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बिहार डेयरी एंड कैटल एक्सपो 2023 में 10 करोड़ के भैंसे ने लूटी महफिल

बिहार डेयरी एंड कैटल एक्सपो 2023 में 10 करोड़ के भैंसे ने लूटी महफिल

गुरुवार से बिहार की राजधानी पटना में बिहार डेयरी एंड कैटल एक्सपो 2023 की तीन दिवसीय प्रदर्शनी लगाई गई थी। इस एक्सपो में डेयरी एवं पशुपालन से संबंध रखने वाली दर्जनों कंपनियों के स्टॉल स्थापित किए गए हैं। इसी बीच एक भैंसा भी काफी चर्चा में बन गया है। सोशल मीडिया पर अब इसकी तस्वीर भी बड़ी तेजी से वायरल होती जा रही है। इस भैंसे की कीमत 10 करोड़ रुपये के आसपास तय की गई है। हरियाणा से पटना पहुंचा भैसा गोलू -2 अपने डेयरी फॉर्म में एसी रूम में रहता है। खाने के साथ-साथ गोलू पांच किलो सेब, पांच किलो चना तथा बीस किलो दूध हर रोज पीता है। दो लोग हर रोज इसका मसाज करते हैं। हरियाणा से आए किसान ने इस बात की जानकारी भी दी है।

गोलू भैंसा मुख्य रूप से कहा से आया था 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गोलू नाम का यह भैंसा हरियाणा से पटना लाया गया है। यह
भैंसा मुर्रा नस्ल का है। भैंसे के मालिक का कहना है, कि भैंसे की कीमत 10 करोड़ रुपये के आसपास है। इसके लिए भैंस के मालिक नरेंद्र सिंह को राष्ट्रपति से पद्मश्री भी मिल चुका है। इस भैंस का इस्तेमाल प्रजनन के लिए किया जाता है। 10 करोड़ रुपये की कीमत वाले भैंसे के मालिक नरेंद्र सिंह ने कहा है, कि वह भैंसा को प्रतिदिन साधारण चारा खिलाते हैं। भैंसा पर हर महीने करीब 50 से 60 हजार रुपये खर्च होते हैं। ये कीमती भैंसा पहले भी कई किसान मेलों में जा चुका है।

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गोलू-2 भैंसा उनके घर की तीसरी पीढ़ी माना जाता है 

किसान ने बताया कि 6 वर्ष का भैंसा गोलू-2 उनके घर की तीसरी पीढ़ी है। इसके दादा पहली पीढ़ी थे, जिसका नाम गोलू था। उसका बेटा बीसी 448-1 को गोलू-1 कहा जाता था। यह गोलू का पोता है, जिसका नाम गोलू- 2 रखा गया है। किसान ने बताया- हमारी कोशिश है कि देश भर के किसान ऐसे भैंसे से लाभ उठा सकें। सोशल मीडिया पर अब इस भैंसे की खूब चर्चा है। 
NDRI करनाल ने IVF क्लोनिंग तकनीक के जरिए पैदा किए मुर्रा भैंस के दो क्लोन

NDRI करनाल ने IVF क्लोनिंग तकनीक के जरिए पैदा किए मुर्रा भैंस के दो क्लोन

वैज्ञानिक निरंतर रूप से किसानों को अच्छी आय कराने के लिए नए नए शोध करते रहते है। साथ ही, एनडीआरआई द्वारा आईवीएफ क्लोनिंग तकनीक के माध्यम से मुर्रा भैंस के दो क्लोन पैदा किए जा चुके हैं जो कि हाइजेनिक मटेरियल युक्त हैं। 

इसके माध्यम से पैदा होने वाली भैंस में अधिक दूध की क्षमता और दूध उत्पादन भी काफी ज्यादा रहता है। इससे अच्छी गुणवत्ता वाली भैंस पैदा होती हैं। बढ़ती जनसँख्या के चलते देश में दूध की मांग में निरंतर बढ़ोत्तरी होती जा रही है, 

इसी वजह से समय-समय पर दूध के दाम बढ़ने की खबर भी सुनने को मिलती हैं। ऐसी स्थितियों को देखते हुए भारत में सफेद क्रांति एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। 

