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शिमला मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त मृदा एवं जलवायु, किस्में और बुवाई का समय

शिमला मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त मृदा एवं जलवायु, किस्में और बुवाई का समय

शिमला मिर्च का सब्जी के रूप में सेवन करना बहुत सारे लोगों को काफी पसंद है। इसलिए सालभर शिमला मिर्च की मांग बनी रहती है। 

दरअसल, शिमला मिर्च मध्य क्षेत्रों की एक प्रमुख नकदी फसल है। इसकी पैदावार विशेष रूप से कांगड़ा, मंडी, कुल्लू व चम्बा, सोलन और सिरमौर में की जाती है। 

शिमला मिर्च की खेती के लिए बेहतर जल निकासी वाली मध्यम रेतीली दोमट मृदा वाली जमीन सबसे अच्छी होती है। मृदा का पीएच मान 5.5 से 6.8 तथा जैविक कार्बन 1% प्रतिशत से ज्यादा होनी चाहिए। 

मृदा में पीएच स्तर, जैविक कार्बन, गौण पोषक तत्व (एनपीके), सूक्ष्म पोषक तत्व तथा खेत में सूक्ष्म जीवों के प्रभाव की मात्रा की जांच करवाने के लिए साल में एक बार मृदा परीक्षण बेहद आवश्यक है। 

अगर जैविक कार्बन तत्व एक प्रतिशत से कम हो तो खेत में 20-25 टन/हे० गोबर की खाद का इस्तेमाल करें। साथ ही, खेत में अच्छी तरह से 2-3 बार हल चलाकर गोबर को मिलाएं। 

हर बुआई के उपरांत सुहागा प्रयोग में लाऐं, जिससे कि खेत में किसी प्रकार के ढेले न रहें और खेत सही तरह से एकसार हो सके।

शिमला मिर्च की बुवाई का समय

शिमला मिर्च की बुवाई का समय निचले पर्वतीय क्षेत्रों में - फरवरी से मार्च तो वहीं मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मार्च से मई का होता है। 

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ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र - शिमला मिर्च की रोपण योग्य पौध को निचले या मध्य पर्वतीय इलाकों से लाना अथवा पौध को नियन्त्रण वातावरण में इस प्रकार तैयार करें, जिससे अप्रैल-मई में रोपाई हो सके। 

बीज अंकुरण के समय तापमान 20° सैल्सियस होना चाहिए। जब पौध 10-15 सें.मी. ऊंची हो जाए तो खेत में शाम के समय इसकी रोपाई करें। रोपाई के बाद सिंचाई करना और कुछ दिनों तक सुबह-शाम पानी देना अति आवश्यक है।

शिमला मिर्च की कुछ अनुमोदित किस्में

आपकी जानकारी के लिए शिमला मिर्च की कुछ अनुमोदित किस्मों की जानकारी। इन किस्मों में केलीफोर्निया वन्डर, यलो वन्डर, सोलन भरपूर, भारत, सोलन संकर -1, सोलन संकर -2, है। इंदिरा, डौलर एवं विभिन्न स्थानीय किस्में।

शिमला मिर्च में मृदा उर्वरक प्रबंधन 

फलीदार जैसी दलहनी परिवार की फसलों के साथ आवर्तन से मृदा में नाईट्रोजन की स्थिति काफी मजबूत होती है। खेत में तीन-चार बार हल चलाएं और हर एक जुताई के उपरांत सुहागा चलाएं, जिससे कि मृदा भुरभुरी हो जाए। 

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खेत में 20 टन/हे० गोबर की खाद तथा 2 टन/हे० बी.डी. कम्पोस्ट अथवा 15 टन/हे० वर्मी कम्पोस्ट तथा 2 टन/हे० बी.डी. कम्पोस्ट डालें।

