराकरण करना है। इसलिए ही वह स्थायी कृषि उपकरण विकसित करने के लिए निवेश कर रहे हैं। बिल गेट्स द्वारा खेतों में कीड़ों एवं बीमारियों की निगरानी हेतु आईएआरआई द्वारा विकसित ड्रोन तकनीक समेत सूखे में उत्पादित होने वाले छोले पर हो रहे एक कार्यक्रम को ध्यानपूर्वक देखा।

बिल गेट्स (Bill Gates) ने दौरा करने के बाद क्या कहा

संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार स‍िंह द्वारा गेट्स के दौरा को कृषि अध्ययन एवं जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में कारगर कदम बताया है। गेट्स का कहना है, क‍ि देश में कृष‍ि के राष्ट्रीय प्रोग्राम अपनी बेहद अच्छी भूमिका निभा रहे हैं। फाउंडेशन से जुड़कर कार्य करने एवं सहायता लेने हेतु योजना निर्मित कर दी जाएगी। जलवायु परिवर्तन, बायोफोर्टिफिकेशन से लेकर फाउंडेशन सहयोग व मदद करेगा तब और बेहतर होगा। आईएआरआई को जीनोम एडिटिंग की भाँति नवीन विज्ञान के इलाकों में जीनोम चयन एवं मानव संसाधन विकास का इस्तेमाल करके पौधों के प्रजनन के डिजिटलीकरण पर परियोजनाओं हेतु धन उपलब्ध कराया जाएगा।
मानसून की धीमी रफ्तार और अलनीनो बढ़ा रहा किसानों की समस्या

मानसून की धीमी रफ्तार और अलनीनो बढ़ा रहा किसानों की समस्या

आपकी जानकरी के लिए बतादें, कि विगत 8 जून को केरल में मानसून ने दस्तक दी थी। इसके उपरांत मानसून काफी धीमी गति से चल रही है। समस्त राज्यों में मानसून विलंभ से पहुंच रहा है। केरल में मानसून के आने के पश्चात भी फिलहाल बारिश औसत से कम हो रही है। साथ ही, मानसून काफी धीरे-धीरे अन्य राज्यों की ओर बढ़ रही है। पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत बहुत से राज्यों में लोग बारिश के लिए तरस रहे हैं। हालांकि, बिहार एवं झारखंड में मानसून की दस्तक के उपरांत भी प्रचंड गर्मी पड़ रही है। लोगों का लू एवं तेज धूप से हाल बेहाल हो चुका है। यहां तक कि सिंचाई की पर्याप्त उपलब्धता में गर्मी की वजह से फसलें सूख रही हैं। ऐसी स्थिति में किसानों के मध्य अलनीनो का खतरा एक बार पुनः बढ़ चुका है। साथ ही, जानकारों ने बताया है, कि यदि मौसम इसी प्रकार से बेईमान रहा तो, इसका असर महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है, जिससे खाद्य उत्पाद काफी महंगे हो जाऐंगे।

अलनीनो की वजह से महंगाई में बढ़ोत्तरी हो सकती है

मीडिया खबरों के अनुसार, अलनीनो के कारण भारत में खुदरा महंगाई 0.5 से 0.6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। मुख्य बात यह है, कि अलनीनो की वजह से आटा, गेहूं, मक्का, दाल और चावल समेत खाने-पीने के समस्त उत्पाद भी महंगे हो जाऐंगे। साथ ही, अलनीनो का प्रभाव हरी सब्जियों के ऊपर भी देखने को मिल सकता है। इससे
शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और लौकी समेत बाकी हरी सब्जियों की कीमतों में काफी इजाफा हो जाऐगा।

मानसून काफी आहिस्ते-आहिस्ते चल रहा है

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि केरल में 8 जून को मानसून का आगमन हुआ था। जिसके बाद मानसून काफी आहिस्ते-आहिस्ते चल रही है। यह समस्त राज्यों में विलंब से पहुँच रहा है। विशेष बात यह है, कि मानसून के आगमन के उपरांत भी अब तक बिहार समेत विभिन्न राज्यों में वर्षा समान्य से भी कम दर्ज की गई है। अब ऐसी स्थिति में सामान्य से कम बारिश होने से खरीफ फसलों की बिजाई पर प्रभाव पड़ सकता है। अगर मानसून के अंतर्गत समुचित गति नहीं आई, तो देश में महंगाई में इजाफा हो सकता है। यह भी पढ़ें: मानसून के शुरुआती जुलाई महीने में किसान भाई क्या करें

2023-24 में इतने प्रतिशत महंगाई होने की संभावना

भारत में अब तक बारिश सामान्य से 53% प्रतिशत कम दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर जुलाई माह से हरी सब्जियां महंगी हो जाती हैं। साथ ही, ब्रोकरेज फर्म ने फाइनेंसियल ईयर 2023-24 में महंगाई 5.2 प्रतिशत रहने का अंदाजा लगाया है। उधर रिजर्व बैंक ने कहा है, कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई 5 प्रतिशत अथवा उससे कम भी हो सकती है।