किसान और पशुपालकों की आमदनी को अच्छी करने के लिए पशुपालन योजनाओं के जरिए आर्थिक एवं तकनीकी सहायता मुहैय्या कराई जाती हैं। इसी कड़ी में किसानों को दुग्ध उत्पादन हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

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साथ ही, पशुपालकों को भी खूब सारी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। वैज्ञानिकों द्वारा शोध करके बेहतरीन नस्लें विकसित करली गई हैं। जिसकी सहायता से अच्छी दूध देने वाली भैंस की नस्लों में सुधार करने पर कार्य किया जाएगा। 

इसी कड़ी में विभिन्न राज्यों में नस्ल सुधार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिससे कि अच्छी दूध देने की क्षमता वाले एवं गुणवत्तापूर्ण पशुओं की तादात में वृद्धि की जा सके। 

भारत की बहुत सी बड़ी संस्थाएं इस पर कार्य कर रही हैं। वहीं, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान ने आईवीएफ क्लोनिंग तकनीक से सर्वाधिक दूध उत्पादन वाली मुर्रा भैंस के दो क्लोन पैदा किए हैं।

पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता काफी बढ़ जाएगी

मीडिया खबरों के अनुसार, एनडीआरआई करनाल द्वारा आईवीएफ क्लोनिंग तकनीक से मुर्रा भैंस की उत्पादकता बढ़ाने की कोशिशों में सफलता प्राप्त कर ली गई है। 

शीघ्र ही मध्य प्रदेश का पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम भी क्लोनिंग की इस तकनीक को राज्य में लेके जा रही है। फिलहाल, निगम के अधिकारियों ने भी यह मान लिया है, कि यह तकनीक पशु उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक भूमिका निभा सकती है। 

राज्य में इस प्रोजेक्ट को भोपाल के मदरबुल फार्म की आईवीएफ लैब से संचालित किया जाएगा। यहां गाय-भैंस की नस्ल सुधार हेतु इस आईवीएफ तकनीक को उपयोग में लाने की योजना है।

आईवीएफ लैब में होल्सटीन फ्रीजियन नस्ल की गाय का बछड़ा ने जन्म लिया

आपको इस बात से रूबरू करादें कि मध्य प्रदेश में पशुओं की नस्ल सुधारने हेतु पहली बार आईवीएफ क्लोनिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। 

हालाँकि, इससे पूर्व एक आईवीएफ लैब में एंब्रियो के माध्यम होल्सटीन फ्रीजियन नस्ल की गाय का बछड़ा पैदा हो चुका है। वर्तमान में भोपाल में मौजूद मदरबुल फार्म में जिस तकनीक का उपयोग किया जाना है। 

इसके क्लोन हाइजेनिक मटेरियल वाले बताए गए हैं। यह पशु की नस्ल सुधार, गुणवत्ता एवं दूध उत्पादन क्षमता को अधिक करने हेतु बड़ी अहम भूमिका निभाएंगे। 

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आखिर क्लोनिंग तकनीक क्या होती है

पशु वैज्ञानिकों की लगन, मेहनत व सोच का ही परिणाम है, कि आज के समय आने वाली पशुओं से संबंधित चुनौतियों से आधुनिक तकनीक को शस्त्र बनाकर लड़ सकते हैं। इन तकनीकों में क्लोनिंग का नाम भी शामिलित है। 

अब आप सोच रहे होंगे कि यह क्लोनिंग तकनीक आखिर होती क्या है ? आपको जानकारी के लिए बतादें कि क्लोनिंग तकनीक में एक विशेष नस्ल के पशु की कोशिकाओं का आईवीएफ लैब में संवर्धन किया जाता है। 

इसको सेल कल्चर भी कहा जाता हैं। वर्तमान में संवर्धित कोशिका का मिलान स्लॉटर हाउस से मिली ओवरी केंद्रक रहित अंडाणु से कराया जाता है। इस प्रक्रिया के 8 वें दिन भ्रूण बनकर तैयार हो जाता है। इसके उपरांत भ्रूण को भैंस के गर्भाशय के अंदर हस्तांतरित कर दिया जाता हैं। 