शिमला मिर्च की खेती में खरपतवार प्रबंधन 

खरपतवार पर काबू करने के लिए आपको फसल चक्र अपनाना चाहिए। हाथ द्वारा खरपतवार निकालने से मृदा काफी ढीली हो जाती है, जो कि मृदा को काफी भुरभुरा बनाती है। रोपाई के 30-50 दिन तक खरपतवार को ना उगने दें। तीन-चार बार गुड़ाई के साथ खरपतवार को बाहर निकाल दें।

शिमला मिर्च की खेती में सिंचाई प्रबंधन 

बतादें, कि प्रतिरोपण के शीघ्रोपरान्त फूल आने पर और फल विकास की स्थिति में जल का अभाव नहीं होना चाहिए। शुष्क मौसम के दौरान प्रतिरोपण के पश्चात प्रथम महीने 3-4 दिन के समयांतराल पर सिंचाई और उसके बाद फसल तैयार होने तक 7-10 दिन के अन्तराल पर जल निकासी पर अधिक ध्यान दें। खेतों में ज्यादा नमी आने की वजह से फसल बर्बाद हो जाती है। इस वजह से खेत में पानी को ठहरने ना दें।

किसान अपनी छत पर इन महंगी सब्जियों को इस माध्यम से उगाऐं

किसान अपनी छत पर इन महंगी सब्जियों को इस माध्यम से उगाऐं

शिमला मिर्च की खेती भी बिल्कुल उसी तरह कर सकते हैं, जैसे बैंगन की करते हैं। हालांकि, इसमें धूप का और पानी का खास ध्यान रखना पड़ता है। प्रयास करें कि शिमला मिर्च के पौधों पर प्रत्यक्ष तौर पर धूप ना पड़े। बाजार में कुछ दिन पूर्व तक टमाटर की कीमत 350 रुपए प्रतिकिलो थी। दरअसल, सरकार के हस्तक्षेप के उपरांत इनके भाव अब 70 से 80 रुपए किलो तक आ गए हैं। परंतु, क्या आपको जानकारी है, कि बाजार के अंदर विभिन्न ऐसी सब्जियां हैं, जो आज भी 150 के पार चल रही हैं। इन सब्जियों में शिमला मिर्च, बैगन और धनिया शम्मिलित हैं। आइए आपको जानकारी दे दें कि कैसे आप इन सब्जियों को अपनी छत पर सहजता से उगा सकते हैं।

गमले के अंदर बैंगन की खेती

बैंगन को छत पर उगाना सबसे सुगम होता है। बाजार में इसके पौधे मिलते हैं, जिन्हें लाकर आप किसी भी गमले में इसको उगा सकते हैं। इसकी संपूर्ण प्रक्रिया के विषय में बात की जाए तो सबसे पहले आपको एक गमला लेना पड़ेगा। जो थोड़ा बड़ा हो उसके बाद उसमें मिट्टी और जैविक खाद मिला लें। जब इस प्रकार से गमला तैयार हो जाए तो नर्सरी से लाए हुए बैंगन के पौधों की इनमें रोपाई करें। एक गमले में आपको एक से ज्यादा पौधा नहीं रोपना चाहिए। ऐसे करके आप छत पर पांच से सात गमलों में बैंगन का उत्पादन कर सकते हैं। ये पौधे दो महीनों के अंतर्गत बैंगन देने लगेंगे। ये भी पढ़े: सफेद बैंगन की खेती से किसानों को अच्छा-खासा मुनाफा मिलता है

गमले के अंदर शिमला मिर्च की खेती

शिमला मिर्च की खेती भी बिल्कुल वैसे ही की जा सकती है, जैसे कि बैंगन की करते हैं। हालांकि, इसमें धूप का और पानी का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। प्रयास करें कि शिमला मिर्च के पौधों पर प्रत्यक्ष तौर पर धूप ना पड़े। यदि ऐसा हुआ तो पौधा सूख सकता है। इसी प्रकार से आप हरी मिर्च की भी खेती सहजता से कर सकते हैं। यदि आपका छत बड़ा है, तो आप उस पर बहुत सारे गमले रख के एक छोटा सा वेजिटेबल गार्डेन तैयार कर सकते हैं, जिसमें आप प्रतिदिन बगैर रसायन वाली ताजी-ताजी सब्जियां उगा सकते हैं।