चीनी की पैदावार में इस बार गिरावट देखने को मिली है

बतादें, कि भारत में सामन्यतः चीनी की पैदावार में विगत वर्ष की अपेक्षा कमी दर्ज की गई है। साथ ही, चावल की हालत भी ठीक नहीं है। इस्मा के अनुसार, चीनी की पैदावार 3.40 करोड़ टन से घटकर 3.28 करोड़ टन पर पहुंच चुकी है। साथ ही, यदि हम चावल की बात करें तो अलनीनो के कारण इसका क्षेत्रफल इस बार सिकुड़ सकता है। वर्षा कम होने के चलते किसान धान की बुवाई कम कर पाऐंगे, क्योंकि धान की फसल को काफी ज्यादा जल की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में धान की पैदावार में गिरावट आने से चावल महंगे हो जाएंगे, जिसका प्रभाव थोक एवं खुदरा बाजार में देखने को मिल सकता है।
किसानों के लिए मिशन अमृत सरोवर बनेगा ढ़ाल, ये मिशन सूखे की समस्या को खत्म करेगा

किसानों के लिए मिशन अमृत सरोवर बनेगा ढ़ाल, ये मिशन सूखे की समस्या को खत्म करेगा

मिशन अमृत सरोवर ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एवं तकनीकी संगठनों की हिस्सेदारी के साथ "संपूर्ण सरकार" दृष्टिकोण पर आधारित है।  दिन-प्रतिदिन पानी की समस्याओं से लड़ रहे कृषकों और ग्रामीणों के लिए सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना का आरंभ किया है। इस योजना का नाम है, अमृत सरोवर योजना। यह योजना जल संरक्षण तथा सूखे जैसी भयानक स्थिति से जूझने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से लाई गई है। इस योजना के मुताबिक, 15 अगस्त 2023 तक भारत भर के हर एक जनपद में 75-75 तालाबों का निर्माण किया जाना था। इससे गर्मी के दिनों में होने वाले भूजल की गिरावट को काफी हद तक काबू में किया जा सकेगा।

मिशन अमृत सरोवर की प्रमुख विशेषताएं क्या-क्या हैं

मिशन अमृत सरोवर 24 अप्रैल 2022 को जारी किया गया और 15 अगस्त 2023 को पूर्ण हुआ। इसका लक्ष्य भारत के हर एक जनपद में 75 अमृत सरोवर (तालाब) का विकास, मरम्मत करना है, जिससे भारत भर में कुल मिलाकर तकरीबन 50,000 अमृत सरोवर होंगे। मिशन अमृत सरोवर 15 अगस्त 2023 को पूर्ण हो चुका है। दरअसल, मिशन अमृत सरोवर ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, पर्यावरण, जल शक्ति मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और तकनीकी संगठनों की हिस्सेदारी के साथ "संपूर्ण सरकार" दृष्टिकोण पर आधारित है। 

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इस राज्य सरकार ने देश के सरोवरों को सुंदर और संरक्षित करने की कवायद शुरू करदी है इस मिशन के अंतर्गत भारत के हर जनपद में कम से कम 75 अमृत सरोवरों का निर्माण अथवा कायाकल्प किया जा सकेगा। हर एक अमृत सरोवर में कम से कम 01 एकड़ का तालाब क्षेत्र होगा, जिसकी जल धारण क्षमता तकरीबन 10,000 घन मीटर होगी। हर एक अमृत सरोवर नीम, पीपल एवं बरगद इत्यादि वृक्षों से घिरा होगा। प्रत्येक अमृत सरोवर सिंचाई, मछली पालन, बत्तख पालन, सिंघाड़े की खेती, जल पर्यटन एवं बाकी गतिविधियों जैसे बहुत सारे उद्देश्यों के लिए पानी का इस्तेमाल करके आजीविका सृजन का स्रोत होगा। अमृत सरोवर उस क्षेत्र में एक सामाजिक मिलन स्थल के तोर पर भी कार्य करेगा। मिशन अमृत सरोवर आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान की गई कार्रवाई का एक स्पष्ट उदाहरण है।  प्रत्येक अमृत सरोवर स्थल हर एक स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का स्थान है। मिशन अमृत सरोवर में स्वतंत्रता सेनानी अथवा उनके परिवार के सदस्य, शहीदों के परिवार के सदस्य, पद्म पुरस्कार विजेता जुड़े हुए हैं। मिशन अमृत सरोवर राज्यों एवं जनपदों के जरिए से विभिन्न योजनाओं जैसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी एनआरईजीएस), 15वें वित्त आयोग अनुदान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना उपयोजनाएं जैसे वाटरशेड विकास घटक, हर खेत के अभिसरण के साथ कार्य करता है। मिशन अमृत सरोवर बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए जल संरक्षण, लोगों की हिस्सेदारी और जल निकायों से निकाली गई मृदा के उचित इस्तेमाल पर केंद्रित है। रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय एवं बुनियादी ढांचा परियोजना विकास के लिए लगी बाकी सार्वजनिक एजेंसियां भी अमृत सरोवर से निकली मृदा, खाद के उपयोग के उद्देश्य से मिशन में शम्मिलित हैं।