इसके उपरांत क्लोन बच्चे पैदा होते हैं, जो कि बिल्कुल साधारण भैंस की भांति दिखाई देते हैं। जैसा कि हम जानते हैं, कि मुर्रा भैंस की दूध उत्पादन क्षमता की मिसाल पूरी दुनिया देती है। 

यहां तक कि ब्राजील जैसे देश भी आज मुर्रा भैंस की तर्ज पर बड़ी मात्रा में दूध उत्पादन कर रहे हैं। अगर दूध की बात करें तो एक साधारण मुर्रा भैंस प्रतिदिन 15-16 लीटर दूध देती है। 

यही वजह है, कि मध्य प्रदेश से लेकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के डेयरी किसान मुर्रा भैंस को अपनी पहली पसंद मानते हैं।

इस नस्ल की भैंस को पालने से पशुपालकों को लाखों की आमदनी होगी

इस नस्ल की भैंस को पालने से पशुपालकों को लाखों की आमदनी होगी

जैसा कि हम सबको ज्ञात है, कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारे देश में खाद्य पदार्थ एवं डेयरी उत्पादों की बेहद मांग है। परंतु, क्या आपको जानकारी है, कि भारत की सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली भैंस की नस्ल कौन सी है। यदि नहीं तो आपके इस प्रश्न का उत्तर यहां है। साथ ही, यदि आप इस भैंस का पालन कर इसके दूध की बिक्री करते हैं तो आप अच्छा पैसा कमा सकते हैं। भारत में सर्वाधिक दूध देने वाली भैंस की नस्ल मुर्रा को माना जाता है। मुर्रा भैंस औसतन दिन में 25 लीटर से लेकर 30 लीटर तक दूध प्रदान करती है। इस भैंस को उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर पाला जाता है। मुर्रा भैंस का दूध वसा एवं प्रोटीन में उच्च होता है। इसके दूध का सेवन करने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन एवं वसा मिलता है। इस भैंस के दूध का उपयोग विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों जैसे - घी, छाछ, दही और मक्खन तैयार करने के लिए भी उपयोग किया जाता है। मुर्रा भैंस की कीमत की बात की जाए तो ये 50 हजार रुपये से लगाकर 1 लाख रुपये तक होती है। इस भैंस को पालना अत्यंत लाभकारी साबित होता है। एक मुर्रा भैंस से एक दिन में लगभग 25 लीटर दूध मिलता है, जिसके मुताबिक आप दिन के 1000 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक कमा सकते हैं।

इस नस्ल की भैंस भी काफी अधिक दूध प्रदान करती है

साथ ही, मेहसाना भैंस भी एक दिन में लगभग-लगभग 20 से 30 लीटर तक दूध प्रदान कर देती है। ये भैंस सर्वाधिक गुजरात और महाराष्ट्र में पाई जाती है। बतादें, कि दोनों ही राज्यों में इस भैंस का पालन किया जाता है। उधर महाराष्ट्र राज्य में मिलने वाली पंढरपुरी भैंस की नस्ल भी अपनी दूध देने की क्षमता के कारण जानी जाती है। सुरती भैंस भी दूध उत्पादन में काफी शानदार होती है।

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मुर्रा भैंस की कद काठी कैसी होती है ?

मुर्रा भैंस के सींग मुड़े हुए होते हैं एवं दिखने में यह अन्य भैंसों की तुलना में पावरफुल नजर आते हैं। यह भैंस पंजाब एवं हरियाणा राज्यों में अधिकांश देखने को मिलती है। परंतु, वर्तमान में यह अन्य दूसरे देशों में भी पाली जा रही है। सिर्फ यही नहीं अब तो इस भैंस के सीमन का भी तगड़ा व्यापार हो रहा है। इनमें विभिन्न भैंस काफी लंबी एवं ऊंची होती हैं। इनके मालिक इन्हें विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी भेजते हैं। ज्यादातर प्रतियोगियाओं में मुर्रा भैंस ही सबसे अग्रणी रहती हैं। हालांकि, अधिकांश लोग दूध उत्पादन के लिए इनका पालन करते हैं। हरियाणा में इसेकाला सोनाभी कहा जाता है। ये भैंसे थोड़ी अधिक काली होती हैं।