गमले के अंदर धनिया की खेती

संभवतः धनिया की खेती सबसे आसान ढ़ंग से की जाती है। हालांकि, इसके लिए आपको गमला नहीं बल्कि कोई चौड़ी वस्तु जैसे कोई बड़ा सा गहरा ट्रे लेना पड़ेगा। इस ट्रे में पहले आप जैविक खाद और मृदा डाल दें, उसके उपरांत इसमें बाजार से लाए धनिया के बीज छींट दें। फिर उसमें पानी का मध्यम छिड़काव कर दें। दस से बीस दिनों के समयांतराल पर धनिया के पौधे तैयार हो जाएंगे, एक महीने के पश्चात आप इनकी पत्तियों का इस्तेमाल कर पाएंगे।
इस तकनीक से शिमला मिर्च की खेती कर किसान कमा रहा लाखों का मुनाफा

इस तकनीक से शिमला मिर्च की खेती कर किसान कमा रहा लाखों का मुनाफा

खेती-किसानी के तौर तरीकों में समय के साथ-साथ बदलाव आया है। किसान अपनी फसलों का उत्पादन पॉली हाउस जैसी उन्नत तकनीकों के जरिए कर रहे हैं। 

दरअसल, पॉली हाउस आधुनिकता से भरी एक उन्नत तकनीक है। इस तकनीक के जरिए खेती करने से फसल पर मौसम का प्रभाव भी नहीं पड़ता है। साथ ही, किसानों की भी तगड़ी कमाई होती है।

यदि आप भी परम्परागत खेती कर के ऊब चुके हैं और चाहते हैं कुछ नया करना तो आज का यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। 

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किसान भाई अब परंपरागत खेती की वजाय लाल-पीली शिमला मिर्च उगा रहे हैं। इससे उनको साल में लाखों का मुनाफा भी हांसिल हो रहा है।

खेती करने से पहले मृदा एवं जल की जाँच 

आजकल आधुनिकता के बढ़ते अब खेती की तकनीक भी बदल रही हैं। किसान भाई खेती करने के लिए नई तकनीकों को इस्तेमाल कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक किसान पॉली हाउस में शिमला मिर्च की जैविक खेती कर तगड़ा मुनाफा प्राप्त कर रहा है।

हाथरस जनपद के गांव नगला मोतीराय के मूल निवासी सेवानिवृत शिक्षक श्याम सुंदर शर्मा और उनके बेटे अमित शर्मा ने लगभग 6 साल पहले पॉली हाउस लगाकर रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की खेती शुरू की थी। रंग बिरंगी शिमला मिर्च की खेती शुरू करने से पहले उन्होंने खेत की मिट्टी-पानी आदि की जांच कराई। 

किसान कैसे कमा रहा अच्छा मुनाफा   

श्याम सुंदर शर्मा ने बताया है, कि फसल को कीट और रोग मुक्त करने के लिए भी जैविक तकनीकी का प्रयोग किया जाता है। आम शिमला मिर्च के मुकाबले रंग-बिरंगी शिमला मिर्च बाजार में अच्छे रेटों पर बिकती है। 

उन्होंने आगे बताते हुए कहा, कि उनका ये पॉली हाउस एक एकड़ में फैला हुआ है। रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की खेती से वह साल भर में लगभग 12 से 14 लाख रुपये की आमदनी कर लेते हैं।

वहीं, पिता की खेती में मदद कर रहे श्याम सुंदर शर्मा के पुत्र अमित शर्मा बताते हैं, कि ये काम मन को तसल्ली देने वाला है। लाल-पीली शिमला मिर्च का मार्केट आगरा और दिल्ली में है। 

गाड़ी लोड होकर मंडी पहुंच जाती है और पैसा आ जाता है। वह अन्य किसानों को भी पॉली हाउस लगाकर रंग-बिरंगी शिमला मिर्च की खेती करने की सलाह देते हैं।

मात्र 70 दिन में उगे यह रंग-बिरंगी उन्नत शिमला मिर्च (Capsicum)

मात्र 70 दिन में उगे यह रंग-बिरंगी उन्नत शिमला मिर्च (Capsicum)

किसान वर्ग के लिए बात है, न तीखी न फीकी, ऐसी चीज की, जिसका रंग ऐसा की व्यंजन को रंगदार बना दे। जी हां, बात है, लाल-पीली-हरी रंग-बिरंगी शिमला मिर्च (Capsicum) की, जिसके जायके का तड़का भारतीय रसोई से लेकर दुनिया भर की तमाम रेसिपी में शुमार है। कृषक वर्ग शिमला मिर्च (Capsicum) की खेती कर महज ढ़ाई महीने मेें तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। जानिये ऐसी ही उमदा किस्म की कैप्सिकम (Capsicum) यानी शिमला मिर्च की प्रजातियों के बारे में आज, जिनसे न केवल मिलेगा स्वादिष्ट स्वाद, बल्कि उगाने वाले को होगी तगड़ी आय। कैप्सिकम वैराइटी (Capsicum Variety), यानी शिमला मिर्च की शीर्ष किस्मों मेें ऐसी प्रजातियां शामिल हैं, जो महज ढ़ाई माह के भीतर ही किसान को मुनाफा दे सकती हैं। मतलब 78 से 80 दिन में किसान रंग-बिरंगी शिमला मिर्च को बेचकर हरे नोट गिन सकता है।

भारत में कैप्सिकम पैदावार की संभावनाएं :

भारत के अधिकतर उत्तरी राज्यों हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, उत्तर प्रदेश के साथ ही कर्नाटक के आसपास के प्रदेशों में कैप्सिकम यानी कि शिमला मिर्च की पैदावार का प्रचलन ज्यादा है।


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कम समय और अच्छा बाजार :

फास्ट-फूड कल्चर (Fast Food Culture) जैसे चाइनीज व्यंजनों के साथ ही देसी तड़के में उपयोग की जाने वाली शिमला मिर्च की भारत समेत विदेशी बाजारों में खासी मांग है। ऐसे में महज 2 से 3 महीने में आय का विकल्प, शिमला मिर्च की खेती कृषक मित्रों के लिए अच्छी आय का जरिया बन सकती है।

शिमला मिर्च की प्रमुख किस्में और पैदावार की जानकारी :

भारत में शिमला मिर्च की उन्नत किस्मों (variety of Capsicum in India) की बात करें तो इसमे इंद्रा, कैलिफोर्निया वंडर, येलो वंडर आदि किस्म की शिमला मिर्चों के नाम शामिल हैं। इन मिर्चों की खासियत क्या है और इन्हें कैसे उगाया जाता है जानते हैं गूढ़ राज को।

इंद्रा शिमला मिर्च (Indra Capsicum)

इंद्रा शिमला मिर्च मध्यम लंबी और तेजी से पनपने वाले झाड़ीदार पौधों में से एक किस्म की प्रजाति है। पहचान की बात करें तो इसके गहरे हरे पत्ते मिर्च के फल को आधार प्रदान करते हैं। इस प्रजाति की शिमला मिर्च गहरी हरी, मोटे आवरण के साथ ही चमकदार होती हैं।
इंद्रा शिमला मिर्च के लिए मुफीद सीजन :
खरीफ सीजन में इंद्रा शिमला मिर्च की अच्छी पैदावार हीती है। मूल तौर पर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात के साथ ही राजस्थान, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश एवं कलकत्ता, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत हरियाणा, उत्तराखंड, ओडिशा, पंजाब इंद्रा शिमला मिर्च (Indra Capsicum) का तगड़ा पैदावार क्षेत्र है।
इंद्रा शिमला मिर्च के लिए बुवाई और मिट्टी :
बोवनी की बात करें तो बुवाई के महज 70 से 80 दिनों के भीतर इंद्रा शिमला मिर्च की प्रजाति परिपक़्व हो जाती है, जिसे तोड़कर किसान अच्छा मुनाफा कमाते हैं।


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भारत शिमला मिर्च (Bharat Capsicum)

भारत शिमला मिर्च की प्रजाति के पौधे तेजी से पनपते हैं। यह गहरे हरे रंग के होते हैं। भारत शिमला मिर्च की प्रजाति की पैदावार के लिए सूखी एवं लाल दोमट मिट्टी अनिवार्य है। जून से दिसम्बर यानी सात महीनों तक का मौसम इसकी पैदावार के लिए अनुकूल माना गया है। इसे बोने के लगभग 90 से 100 दिनों यानी तीन माह से कुछ अधिक दिनों के बाद भारत शिमला मिर्च की तुड़ाई किसान कर सकते हैं।

कैलिफोर्निया वंडर शिमला मिर्च (California wonder Capsicum)

कैलिफोर्निया वंडर शिमला मिर्च (California wonder Capsicum) भारत में पैदावार की जाने वाली उन्नत किस्मों में से एक है। कैलिफोर्निया वंडर शिमला मिर्च का पौधा मध्यम ऊंचाई का होता है। हरे रंग के फल इसकी पहचान हैं। इसे बोने के करीब 75 दिनों उपरांत इसके पौधों से मिर्च के फल तोड़े जा सकते हैं। प्रति एकड़ जमीन के मान से तकरीबन 72 से 80 क्विंटल शिमला मिर्च पैदा होने की संभावना है।

येलो वंडर शिमला मिर्च (Yellow Wonder Capsicum) -

चटख पीले रंग की येलो वंडर शिमला मिर्च (Yellow Wonder Capsicum) के पौधों की बात करें तो चौड़े पत्तों वाले इन प्लांट्स की ऊंचाई मध्यम आकर की होती है। बीजारोपण के करीब 70 दिनों उपरांत येलो वंडर शिमला मिर्च (Yellow Wonder Capsicum) की पैदावार तैयार हो जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार अनुकूल परिस्थितियों में प्रति एकड़ भूमि पर लगभग 48 से 56 क्विंटल येलो वंडर शिमला मिर्च (Yellow Wonder Capsicum) की पैदावार संभव है।

पूसा दीप्ती शिमला मिर्च (Pusa Deepti Capsicum)

पूसा दीप्ती शिमला मिर्च (Pusa Deepti Capsicum) हाइब्रिड प्रजाति की शिमला मिर्च है। इसका पौधा भी मध्यम आकार का झाड़ीनुमा होता है। पूसा दीप्ति कैप्सिकम (Pusa Deepti Capsicum) के फलों का रंग शुरुआत में हल्का हरा होता है, जो फल के पकने के उपरांत गहरे लाल रंग में तब्दील हो जाता है। बीजारोपण के महज ढ़ाई माह, यानी कि मात्र 70 से 75 दिनों के उपरांत इसके फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं।  
जानें शिमला मिर्च की फसल से महाराष्ट्र के इन जनपदों के किसान कमा रहे बम्पर मुनाफा

जानें शिमला मिर्च की फसल से महाराष्ट्र के इन जनपदों के किसान कमा रहे बम्पर मुनाफा

शिमला मिर्च (capsicum; shimla mirch) उत्पादन से कृषक बेहतरीन मुनाफा उठा सकते हैं। भारत में महाराष्ट्र राज्य के सांगली, महाराष्ट्र, पुणे, नासिक, शिमला और सतारा मिर्च उगाने वाले प्रमुख जनपद हैं। जानिए इसकी खेती के लिए कैसी होनी चाहिए मिट्टी और उन्नत किस्म। अंग्रेजी में कैप्सिकम कही जाने वाली शिमला मिर्च का उत्पादन बागवानी श्रेणी के अंतर्गत आता है। महाराष्ट्र राज्य के कुछ जनपदों में सर्दी के मौसम में शिमला मिर्च का उत्पादन किया जाता है। बतादें कि, शिमला मिर्च पीले, हरे अथवा लाल रंग में मिलती हैं। इसका उत्पादन करने में अत्यधिक परिश्रम एवं खर्च नहीं होता है। अगर पूरे वर्ष शिमला मिर्च की कृषि की जाये तो इसकी तीन फसलें प्राप्त की जा सकती हैं। इसी वजह से शिमला मिर्च का उत्पादन कर किसान मोटा मुनाफा अर्जित कर सकते हैं। बाजार में उपलब्ध हरी, पीले और लाल रंग में मिलने वाली शिमला मिर्च भले ही किसी भी रंग की हो, उसमें विटामिन सी, विटामिन ए एवं बीटा कैरोटीन अच्छी खासी मात्रा में उपलब्ध है। इसके अंदर नाम मात्र के लिए भी कैलोरी नहीं पायी जाती, इसी वजह से यह कोलेस्ट्रॉल को नहीं बढ़ाती है। साथ ही, यह वजन को स्थायित्व रखने में बेहद सहायक होता है। महाराष्ट्र राज्य में सतारा, सांगली, पुणे और नासिक जनपदों में काफी क्षेत्रफल पर इसका उत्पादन किया जाता है।

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शिमला मिर्च अगस्त एवं सितंबर में लगायी जाती है एवं जनवरी व फरवरी के माह में कटाई की जाती है। मध्यम से अधिक काली अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी इस फसल के लिए उपयुक्त होती है। नदी के किनारे उपजाऊ जमीन भी कृषि हेतु पर्याप्त है। शिमला मिर्च के उत्पादन हेतु मृदा का पीएच मान ६ से ७ के मध्य होना अति आवश्यक है, उपज की मात्रा शिमला मिर्च की प्रजाति एवं देखरेख पर निर्भर करती है। इसलिए उत्पादन का क्षेत्रफल प्रति हेक्टेयर १५० से ५०० क्विंटल तक हो सकती है। उत्पादन में लगायी गयी लागत के अतिरिक्त शिमला मिर्च की एक फसल से किसान ५ से ७ लाख रुपये तक अर्जित कर लेते हैं।

किस प्रकार करें जल एवं उर्वरकों का समुचित प्रयोग

खेत को तैयारी करने के दौरान २५-३० टन गोबर का सड़ा हुआ खाद एवं कंपोस्ट खाद का उपयोग करना चाहिए। आधार खाद के रूप में बुवाई के वक्त ६० किलोग्राम नत्रजन, ६०-८० किलोग्राम स्फुर, ६०-८० किलोग्राम पोटाश डालना है। नत्रजन को दो भागों में विभाजित करके खड़ी फसल में रोपाई के ३० व ५५ दिन उपरांत टाप ड्रेसिंग के समकक्ष छिड़कना होगा। नाइट्रोजन रोपण के १ माह के उपरांत एवं दूसरे रोपण के ५० दिन उपरांत दिया जाना चाहिए। शिमला मिर्च की बुवाई से लेकर शीघ्र बढ़ोत्तरी हेतु नियमित रूप से अत्यधिक जल की जरुरत होती है। फूलों और फलों को नियमित रूप से पानी दें, एक सप्ताह के नियमित अंतराल पर पानी देना चाहिए।
वैज्ञानिकों द्वारा विकिसत की गई शिमला मिर्च की नई किस्म से किसानों को होगा दोगुना मुनाफा

वैज्ञानिकों द्वारा विकिसत की गई शिमला मिर्च की नई किस्म से किसानों को होगा दोगुना मुनाफा

आईसीएआर शिमला केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा शिमला मिर्च की 562 नवीन किस्म विकसित कर दी है। वर्तमान में किसान 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन हाँसिल कर रहे हैं। लेकिन शिमला मिर्च की इस नई प्रजाति से किसान भाई 50 क्विंटल तक पैदावार उठा सकते हैं। भारत में किसान खेती को तकनीकी समझदारी से कर के लाखों रुपये का मुनाफा अर्जित करते हैं। किसानों का भी यही प्रयास रहता है, कि कैसे वह बेहतरीन उत्पादन प्राप्त कर सकें। वैज्ञानिकों द्वारा भी निरंतर ऐसे बीज तैयार करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। जिनसे किसान खेती कर बुवाई कर मोटा उत्पादन ले सकें। वैज्ञानिकों की तरफ से विकसित की गई नवीन प्रजातियों में जल की आवश्यकता न्यूनतम रहती है। साथ ही, खर्च कम होता है, जबकि आय बहुत ज्यादा हो जाती है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान शिमला ने पहाड़ी राज्यों हेतु शिमला फसल का नवीन बीज विकसित कर दिया है। इस बीज से पैदावार कर किसान ढाई गुना तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

किसान भाई शिमला मिर्च की नई किस्म से पाएंगे 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन

किसान भाई इस बीज का उपयोग कर अच्छी-खासी पैदावार ले सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बताय है, कि हाइब्रिड शिमला मिर्च की 562 बीज तैयार हो चुका है। इससे किसान भाई 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार ले पाएंगे। फिलहाल, इन राज्यों के अंदर 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार हो रही थी। परंतु, नवीन किस्म वाली फसल की सिंचाई हेतु किसान ढाई गुना तक उत्पादन ले सकते हैं। फसल की सिंचाई होने पर फसल के उत्पादन में 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक वृध्दि हो जाएगी।

इन तीन राज्यों में उत्पादन कर पाएंगे किसान भाई

वैज्ञानिकों ने बताया है, कि नवीन किस्मों को विकसित करने हेतु राज्य विशेष की जलवायु एवं मृदा व सिंचाई की उपलब्धता एवं अन्य कारकों के ऊपर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। इस हिसाब से देखा जाए तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू कश्मीर का पर्यावरण बीज हेतु अनुकूल पाया गया है। यहां किसान इसका उत्पादन करके बेहतर उत्पादन अर्जित कर रहे हैं।
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हिमाचल प्रदेश के लिए 200 क्विंटल ब्रीडर बीज मुहैय्या कराया गया है

आईसीएआर शिमला मिर्च वैज्ञानिकों द्वारा हाइब्रिड बीज भारत के तीन पहाड़ी राज्यों हेतु तैयार हुआ है। आईसीएआर शिमला सेंटर द्वारा इन तीन राज्यों हेतु 300 क्विंटल ब्रीडर बीज मुहैय्या कराया जाना है। जिसमें से एकमात्र हिमाचल प्रदेश के खाते में 200 क्विंटल ब्रीडर बीज जाना है।

इतने किलो ब्रीडर बीज से 2000 क्विंटल बीज होगा तैयार

आईसीएआर (ICAR) शिमला मिर्च की ब्रीड बीज राज्य सरकारों के लिए भी उपलब्ध किया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने बताया है, कि 100 किलो ब्रीडर बीज द्वारा 2000 क्विंटल बीज निर्मित कर दिया गया है। इतना ज्यादा बीज होने की वजह से किसानों का बुवाई कार्य बेहद सुगमता से हो रहा है। किसानों को खेती करने के लिए बीज हेतु इधर-उधर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। किसानों के लिए राज्य सरकार सुगमता से बीज मुहैय्या करा रही है।
पंजाब में किसान अपनी शिमला मिर्च की उपज को सड़कों पर फेंकने को हुए मजबूर

पंजाब में किसान अपनी शिमला मिर्च की उपज को सड़कों पर फेंकने को हुए मजबूर

आजकल देश के अलग अलग हिस्सों से कहीं बैंगन तो कहीं प्याज के दाम अत्यधिक गिरने की खबरें आ रही हैं। किसान लागत भी नहीं निकल पाने वाली कीमतों से निराश और परेशान होकर अपनी उपज को सड़कों पर ही फेंकना उचित समझ रहे हैं। इसी कड़ी में पंजाब के किसानों को शिमला मिर्च में खासा नुकसान वहन करने की खबरें सामने आ रही हैं। दरअसल। यहां व्यापारी एक रुपये किलो शिमला मिर्च खरीद रहे हैं। किसानों का इससे लागत तो दूर ले जाने का भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा है। इसी वजह से दुखी होकर किसान अपनी शिमला मिर्च को सड़क पर फेंकने को मजबूर हो गए हैं। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि के चलते किसानों को काफी हानि हुई है। इससे किसानों की लाखों रुपये की फसल बिल्कुल चौपट हो चुकी है। हालांकि, किसान भाइयों की परेशानियां यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। किसान भाइयों को बागवानी यानी फल, सब्जी की बुवाई में भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अत्यधिक उत्पादन होने की वजह से मंडियों में समुचित भाव किसानों को नहीं मिल पा रहे हैं। इसलिए किसानों को काफी ज्यादा परेशानी हो रही है। किराया तक भी न निकल पाने की वजह से नाराज किसान सब्जियों को सड़कों पर ही फेंकने को मजबूर हो रहा है।

शिमला मिर्च की कीमत पंजाब में 1 रुपए किलो

पंजाब में शिमला मिर्च की स्थिति काफी बेकार हो चुकी है। किसान भाई शिमला मिर्च लेकर मंड़ी पहुंच रहे हैं। लेकिन व्यापारी किसान से 1 रुपये प्रति किलो ही शिमला मिर्च खरीद रहा है। मनसा जनपद में बेहद ही ज्यादा शिमला मिर्च का उत्पादन हुआ है। यहां के किसान भी शिमला मिर्च को अच्छी कीमतों पर मंड़ी में नहीं बेच पा रहे हैं। ये भी पढ़े: वैज्ञानिकों द्वारा विकिसत की गई शिमला मिर्च की नई किस्म से किसानों को होगा दोगुना मुनाफा

शिमला मिर्च को सड़क पर फेंकने को मजबूर हुए किसान

मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा किसान भाइयों से शिमला मिर्च की ज्यादा बुवाई करने की अपील की थी। नतीजा यह है, कि मनसा जनपद के कृषकों ने बेहतरीन उत्पादन भी हांसिल कर लिया है। पंजाब की मंड़ियों में शिमला मिर्च की काफी अधिक आवक हो रही है। समस्त शिमला उत्पादक किसान अपनी उपज को लेकर के मंड़ी पहुंच रहे हैं। परंतु, मंड़ियों में उनकी शिमला मिर्च की कीमत 1 रुपये किलो के अनुरूप लगाई जा रही है। इससे किसान हताश होकर अपनी ट्रैक्टर- ट्रॉली पर लदी शिमला मिर्च की उपज को सड़कों पर फेंकना उचित समझ रहे हैं।

व्यापारी किसानों पर बना रहे दबाव

कहा गया है, कि शिमला मिर्च की ज्यादा आवक देख व्यापारियों द्वारा किसानों पर शिमला मिर्च को 1 रुपये प्रति किलो की दर से बेचने पर दबाव बनाया जा रहा है। इससे किसान काफी आक्रोश में दिखाई दे रहे हैं। पंजाब राज्य में 3 लाख हेक्टेयर में हरी सब्जियां उगाई जाती हैं। 1500 हेक्टेयर में शिमला मिर्च की पैदावार की जाती है। मानसा, फिरोजपुर और संगरूर जनपद में सर्वाधिक शिमला मिर्च का उत्पादन किया जाता है।